शोभना शर्मा। बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र में किसानों द्वारा चलाया गया आंदोलन आखिरकार बड़ी सफलता के साथ समाप्त हुआ। सोमवार सुबह से शुरू हुई किसानों की ट्रैक्टर रैली ने देर रात प्रशासन को मजबूर कर दिया कि वह किसानों की सभी 11 सूत्री मांगों को सात दिनों के भीतर पूरा करने का ठोस आश्वासन दे। करीब दो सौ से अधिक ट्रैक्टरों का यह विशाल काफिला जब कलेक्ट्रेट घेराव की ओर बढ़ा, तब पूरे जिले में माहौल तनावपूर्ण हो गया था। लेकिन किसानों की एकजुटता और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की रणनीति ने आखिरकार प्रशासन को वार्ता की मेज पर ला दिया।
धोरीमना उपखंड कार्यालय में बनी सहमति
दिनभर चली खींचतान और कई प्रयासों के बाद निर्णायक वार्ता धोरीमना उपखंड कार्यालय में हुई। इस वार्ता में अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश आर्य और गुड़ामालानी एसडीएम महत्वपूर्ण भूमिका में मौजूद थे। किसान नेताओं और अधिकारियों के बीच हुई लंबी बातचीत में आखिरकार सहमति बनी और प्रशासन ने किसानों की सभी मुख्य मांगों पर सात दिनों में कार्रवाई का वादा किया।
किसानों का सबसे बड़ा मुद्दा 2022-23 के बकाया फसल बीमा क्लेम का था, जिसके लिए उन्होंने बार-बार बीमा कंपनियों और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया था। वार्ता के बाद प्रशासन ने साफ कहा कि बीमा कंपनी को कड़े निर्देश दिए जाएंगे और सात दिन के भीतर किसानों के खातों में क्लेम राशि डाल दी जाएगी।
बिजली समस्या और जंगली जानवरों से राहत पर भी निर्णायक सहमति
गुड़ामालानी और आसपास के क्षेत्रों में रबी फसल सीजन में सिंगल फेज बिजली की समस्या हमेशा बनी रहती है। किसानों ने इसे अपनी मुख्य मांगों में शामिल किया था। वार्ता में प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि आवश्यक स्थानों पर सिंगल फेज बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी और चल रही तकनीकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
जंगली सूअर और नीलगाय से फसलों को हो रहे भारी नुकसान को लेकर भी किसान लंबे समय से परेशान थे। इस पर प्रशासन ने ग्राम पंचायत स्तर पर प्रस्ताव लेकर विशेष कमेटी गठित करने और समस्या के तत्काल निस्तारण का भरोसा दिया।
कृषि अनुदान राशि और अन्य कृषि-संबंधी सुविधाओं से जुड़ी सभी शेष मांगों पर भी सात दिनों में कार्रवाई का वादा किया गया, जिससे किसान संतुष्ट नजर आए।
किसानों ने जताई सावधानी, सात दिन बाद बड़ा आंदोलन
वार्ता सफल रहने के बाद किसान देर रात अपने-अपने ट्रैक्टरों के साथ गांवों को लौट गए। हालांकि किसान नेताओं ने साफ कर दिया कि यह संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सात दिन में प्रशासन वादे के अनुसार कार्रवाई नहीं करता, तो इससे भी बड़ा और व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
दूसरी ओर प्रशासन ने राहत की सांस ली कि ट्रैक्टर रैली कलेक्ट्रेट तक नहीं पहुंची और वार्ता से ही समाधान निकल आया। यह आंदोलन बाड़मेर के किसान संगठनों की एकजुटता और दबाव की ताकत का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।


