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बजट 2026: युवाशक्ति से प्रेरित निर्मला सीतारमण का नौवां बजट, इंफ्रा-मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा दांव

बजट 2026: युवाशक्ति से प्रेरित निर्मला सीतारमण का नौवां बजट, इंफ्रा-मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा दांव

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश कर एक नया रिकॉर्ड बनाया। बजट भाषण की शुरुआत में उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष का यह बजट ‘युवाशक्ति’ से प्रेरित है और यह तीन प्रमुख कर्तव्यों पर आधारित है। सरकार के आर्थिक रोडमैप के लिहाज से बजट 2026 को एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिस पर टैक्सपेयर्स, कारोबारी वर्ग और शेयर बाजार की गहरी नजर रही।

वित्त मंत्री ने साफ किया कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं, ट्रेड टेंशन और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बावजूद भारत ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे बड़ा भरोसा

बजट 2026 में सरकार ने एक बार फिर इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक विकास का इंजन माना है। अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपए का कैपेक्स तय किया गया है, जो पिछले साल के 11.2 लाख करोड़ रुपए से काफी अधिक है। सरकार का मानना है कि सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और शहरी ढांचे में निवेश से रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे और निजी निवेश को भी गति मिलेगी।

रेलवे सेक्टर में पश्चिम बंगाल के डानकुनी के लिए नए फ्रेट कॉरिडोर का ऐलान किया गया है। इससे पूर्वी भारत में माल ढुलाई सस्ती और तेज होगी, जिससे इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट को फायदा मिलने की उम्मीद है।

दुर्लभ खनिजों और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस

वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने केरल, तमिलनाडु और ओडिशा में रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित करने का फैसला किया है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि खनिज संपन्न राज्यों को अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाया जाए।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता दी गई है। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को दोबारा जीवित करने और नई तकनीक आधारित इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की बात बजट में प्रमुखता से रखी गई।

टेक्सटाइल, फार्मा और चिप इंडस्ट्री को बूस्ट

बजट 2026 में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बड़े टेक्सटाइल पार्क बनाने का ऐलान किया गया है। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर खुलने की संभावना है।

दवाइयों के क्षेत्र में सरकार ने ‘बायो-फार्मा शक्ति’ योजना की घोषणा की है। इसके तहत 10,000 करोड़ रुपए के निवेश से तीन नए संस्थान खोले जाएंगे। इसका उद्देश्य भारत को ग्लोबल फार्मा हब के रूप में और मजबूत करना है।

टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने India Semiconductor Mission (ISM) 2.0 लॉन्च करने का ऐलान किया। साथ ही मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स के कलपुर्जे बनाने के लिए बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

MSME और शहरों के विकास पर जोर

बजट में MSME सेक्टर को ग्लोबल चैंपियन बनाने की रणनीति सामने रखी गई है। सरकार का मानना है कि छोटे और मध्यम उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना जरूरी है।

इसके अलावा शहरों को व्यापार और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी खास ध्यान दिया गया है, ताकि शहरीकरण के साथ-साथ रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हों।

बजट 2026 के तीन मुख्य विजन

वित्त मंत्री ने बजट के तीन मूल स्तंभ बताए—

  1. रफ्तार: उत्पादकता बढ़ाकर आर्थिक विकास की गति तेज करना।

  2. क्षमता: लोगों की स्किल और काबिलियत को निखारना ताकि वे देश की तरक्की में भागीदार बनें।

  3. सबका साथ: हर परिवार और हर क्षेत्र तक कमाई के पर्याप्त संसाधन और अवसर पहुंचाना।

अर्थव्यवस्था पर सरकार का रिपोर्ट कार्ड

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने पिछले 12 सालों की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि भारत ने आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चलते हुए मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाई है। सुधारों के चलते देश करीब 7% की विकास दर हासिल कर रहा है, जिससे गरीबी कम करने में मदद मिली है। महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया गया।

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