मनीषा शर्मा। राजस्थान में सवर्ण समाज को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के तहत मिले 10 प्रतिशत आरक्षण को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अब ब्राह्मण समाज ने इस आरक्षण को बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने की मांग रखी है। कोटा में विप्र समाज के पदाधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। यह मांग ऐसे समय पर सामने आई है, जब प्रदेश में आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं।
कोटा में विप्र समाज की मुखर आवाज
कोटा में विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भुवनेश्वर शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने में विश्वास करता रहा है। उन्होंने कहा कि समाज ने शुरू से ही 14 प्रतिशत आरक्षण की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा EWS श्रेणी में केवल 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इसके बावजूद समाज ने इसे स्वीकार करते हुए शांति बनाए रखी और सरकार के निर्णय का सम्मान किया।
भुवनेश्वर शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज के लोग शिक्षित हैं और संगठित होकर अपनी मांगों को सामने रख रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार समाज की वास्तविक समस्याओं और मांगों को अनदेखा करती रही, तो सड़क पर उतरकर आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
क्यों उठ रही है 14 प्रतिशत आरक्षण की मांग
ब्राह्मण समाज का तर्क है कि वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में 10 प्रतिशत आरक्षण पर्याप्त नहीं है। समाज के कई वर्ग ऐसे हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद सीमित अवसरों के कारण शिक्षा और रोजगार में पिछड़ रहे हैं। विप्र समाज का कहना है कि जनसंख्या के अनुपात और आर्थिक वास्तविकताओं को देखते हुए EWS आरक्षण को 14 प्रतिशत किया जाना चाहिए, ताकि वास्तव में जरूरतमंद सवर्ण परिवारों को इसका लाभ मिल सके।
समाज के नेताओं का यह भी कहना है कि EWS आरक्षण लागू होने के बाद भी कई पात्र अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में पीछे रह जाते हैं, क्योंकि सीमित आरक्षण के कारण प्रतिस्पर्धा अत्यधिक बढ़ जाती है।
आंदोलन के संकेत, लेकिन फिलहाल शांति का रास्ता
विप्र समाज के पदाधिकारियों ने यह जरूर स्पष्ट किया कि फिलहाल समाज शांति और संवाद के रास्ते पर चल रहा है। सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए ज्ञापन, सम्मेलन और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से आवाज उठाई जा रही है। हालांकि, यदि लंबे समय तक इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो आंदोलन का विकल्प खुला रहेगा।
भुवनेश्वर शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा कानून और संविधान के दायरे में रहकर अपनी लड़ाई लड़ता आया है। समाज का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि न्याय और समान अवसर प्राप्त करना है।
21 दिसंबर को अन्नकूट महोत्सव और परिचय सम्मेलन
इसी बीच विप्र फाउंडेशन के तत्वावधान में 21 दिसंबर को कोटा में अन्नकूट महोत्सव एवं राष्ट्रीय स्तर का युवक-युवती परिचय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम मंगलेश्वरी गार्डन, रंगबाड़ी रोड पर आयोजित होगा। इस आयोजन में सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूती देने के साथ-साथ समाज से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
550 से अधिक युवक-युवतियां लेंगे भाग
विप्र फाउंडेशन के प्रदेश प्रमुख संगठन मंत्री हरिसूदन शर्मा ने बताया कि यह सातवां राष्ट्रीय स्तर का परिचय सम्मेलन होगा। कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-अर्चना के साथ की जाएगी। इसमें कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ के साथ-साथ मध्यप्रदेश के इंदौर, भोपाल सहित अन्य शहरों से 550 से अधिक विवाह योग्य युवक-युवतियां अपने अभिभावकों के साथ शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में भाग लेने वाले युवक-युवतियां उच्च शिक्षा प्राप्त, स्टार्टअप से जुड़े या विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी कर रहे हैं। यह आयोजन समाज में आपसी सहयोग, संवाद और भविष्य की दिशा तय करने का एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।
सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से अहम मुद्दा
ब्राह्मण समाज द्वारा EWS आरक्षण को 14 प्रतिशत करने की मांग अब केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसका राजनीतिक महत्व भी बढ़ता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि राज्य और केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या समाज की आशंकाओं व अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं।


