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राजस्थान निकाय और पंचायत उपचुनाव में BJP की बड़ी जीत

राजस्थान निकाय और पंचायत उपचुनाव में BJP की बड़ी जीत

शोभना शर्मा। राजस्थान के 12 जिलों में हुए पंचायत और नगर निकाय के उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है। कुल 36 सीटों में से 28 पर भाजपा ने कब्जा कर लिया, जिसमें 27 पर सीधे भाजपा प्रत्याशी और 1 पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी ने जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस की स्थिति बेहद खराब रही और वह मात्र 4 सीटों पर ही सिमट गई।

इस जीत को भाजपा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और सुशासन का परिणाम बताया है। वहीं कांग्रेस की हार को उसकी घटती जमीनी पकड़ और संगठनात्मक कमजोरी से जोड़ा जा रहा है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस पर बोला हमला

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस जीत को पार्टी की नीतियों और राज्य सरकार की योजनाओं पर जनता की मोहर बताया। उन्होंने कहा कि “हमने जिन जिलों में उपचुनाव लड़ा, वहां जनता ने BJP पर भरोसा जताया। कांग्रेस की हार उनके नेतृत्व और संगठन की विफलता को उजागर करती है।”

उन्होंने विशेष रूप से कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा को निशाने पर लेते हुए कहा कि “जो नेता पूरे प्रदेश में भाषण दे रहे हैं, वे अपनी ही विधानसभा सीट लक्ष्मणगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी को नहीं जिता पाए। यह कांग्रेस की ज़मीनी सच्चाई है।”

कांग्रेस के गढ़ में भी सेंधमारी

डोटासरा के गढ़ लक्ष्मणगढ़ में भाजपा की जीत ने कांग्रेस को गहरी चोट दी है। यह जीत न केवल भाजपा की रणनीतिक सफलता का प्रतीक है, बल्कि कांग्रेस के नेताओं की लोकल पकड़ पर भी सवाल खड़े करती है।

मदन राठौड़ ने कहा, “कांग्रेस खुद को संभाल नहीं पा रही है। वे केवल भाजपा की आलोचना करते हैं, लेकिन जब जिम्मेदारी निभाने की बात आती है, तो फेल हो जाते हैं। यह परिणाम उसी असफलता का सबूत है।”

उपचुनाव परिणामों का आंकड़ा

पंचायत और निकाय उपचुनावों के परिणामों की बात करें तो भाजपा का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा:

  • जिला परिषद: 6 में से 5 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया।

  • पंचायत समिति: 18 सीटों में से 12 भाजपा ने जीतीं, जबकि कांग्रेस को केवल 3 पर संतोष करना पड़ा।

  • नगर निकाय: 12 सीटों में से 10 भाजपा के पक्ष में गईं।

इन नतीजों से साफ है कि भाजपा की पकड़ नगरीय और ग्रामीण, दोनों स्तरों पर मजबूत होती जा रही है।

कानून व्यवस्था पर भी कांग्रेस को घेरा

मदन राठौड़ ने उपचुनाव परिणामों के साथ-साथ हाल ही में गुर्जर आंदोलन और ट्रेन रोकने की घटना को लेकर भी कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस नेताओं की आपसी मुलाकातों के बाद यदि आंदोलन उग्र होता है और ट्रेनें रोकी जाती हैं, तो यह चिंताजनक है। इससे साफ होता है कि कांग्रेस में समन्वय का अभाव है और सत्ता संघर्ष बना हुआ है।”

उन्होंने यह भी कहा कि “जो भी विरोध करता है, उसे संविधान ने अधिकार दिए हैं, लेकिन जनता के जीवन को अस्त-व्यस्त नहीं किया जा सकता। यदि कांग्रेस के नेताओं की वजह से हालात बिगड़े हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”

कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

इस उपचुनाव परिणाम ने कांग्रेस की रणनीति और जमीनी स्तर पर संगठन की ताकत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कांग्रेस को न केवल नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता है, बल्कि संगठनात्मक ढांचे को भी मजबूत करने की जरूरत है।

डोटासरा जैसे वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी की हार यह दिखाती है कि कांग्रेस जनता से दूर होती जा रही है, जबकि भाजपा जनता के मुद्दों पर ज्यादा गंभीरता से काम कर रही है।

भाजपा का दावा- 2028 तक का ट्रेंड सेट

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपचुनाव परिणाम 2028 विधानसभा चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं। भाजपा की सरकार बनने के बाद यह पहला बड़ा जनमत है, जो सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर जैसा है।

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