शोभना शर्मा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक महत्वपूर्ण शैक्षिक पहल के तहत “भारतीय गणित परंपरा” शीर्षक से एक विस्तृत मोनोग्राफ तैयार करने की घोषणा की है। यह दस्तावेज़ भारत के प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक गणितीय योगदानों का विस्तृत संकलन होगा, जिसका उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को भारत की समृद्ध गणितीय विरासत से परिचित कराना है। अधिकारियों के अनुसार, यह मोनोग्राफ 150 से 175 पन्नों का होगा और इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इस पहल का मुख्य लक्ष्य भारतीय ज्ञान परंपराओं को शिक्षा के मुख्यधारा पाठ्यक्रम में शामिल करना है।
मोनोग्राफ में भारत के गणितीय इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धियों और नवाचारों का क्रमबद्ध विवरण होगा। इसमें शुल्ब सूत्र, आर्यभटीय, ब्रह्मस्फुटसिद्धांत, लीलावती और केरल स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स जैसी ऐतिहासिक कृतियों और उनके योगदानों को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। शुल्ब सूत्रों के माध्यम से प्राचीन भारतीय गणितज्ञों ने ज्यामिति और यज्ञशालाओं के निर्माण से संबंधित सटीक माप और गणनाओं का ज्ञान दिया। आर्यभट के “आर्यभटीय” में खगोल विज्ञान और गणित के अनेक सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है, जिसने बाद में अरब और यूरोपीय गणित को भी प्रभावित किया। ब्रह्मगुप्त का “ब्रह्मस्फुटसिद्धांत” शून्य के प्रयोग, ऋणात्मक संख्याओं और बीजगणितीय समीकरणों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि भास्कराचार्य की “लीलावती” गणितीय समस्याओं और उनके सरल, व्यावहारिक समाधान के लिए आज भी जानी जाती है।
मोनोग्राफ केवल सिद्धांतों के संकलन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें भारतीय गणित के व्यावहारिक उपयोग को भी दर्शाया जाएगा। इसमें बताया जाएगा कि कैसे गणित का प्रयोग खगोल विज्ञान, वास्तुकला, वाणिज्य और व्यापार में प्राचीन काल से होता आया है। उदाहरण के तौर पर, मंदिर निर्माण में ज्यामितीय सिद्धांतों का प्रयोग, व्यापारिक लेन-देन में गणना पद्धतियां और खगोलीय घटनाओं की सटीक भविष्यवाणी में गणित की भूमिका को विस्तार से समझाया जाएगा।
दस्तावेज़ की प्रामाणिकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण बनाए रखने के लिए इसमें संस्कृत के मूल श्लोकों को भी शामिल किया जाएगा, जिनका सरल हिंदी और अंग्रेज़ी अनुवाद प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही, संबंधित विषयों के समय-सीमा, जीवनी नोट्स और सचित्र उदाहरण भी दिए जाएंगे, ताकि पाठक गणितीय अवधारणाओं को ऐतिहासिक संदर्भों के साथ बेहतर समझ सकें।
CBSE इस कार्य के लिए एक शैक्षणिक एजेंसी का चयन करेगा, जो शोध और लेखन की जिम्मेदारी संभालेगी। साथ ही, एक विशेषज्ञ सलाहकार समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें गणित के इतिहासकार, संस्कृत के विद्वान और शिक्षाविद शामिल होंगे। यह समिति सामग्री के चयन, सटीकता की पुष्टि और प्रस्तुति की गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी।
इस मोनोग्राफ को डिजिटल और प्रिंट, दोनों स्वरूपों में प्रकाशित करने की योजना है। डिजिटल संस्करण को ई-बुक और इंटरैक्टिव पीडीएफ के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें चित्र, आरेख और एनिमेशन के माध्यम से विषय को रोचक और सरल बनाया जाएगा। प्रिंट संस्करण को देशभर के विद्यालयों और पुस्तकालयों में वितरित किया जाएगा, ताकि यह अधिक से अधिक शिक्षकों, छात्रों और शोधकर्ताओं तक पहुंचे।
CBSE का यह कदम केवल गणित की पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए नहीं है, बल्कि यह भारतीय गणितीय परंपरा के संरक्षण और प्रसार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण योगदान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रयास छात्रों में गर्व की भावना जगाते हैं और उन्हें अपने देश की बौद्धिक विरासत को समझने के लिए प्रेरित करते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिक्षा प्रणाली में भारतीय ज्ञान परंपराओं, वैज्ञानिक उपलब्धियों और सांस्कृतिक धरोहर को शामिल किया जाना चाहिए। CBSE का यह मोनोग्राफ इसी दिशा में एक ठोस कदम है। इसके माध्यम से न केवल छात्रों को भारत के गणितज्ञों की उपलब्धियों से अवगत कराया जाएगा, बल्कि यह भी बताया जाएगा कि भारतीय ज्ञान ने विश्व गणित और विज्ञान को किस तरह आकार दिया।