मनीषा शर्मा। राजस्थान में SI भर्ती परीक्षा (SI Recruitment Exam) को लेकर हाल ही में उच्च न्यायालय (High Court) का बड़ा फैसला आया। जयपुर बेंच ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया, लेकिन इस फैसले के लिखित आदेश ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। दरअसल, 202 पेज के आदेश में अदालत ने कई बार “बिश्नोई गैंग” शब्द का प्रयोग किया, जिस पर अब बिश्नोई समाज ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
फैसले में 12 बार लिखा गया “बिश्नोई गैंग”
अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई महासभा (Akhil Bhartiya Jeev Raksha Bishnoi Mahasabha) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवराज बिश्नोई ने बताया कि हाईकोर्ट के इस फैसले में लगभग 12 बार “बिश्नोई गैंग” शब्द का प्रयोग किया गया है। उनका कहना है कि यह शब्द पूरे बिश्नोई समाज की छवि धूमिल करता है और इससे लाखों लोगों की धार्मिक और सामाजिक भावनाएँ आहत हुई हैं।
शिवराज बिश्नोई ने साफ कहा कि समाज न्यायालय के आदेश का सम्मान करता है और भर्ती परीक्षा रद्द करने पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन, फैसले में प्रयुक्त शब्द “बिश्नोई गैंग” अत्यंत आपत्तिजनक है, क्योंकि बिश्नोई संप्रदाय हमेशा से पर्यावरण संरक्षण, जीव रक्षा और अहिंसा के लिए जाना जाता है।
समाज ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा
महासभा ने इस मुद्दे पर गंभीर आपत्ति जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। पत्र में आग्रह किया गया है कि फैसले में जहां-जहां “बिश्नोई गैंग” लिखा गया है, उसे हटाकर अन्य शब्दों का इस्तेमाल किया जाए। महासभा का तर्क है कि किसी अपराधी गुट को पहचान देने के लिए संप्रदाय विशेष का नाम जोड़ना अनुचित है, क्योंकि इससे पूरा समाज बदनाम होता है।
शांतिप्रिय और जीव रक्षक समाज
बिश्नोई संप्रदाय की पहचान एक जीव रक्षक और पर्यावरण संरक्षण करने वाले समाज के रूप में है। यह संप्रदाय पशु-पक्षियों और प्रकृति की रक्षा के लिए हमेशा अग्रणी रहा है। राजस्थान, हरियाणा और देश के कई हिस्सों में बिश्नोई समाज ने हिरण और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अनेक आंदोलनों और बलिदानों का इतिहास रचा है। ऐसे में न्यायालय के आदेश में “गैंग” शब्द जुड़ना समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक माना जा रहा है।
विवाद की जड़: SI भर्ती परीक्षा
गौरतलब है कि 2021 में आयोजित सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा (SI Bharti Exam 2021) में पेपर लीक का मामला सामने आया था। इसमें कई ट्रेनी सब इंस्पेक्टरों की संलिप्तता भी उजागर हुई थी। इस मामले में 25 याचिकाकर्ताओं ने अदालत में वाद दायर किया था, जिसमें 177 लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए। साथ ही एक अन्य वाद भी इसी मामले से जोड़कर सुनवाई की गई थी।
गुरुवार को जयपुर बेंच ने परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया। लेकिन फैसले की कॉपी में कई बार “बिश्नोई गैंग” शब्द लिखा गया। यही अब विवाद का कारण बन गया है।
समाज की मांग
जीव रक्षा बिश्नोई महासभा ने न्यायालय से अपील की है कि पूरे समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए फैसले से “बिश्नोई गैंग” शब्द को हटाया जाए। उनका कहना है कि किसी भी अपराधी गुट को चिन्हित करने के लिए संप्रदाय का नाम जोड़ना न्यायोचित नहीं है।
शिवराज बिश्नोई ने कहा कि अदालत से यह अपेक्षा है कि वह समाज की भावनाओं को समझते हुए इस शब्द को आदेश से हटाएगी। इससे न केवल बिश्नोई समाज की छवि की रक्षा होगी, बल्कि भविष्य में किसी भी समुदाय के नाम को अपराधियों से जोड़ने की परंपरा भी रुकेगी।