मनीषा शर्मा। केंद्र और राज्य सरकार से अनुदान (Grant) या ऋण (Loan) प्राप्त करने वाले विकास प्राधिकरणों और नगरीय निकायों की ऑडिट अब और ज्यादा सख्त होने जा रही है। भारत के प्रधान महालेखाकार (CAG) ने राजस्थान सरकार को लिखे पत्र में सिफारिश की है कि जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA), अन्य जिलों के विकास प्राधिकरणों और नगर निगम–नगर परिषद जैसे नगरीय निकायों के खर्चों की ऑडिट CAG से करवाई जाए। CAG ने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया कि जिन संस्थाओं को सरकारों से भारी वित्तीय सहायता या ऋण मिलता है, उनका खर्च पारदर्शी तरीके से ऑडिट किया जाना आवश्यक है। पत्र में इसका कानूनी आधार भी बताया गया है।
कब किसी प्राधिकरण या निकाय की CAG से होती है ऑडिट?
CAG ने राज्य सरकार को भेजे पत्र में कहा कि—
यदि किसी विकास प्राधिकरण या नगर निकाय को 25 लाख रुपए से अधिक की सरकारी ग्रांट मिले, या
यदि सरकार द्वारा दिया गया लोन उस निकाय के कुल खर्च का 75% या उससे अधिक हो,
तो वह संस्था CAG ऑडिट के दायरे में आती है। CAG का कहना है कि कई स्थानीय निकाय और विकास प्राधिकरण बड़ी सरकारी ग्रांट लेकर काम करते हैं, लेकिन उनकी ऑडिट अभी तक तय मानकों के अनुसार नहीं होती, जिससे पारदर्शिता में कमी रहती है।
CAG ने प्रस्तुत किया JDA का 5 साल का वित्तीय रिकॉर्ड
पत्र के साथ CAG ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) का पांच वर्ष का बजट रिकॉर्ड भी पेश किया, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि JDA CAG ऑडिट के दायरे में क्यों आता है।
2019-20 का वित्तीय विवरण
CAG के अनुसार—
JDA ने इस वर्ष सरकारी जमीन बेचकर बड़ी आय प्राप्त की, जिसमें से 260.47 करोड़ रुपए सरकार को देने थे, जो JDA ने नहीं दिए।
इसके अलावा अर्बन असेसमेंट रेवेन्यू, फायर सेस और नियमन शुल्क के रूप में भी 68.83 करोड़ रुपए राज्य सरकार को भुगतान किया जाना था।
कुल मिलाकर सरकार से JDA को अप्रत्यक्ष रूप से 329.30 करोड़ रुपए का लाभ मिला।
उसी वर्ष JDA का कुल खर्च 646.97 करोड़ रुपए था, जिससे यह साफ होता है कि सरकारी राशि उसका 50.66% हिस्सा बनती है।
2020–2024 तक सरकारी सहायता 84% से अधिक
CAG ने अन्य वर्षों का भी ब्यौरा पेश किया—
2020-21: 600.60 करोड़ रुपए
2021-22: 670.05 करोड़ रुपए
2022-23: 1368.90 करोड़ रुपए
2023-24: 1739.40 करोड़ रुपए
इन सभी वर्षों में JDA को मिली सरकारी सहायता उसके कुल खर्चे का 84% से अधिक रही। CAG का स्पष्ट तर्क है कि इतनी अधिक सरकारी सहायता पाने वाली संस्था को CAG ऑडिट के बाहर रखना नियमों के खिलाफ है।
प्रधानमंत्री की 2017 की स्पीच का हवाला
CAG ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री द्वारा 2017 में दी गई स्पीच का जिक्र भी किया। उस भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था कि—
विकास प्राधिकरणों की आय और खर्च की जानकारी जनता के सामने पारदर्शी होनी चाहिए,
और सरकार को चाहिए कि उनकी नियमित CAG ऑडिट करवाई जाए।
प्रधानमंत्री के इस सुझाव के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तुरंत आदेश जारी किए, और तब से UP में सभी विकास प्राधिकरणों की ऑडिट CAG के माध्यम से होती है। CAG ने राजस्थान सरकार से भी इसी प्रक्रिया को लागू करने की सिफारिश की है।
CAG की सिफारिशों का महत्व
अगर राज्य सरकार CAG की इस सिफारिश को स्वीकार कर लेती है, तो—
JDA, Jodhpur Development Authority, Kota Development Authority सहित अन्य सभी विकास प्राधिकरण CAG ऑडिट में आएंगे,
वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी,
और सरकारी ग्रांट के खर्च का स्पष्ट रिकॉर्ड जनता के सामने आएगा।
CAG का जोर इस बात पर है कि सरकारी पैसों से चलने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए।


