राजस्थान की वित्त मंत्री और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बुधवार को विधानसभा में पेश किए गए बजट 2026 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देते हुए कई अहम घोषणाएं कीं। इनमें सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि अब ऐसे मरीज, जिनके पास कोई पहचान पत्र या आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, वे भी मुफ्त इलाज का लाभ उठा सकेंगे।
वित्त मंत्री ने कहा कि कई बार सामाजिक या आर्थिक कारणों से लोग पहचान-पत्र नहीं होने की स्थिति में उपचार से वंचित रह जाते हैं। इसे देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया है कि ऐसे मरीजों को मुख्यमंत्री चिकित्सा आरोग्य योजना और निरोगी राजस्थान योजना के तहत बिल्कुल निशुल्क चिकित्सा सुविधा मिलेगी।
‘राज सुरक्षा’ योजना: गंभीर मरीजों और एक्सीडेंट के लिए नई पहल
राजस्थान सरकार ने आपात चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए ‘राज सुरक्षा’ नाम से नई योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत:
एक्सीडेंट मामलों में तुरंत इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
हाईवे पर स्थापित रेस्ट सेंटर्स पर एंबुलेंस तैनात की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य है कि सड़क दुर्घटना के बाद पहले ‘गोल्डन आवर’ में त्वरित उपचार मिल सके और मृत्यु दर को कम किया जा सके।
मेंटल हेल्थ को लेकर बड़ा फैसला, एसएमएस में नया सेंटर
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए सरकार ने ‘राज ममता’ नाम से विशेष कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत:
एसएमएस अस्पताल, जयपुर में नया मेंटल हेल्थ सेंटर खोला जाएगा।
हर जिला अस्पताल में मेंटल हेल्थ केयर सेंटर स्थापित होंगे।
कॉलेजों में मेंटल हेल्थ और काउंसलिंग के लिए विशेषज्ञ काउंसलर नियमित रूप से जाएंगे।
हर ग्राम पंचायत में स्वास्थ्य जागरूकता हेतु आरोग्य शिविर लगाए जाएंगे।
यह पहला मौका है जब राज्य सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य को इतनी व्यापक रणनीति में शामिल किया है।
अटेंडेंट्स के लिए धर्मशालाएं, जेके लोन में नया आईपीडी टावर
बड़े शहरों के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के परिजनों को ठहरने की समस्या को देखते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि जयपुर, जोधपुर, बीकानेर जैसे बड़े शहरों के प्रमुख अस्पतालों में धर्मशालाओं का निर्माण कराया जाएगा। इस कार्य पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा, जयपुर के जेके लोन अस्पताल में 75 करोड़ रुपये की लागत से नया आईपीडी टावर बनाया जाएगा और नवजात शिशुओं के लिए आधुनिक नियोनेटल आईसीयू की स्थापना होगी।
मोक्षवाहिनी योजना: अस्पताल से घर तक डेड बॉडी की निशुल्क सुविधा
सरकार ने मानवता से जुड़े एक अहम मुद्दे को ध्यान में रखते हुए घोषणा की कि अब अस्पताल में मृत्यु होने पर मृतक के शव को घर तक पहुंचाने की सेवा निःशुल्क उपलब्ध होगी। इसके लिए मोक्षवाहिनी योजना शुरू की जाएगी। यह सुविधा उन परिवारों के लिए बड़ी राहत होगी जो निजी वाहन या एंबुलेंस का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं होते।
चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने के लिए नए पद और सुरक्षा उपाय
स्वास्थ्य विभाग को सुदृढ़ करने के लिए बजट में कई संरचनात्मक सुधारों की घोषणा भी शामिल है।
चिकित्सा विभाग में 1000 नए पदों का सृजन किया जाएगा।
अस्पतालों में आग से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए फायर सेफ्टी उपकरणों पर 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में टेली एक्स-थ्रॉम्बोलिसिस सुविधा प्रदान की जाएगी, ताकि हार्ट अटैक की पहचान स्थानीय स्तर पर तुरंत की जा सके। इसके अलावा, संभाग स्तर पर सभी चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ को कार्डियक लाइफ सपोर्ट सर्टिफिकेशन का प्रशिक्षण चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा।
सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर कम करने के लिए CPR ट्रेनिंग अनिवार्य
ड्राइविंग लाइसेंस धारकों के लिए सरकार ने बड़ा ऐलान किया कि सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर कम करने के लिए सभी लाइसेंसधारकों को सीपीआर का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाएगा। यह कदम सड़क सुरक्षा को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


