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बीजेपी का आरोप: राजस्थान के कांग्रेस सांसदों का पैसा हरियाणा में खर्च, टीकाराम जूली बोले — सरकार आपकी है, जांच कराएं

बीजेपी का आरोप: राजस्थान के कांग्रेस सांसदों का पैसा हरियाणा में खर्च, टीकाराम जूली बोले — सरकार आपकी है, जांच कराएं

मनीषा शर्मा। राजस्थान की सियासत में एक नए विवाद ने गर्मी बढ़ा दी है। बीजेपी के आईटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय ने कांग्रेस के तीन सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि राजस्थान के सांसदों ने अपने सांसद निधि (एमपी-लेड फंड) का पैसा हरियाणा के कैथल क्षेत्र में खर्च करने की सिफारिश की है। जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उनमें संजना जाटव, राहुल कसवां और बृजेंद्र ओला शामिल हैं।

आरोप: जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल

अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस से बड़ा “धोखेबाज” कोई नहीं हो सकता। उनके अनुसार, इन सांसदों ने जो फंड राजस्थान के विकास के लिए था, उसे हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में लगाने की सिफारिश की। यह क्षेत्र कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के बेटे का निर्वाचन क्षेत्र बताया जा रहा है।
मालवीय ने लिखा कि पिछले तीन–चार महीनों में हुई ये सिफारिशें वंशवाद और जनता के पैसे की खुली लूट का उदाहरण हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि राजस्थान के लोगों का पैसा दूसरे राज्य में क्यों भेजा जा रहा है और इसका फायदा किसे मिल रहा है।

टीकाराम जूली की प्रतिक्रिया

इस आरोप के बाद राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सांसदों ने संभवतः नियमों के अनुसार ही काम किया होगा। जूली ने यह भी कहा कि राज्यसभा सदस्यों के लिए ऐसे प्रावधान होते हैं, जिनमें वे अन्य क्षेत्रों में भी धन खर्च कर सकते हैं।

सवालों पर बदला बयान

जब उन्हें बताया गया कि यह सिफारिशें राज्यसभा नहीं, बल्कि लोकसभा सांसदों ने की हैं, तो जूली ने सवाल उठाया कि अधिकारी क्या कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार बीजेपी की है और अधिकारी भी उसी सरकार के अधीन काम करते हैं। ऐसे में यह उनकी जिम्मेदारी थी कि वे देखें कि कौन-सा प्रस्ताव कहां भेजा जा रहा है। जूली ने कहा कि यदि नियमों के बाहर कोई सिफारिश हुई है, तो सरकार को जांच करानी चाहिए।

राजनीतिक बहस और आगे का रास्ता

इस पूरे विवाद ने राजस्थान और हरियाणा की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। बीजेपी इसे जनता के धन के दुरुपयोग का मुद्दा बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे नियमों और प्रक्रियाओं से जुड़ा मामला कह रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार औपचारिक जांच शुरू करती है और अगर करती है, तो सच्चाई किस दिशा में जाती है। फिलहाल यह विवाद सियासी बयानबाजी को और तेज करता दिख रहा है।

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