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जैसलमेर बॉर्डर पर बीएसएनएल 4G टावर का हुआ उद्घाटन

जैसलमेर बॉर्डर पर बीएसएनएल 4G टावर का हुआ उद्घाटन

मनीषा शर्मा। जैसलमेर जिले के सरहदी क्षेत्र में शनिवार को बीएसएनएल के नए 4G मोबाइल टावर का उद्घाटन किया गया। यह टावर विशेष रूप से सीमा चौकी अभयवाला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तथा सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों के लिए स्थापित किया गया है। उद्घाटन का वर्चुअल कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उड़ीसा के झारसुगुड़ा से किया और इसे देश को समर्पित किया।

पीएम मोदी का संबोधन

प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन के अवसर पर कहा कि भारत ने दूरसंचार के क्षेत्र में स्वदेशी 4G स्टैक विकसित कर एक नई उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक भारत की “निर्भरता से आत्मविश्वास” की यात्रा को मजबूत करेगी। मोदी ने कहा, “आज भारत विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं है, बल्कि खुद की तकनीक विकसित कर दुनिया को राह दिखा रहा है। बीएसएनएल का यह 4G स्टैक आत्मनिर्भर भारत की भावना को और मजबूत करेगा।”

सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याएं

जैसलमेर पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ जिला है। यहां कई गांव और सीमा चौकियां रेगिस्तान के दूरस्थ इलाकों में स्थित हैं। पिछले कई वर्षों से यहां के ग्रामीण और BSF के जवान नेटवर्क की समस्या से जूझते रहे हैं। कॉल और इंटरनेट की सुविधा न होने के कारण जवान परिवार से संपर्क नहीं कर पाते थे, और ग्रामीण शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की जानकारी तक आसानी से नहीं पहुंच पाते थे।

बीएसएनएल का नया 4G टावर इसी समस्या का समाधान है। यह टावर जैसलमेर शहर से लगभग 130 किलोमीटर दूर पोछीना गांव के पास लगाया गया है। अब सीमा क्षेत्र में जवान और ग्रामीण उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल सेवाओं से जुड़ सकेंगे।

बीएसएनएल का स्वदेशी 4G स्टैक

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह 4G स्टैक पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है और आगे इसे 5G और 6G नेटवर्क में भी अपग्रेड किया जा सकेगा। वर्तमान में भारत ने 97,500 से अधिक मोबाइल 4G टावर तैयार किए हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 37,000 करोड़ रुपये है। इस पहल का उद्देश्य केवल शहरों तक नेटवर्क पहुंचाना नहीं, बल्कि सीमा और ग्रामीण इलाकों तक डिजिटल सुविधाओं को फैलाना है।

जवानों और ग्रामीणों को लाभ

इस टावर से BSF के जवान अब रेगिस्तान में भी परिवार और कमांड सेंटर से सहज संपर्क कर सकेंगे। इससे उनकी मानसिक स्थिति और मनोबल दोनों में सुधार होगा। स्थानीय ग्रामीण भी डिजिटल लेन-देन, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उठा पाएंगे। किसानों को मौसम संबंधी जानकारी, कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं की सूचनाएं तुरंत मिलेंगी।

डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा

बीएसएनएल की यह पहल केंद्र सरकार की “डिजिटल इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” नीतियों से मेल खाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों में नेटवर्क सुविधा पहुंचने से छोटे व्यवसाय, डिजिटल भुगतान प्रणाली और ई-कॉमर्स के अवसर बढ़ेंगे। इस नेटवर्क के माध्यम से देश की दूरस्थ सीमाओं में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति मिलेगी।

सुरक्षा और रणनीतिक महत्व

सैन्य दृष्टिकोण से यह टावर अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरहद पर तैनात सुरक्षा बलों को तेज और भरोसेमंद संचार की सुविधा मिलना अनिवार्य है। BSF अधिकारी मानते हैं कि किसी भी आपात स्थिति या परिचालन में तेजी से सूचना साझा करना अब संभव होगा, जिससे सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी।

बीएसएनएल की पहल और भविष्य की योजनाएं

बीएसएनएल ने पिछले कुछ वर्षों में सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया है। आने वाले दो वर्षों में राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में 4G और 5G सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। बीएसएनएल का उद्देश्य है कि सीमा पर तैनात हर जवान और हर ग्रामीण घर बैठे डिजिटल सेवाओं से जुड़ सके।

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