मनीषा शर्मा। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कई मोर्चों के अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने छह मोर्चों में नई नियुक्तियां की हैं, जबकि महिला मोर्चा की घोषणा फिलहाल रोकी गई है। इन बदलावों में खास बात यह है कि पार्टी ने दो पूर्व केंद्रीय मंत्रियों, एक मौजूदा विधायक और कुछ अनुभवी संगठनात्मक नेताओं पर भरोसा जताया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी आगामी संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए अपने मोर्चों को मजबूत बनाना चाहती है।
घोषित सूची में सबसे बड़ा बदलाव युवा मोर्चा में देखने को मिला। अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रहे अंकित चेची को हटाकर उनकी जगह शंकर गोरा को युवा मोर्चा का नया अध्यक्ष बनाया गया है। शंकर गोरा लंबे समय से छात्र राजनीति में सक्रिय रहे हैं। एबीवीपी में प्रदेश सहमंत्री के रूप में काम करने के बाद वे पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता भी रह चुके हैं। युवाओं में उनकी मजबूत पकड़ और संगठन में सक्रिय भूमिका को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में युवा मोर्चा का कैडर और अधिक ऊर्जावान और प्रभावी बनेगा।
अल्पसंख्यक मोर्चे के मामले में पार्टी ने निरंतरता बनाए रखी है। केवल हमीद खां मेवाती को फिर से इस मोर्चे की कमान सौंपी गई है। उनका अनुभव और अल्पसंख्यक वर्ग में नेटवर्क को देखते हुए पार्टी ने उन्हें रिपीट कर संगठनात्मक संदेश दिया है कि जहां आवश्यकता हो वहां स्थिरता भी उतनी ही जरूरी है जितनी बदलाव।
पार्टी ने इस बार दो पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को भी विशेष जिम्मेदारियां देकर उन्हें संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर दिया है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री निहालचंद मेघवाल को एससी मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। निहालचंद वर्ष 2014 और 2019 में श्रीगंगानगर से सांसद रहे तथा केंद्र सरकार के पहले कार्यकाल में उन्होंने मंत्री के रूप में काम किया। हाल के वर्षों में वे सक्रिय राजनीति से कुछ दूरी पर थे, लेकिन अब पार्टी ने उन्हें फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर संगठन में उनकी वापसी सुनिश्चित की है। यह फैसला एससी वर्ग में बीजेपी की पकड़ मजबूत करने की रणनीति से भी जुड़ा माना जा रहा है।
इसी तरह, पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी को प्रदेश किसान मोर्चा की कमान सौंपी गई है। कृषि क्षेत्र और किसानों के मुद्दों पर उनका अनुभव पार्टी के लिए बड़ी पूंजी माना जा रहा है। किसान संगठनों की बदलती राजनीति और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह नियुक्ति काफी रणनीतिक मानी जा रही है। चौधरी के नेतृत्व में किसान मोर्चा, नीतिगत मुद्दों और किसानों से संवाद को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
एसटी मोर्चा का नेतृत्व अब भीलवाड़ा के जहाजपुर से विधायक गोपीचंद मीणा संभालेंगे। उनके पास संगठन और जनजातीय समाज दोनों में मजबूत संपर्क हैं। आदिवासी इलाकों में राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं, ऐसे में पार्टी ने मैदान पर सक्रिय और जनाधार रखने वाले नेता को जिम्मेदारी देकर स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस वर्ग में अपने आधार को और मजबूत करना चाहती है।
इसी क्रम में महेंद्र कुमावत को ओबीसी मोर्चा का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पिछली कार्यकारिणी में वे प्रदेश मंत्री रहे थे और संगठन में उनकी छवि मेहनती नेता की रही है। ओबीसी वर्ग में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह नियुक्ति भी काफी अहम मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा बदलाव सिर्फ पदों की अदला-बदली भर नहीं है, बल्कि 2025 और आगे के लिए पार्टी का एक स्पष्ट संगठनात्मक रोडमैप है। मोर्चा स्तर पर मजबूत, सक्रिय और प्रभावशाली चेहरों को आगे लाकर पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। साथ ही पुराने और अनुभवी नेताओं को फिर से जिम्मेदारी देकर संतुलन बनाए रखा गया है।
निहालचंद मेघवाल की नियुक्ति को लेकर खास चर्चा भी हो रही है। हाल ही में उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात और उसके बाद आए इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह के संकेत पैदा किए हैं। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें फिर से संगठन की मुख्यधारा में बड़ी भूमिका देना चाहती है।


