शोभना शर्मा। डीग जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन एंटीवायरस के तहत कैथवाड़ा पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश मीणा के निर्देशन में की गई कार्रवाई में पुलिस टीम ने पांच शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन, फर्जी सिम कार्ड और एक बाइक बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को ठगी का शिकार बनाता था और सोशल मीडिया के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से संपर्क करता था।
सोशल मीडिया पर पहचान छिपाकर करते थे ठगी
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी नाम और प्रोफाइल के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। ये खुद को पीड़ित का पुराना परिचित, दोस्त या जानकार बताकर बातचीत शुरू करते थे। विश्वास जीतने के बाद ये पुराने पैसे लौटाने या किसी आपात स्थिति का बहाना बनाकर ऑनलाइन पैसे मंगवाते थे। आरोपियों ने कई लोगों को यह कहकर ठगा कि वे पहले लिए गए पैसे लौटा रहे हैं, लेकिन इसके लिए पहले कुछ रकम ट्रांसफर करनी होगी। जैसे ही पीड़ित पैसे भेजता, आरोपी संपर्क तोड़ देते थे।
ड्रीम 11 के नाम पर युवाओं को बनाया निशाना
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी युवाओं के बीच लोकप्रिय ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म ड्रीम 11 के नाम पर भी ठगी करते थे। ये खुद को एक्सपर्ट बताते हुए विनिंग टीम दिलाने का झांसा देते थे। इसके बदले में वे पहले रजिस्ट्रेशन फीस या प्रीमियम चार्ज के नाम पर मोटी रकम वसूल लेते थे। पैसे मिलने के बाद न तो कोई टीम दी जाती थी और न ही कॉल या मैसेज का जवाब दिया जाता था। इस तरीके से आरोपी कई युवाओं से हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की ठगी कर चुके थे।
छापेमारी में बरामद हुआ सामान
कैथवाड़ा पुलिस ने दबिश के दौरान आरोपियों के पास से पांच स्मार्टफोन, सात फर्जी सिम कार्ड और एक बाइक बरामद की है। पुलिस का मानना है कि ये सभी उपकरण ठगी की वारदातों में इस्तेमाल किए जा रहे थे। पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश मीणा ने बताया कि आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन और सिम कार्ड की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया है और कितनी रकम की धोखाधड़ी हुई है।
ठगी के पैसों से बनी संपत्ति होगी कुर्क
एसपी ओमप्रकाश मीणा ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में यह साबित होता है कि आरोपियों ने ठगी से अर्जित पैसों से संपत्ति बनाई है, तो नए कानून के तहत उस संपत्ति को जब्त या कुर्क किया जाएगा। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अब केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उनकी अवैध कमाई पर भी सीधा प्रहार किया जाएगा, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
हॉट-स्पॉट गांवों पर पुलिस की पैनी नजर
डीग जिले में साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए पुलिस ने कुछ गांवों को साइबर अपराध के हॉट-स्पॉट के रूप में चिन्हित किया है। इन इलाकों में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है और लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों को फर्जी सिम कार्ड कहां से और किस माध्यम से उपलब्ध कराए जाते थे। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किन बैंक खातों में जाती थी और वहां से कैसे निकाली जाती थी।
अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत
पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के तार केवल डीग जिले तक सीमित नहीं हैं। प्रारंभिक जांच में अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क के संकेत मिले हैं। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से गहन पूछताछ के दौरान कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं और अन्य साइबर ठगों तक भी पहुंचा जा सकेगा।
साइबर अपराधियों पर लगातार सख्ती
ऑपरेशन एंटीवायरस के तहत डीग पुलिस लगातार साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। पुलिस अधीक्षक ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किसी भी अनजान व्यक्ति के झांसे में न आएं और संदिग्ध लेन-देन की तुरंत सूचना पुलिस को दें।


