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टोंक में कंबल वितरण विवाद बढ़ा: पूर्व सांसद जौनपुरिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज

टोंक में कंबल वितरण विवाद बढ़ा: पूर्व सांसद जौनपुरिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज

राजस्थान की राजनीति में टोंक जिले से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद तीखा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व सांसद और बीजेपी नेता सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर आरोप है कि उन्होंने कंबल वितरण कार्यक्रम के दौरान एक महिला का नाम पूछकर, उसके मुस्लिम समुदाय से होने पर उससे कंबल वापस ले लिया। इस मामले में सामने आए वीडियो ने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है और विपक्ष समेत कई जनप्रतिनिधियों ने इसे अमानवीय, असंवेदनशील और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है।

विवादित घटना निवाई क्षेत्र के करेड़ा बुजुर्ग गांव की बताई जा रही है, जहां रविवार को जौनपुरिया ने मंदिर परिसर में कंबल वितरण कार्यक्रम रखा था। कार्यक्रम में एक महिला ने अपना नाम सुकरान खान बताया, जिसके बाद पूर्व सांसद ने कथित रूप से उससे कंबल वापस ले लिया और कहा कि जो प्रधानमंत्री को गाली देते हैं, उन्हें कंबल लेने का अधिकार नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यह दावा किया गया है कि पहले जिन महिलाओं को कंबल दे दिया गया था, उनके मुस्लिम होने की जानकारी मिलने पर कंबल वापस ले लिए गए।

पूर्व सांसद की सफाई, कहा—यह सरकारी नहीं, निजी कार्यक्रम था

विवाद बढ़ने के बाद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि यह कोई सरकारी योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि उनका निजी कार्यक्रम था। उन्होंने कहा कि वे अपने व्यक्तिगत स्तर पर सहायता प्रदान कर रहे थे और इसमें वे अपने मानकों के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, इस सफाई के बाद भी राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि धर्म या विचारधारा के आधार पर भेदभाव किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है, चाहे कार्यक्रम निजी ही क्यों न हो।

सांसद हरीश चंद्र मीना ने जताई नाराज़गी, प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

इस घटना पर सबसे कड़ी प्रतिक्रिया सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद हरीश चंद्र मीना की ओर से आई है। उन्होंने इसे असंवेदनशील, अमानवीय और संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया। सांसद मीना ने इस घटना को लोकतांत्रिक मर्यादा का खुला उल्लंघन बताया और कहा कि जनप्रतिनिधियों को ऐसी भाषा और व्यवहार कतई शोभा नहीं देता, जो समाज को धर्म या विचारधारा के आधार पर बांटने का प्रयास करे।

उन्होंने इस मामले में तत्काल प्रभाव से हस्तक्षेप की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा पूर्व सांसद जौनपुरिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। सांसद मीना ने कहा कि देश में स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति या राजनीतिक दृष्टिकोण के आधार पर भेदभाव करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है।

“लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात, समाज में गलत संदेश”

सांसद ने अपने पत्र में लिखा कि यदि सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रभावशाली लोग इस प्रकार का आचरण करेंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तो इससे सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। देश की एकता के लिए ऐसी मानसिकता अत्यंत हानिकारक है और इसे बढ़ावा देने वालों को राजनीतिक या सामाजिक संरक्षण देना लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत की पहचान विविधता में एकता, सामाजिक समरसता और परस्पर सम्मान पर आधारित है। किसी भी प्रकार का भेदभाव देश की छवि को प्रभावित करता है और लोकतांत्रिक संरचना को कमजोर करता है। सांसद मीना ने कहा कि यह घटना न केवल मुस्लिम समुदाय के प्रति असम्मान दर्शाती है, बल्कि प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा पर भी सीधा प्रतिकूल प्रभाव डालती है, क्योंकि उनका नाम इस संदर्भ में लिया गया।

राजस्थान की राजनीति में नया सियासी तूफान

वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह घटना बीजेपी की संकीर्ण मानसिकता को दिखाती है और इसे किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों से पहले ऐसे विवाद समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास हैं, जिनका प्रतिकार किया जाना आवश्यक है।

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