जयपुर जिले के चौमूं कस्बे में बस स्टैंड स्थित मस्जिद को लेकर राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और पूर्व विधायक रामलाल शर्मा के हालिया बयान के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है। उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
भोपावास कार्यक्रम में दिया बयान
रामलाल शर्मा ने भोपावास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान चौमूं बस स्टैंड मस्जिद विवाद पर अपनी बात रखी। उन्होंने इबादत और एकाग्रता को लेकर उदाहरण देते हुए कहा कि डर के माहौल में की जाने वाली इबादत का अल्लाह से कोई वास्तविक संपर्क नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति जंगल में तपस्या कर रहा हो और उसके मन में हर समय यह डर बना रहे कि कहीं शेर या भेड़िया हमला न कर दे, तो ऐसी तपस्या सफल नहीं हो सकती। इसी तरह यदि इबादत के दौरान यह आशंका बनी रहे कि पीछे से कोई वाहन टक्कर मार सकता है, तो वह इबादत पूरी श्रद्धा और एकाग्रता से नहीं हो पाती।
मस्जिद के आसपास पड़े पत्थरों पर विवाद
दरअसल, चौमूं बस स्टैंड के पास स्थित मस्जिद के आसपास लंबे समय से पत्थरों और निर्माण सामग्री के पड़े होने को लेकर विवाद चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पत्थरों के कारण बस स्टैंड क्षेत्र में यातायात बाधित होता है और जाम की स्थिति बनी रहती है। रामलाल शर्मा ने अपने बयान में कहा कि पहले वहां दो ट्रॉली पत्थर पड़े थे, जिनमें से अधिकांश हटा लिए गए हैं। अब केवल कुछ लढ्डे शेष हैं। उन्होंने अपील की कि यदि इन शेष पत्थरों को खुद हटाकर राहत दी जाती है तो यह एक सकारात्मक पहल होगी और जनहित में होगा।
जनहित और यातायात व्यवस्था का मुद्दा
बीजेपी नेता ने कहा कि चौमूं बस स्टैंड पर लगने वाला जाम आम लोगों के लिए रोजमर्रा की बड़ी परेशानी बन चुका है। यात्रियों, व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को आए दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना था कि बस स्टैंड जैसे संवेदनशील स्थान पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण यातायात व्यवस्था को प्रभावित करता है। ऐसे में जनहित को ध्यान में रखते हुए अतिक्रमण हटाना आवश्यक है, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
अतिक्रमण हटना तय, राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण
रामलाल शर्मा ने अपने बयान में दो टूक शब्दों में कहा कि अतिक्रमण आज नहीं तो कल हटेगा ही, इसमें कोई संदेह नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया कानून और न्याय के तहत होगी। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद राम मंदिर का निर्माण संभव हो पाया, उसी तरह इस मामले में भी कानून और न्याय के आधार पर निर्णय आएगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
अदालतों के फैसलों का हवाला
बीजेपी नेता ने दावा किया कि इस मामले में दो अदालतें पहले ही इसे अतिक्रमण मान चुकी हैं। उनका कहना था कि तीसरी अदालत भी उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर अपना फैसला देगी। उन्होंने कहा कि न्यायालयों के निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए और कानून के दायरे में रहते हुए समाधान निकाला जाना चाहिए।
बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
रामलाल शर्मा के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि यह बयान कानून व्यवस्था, यातायात सुधार और जनहित से जुड़ा हुआ है। वहीं, विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस बयान को भड़काऊ और आपत्तिजनक बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं और मामले को और संवेदनशील बना सकते हैं।
चौमूं मस्जिद विवाद का भविष्य
फिलहाल चौमूं बस स्टैंड मस्जिद को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। एक ओर जनहित और यातायात व्यवस्था का सवाल है, तो दूसरी ओर धार्मिक स्थल से जुड़ी संवेदनशीलता भी इस मामले को जटिल बना रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन और न्यायालय के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं। साथ ही राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह देखना अहम होगा कि इस विवाद का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ता है और स्थानीय लोगों को कब राहत मिलती है।


