जयपुर में आयोजित केंद्रीय बजट पर प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री CR पाटिल ने सिंधु जल संधि को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अब सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को पानी नहीं देगा। पाटिल के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2025 में इस संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था और अब इस दिशा में आगे की कार्रवाई पूरी गंभीरता से शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पाकिस्तान को एक बूंद पानी भी नहीं दिया जाएगा, क्योंकि भारत अपनी जल आवश्यकताओं को प्राथमिकता देगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में विभिन्न राज्यों के बीच जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और वितरण को लेकर योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। पाटिल ने इस मुद्दे पर मीडिया के सवालों के जवाब देते हुए कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
DPR तैयार, जल प्रबंधन को नई दिशा मिलने की उम्मीद- CR पाटिल
एक प्रश्न के जवाब में CR पाटिल ने बताया कि केंद्र सरकार जल प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करा रही है। उन्होंने कहा कि यह डीपीआर उन सभी राज्यों के लिए लाभकारी होगी जिन्हें लंबे समय से जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान को भविष्य में एक बूंद पानी भी नहीं मिलने वाला है। हालांकि उनसे वर्तमान में छोड़े जा रहे पानी को लेकर सवाल पूछा गया, लेकिन उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से परहेज किया। पाटिल का कहना था कि इस संबंध में उचित समय आने पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उनके अनुसार, तैयार की जा रही डीपीआर से हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। ये राज्य कई वर्षों से जल प्रबंधन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में नई योजनाएं उनके लिए स्थायी समाधान प्रदान कर सकती हैं।
भारत की आर्थिक स्थिति पर पाटिल का दृष्टिकोण
प्रेस वार्ता के दौरान सीआर पाटिल ने देश की आर्थिक स्थिति पर भी अपनी बात रखी। उनके अनुसार, बीते बारह वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हुई है और महंगाई को नियंत्रित रखने में भी सरकार ने सफल प्रयास किए हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री जरूर थे, लेकिन उनके शासनकाल में भारत वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में 10वें या 11वें स्थान से आगे नहीं बढ़ पाया। पाटिल के अनुसार, आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और इसका श्रेय निरंतर विकसित होते आर्थिक ढांचे, निवेश वृद्धि और सुधारात्मक नीतियों को जाता है।
यमुना जल परियोजना: राजस्थान को मिलेगा बड़ा लाभ
राजस्थान लंबे समय से जल संकट से जूझ रहा है, खासकर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी जिलों में जल उपलब्धता बेहद कम होती है। सीआर पाटिल ने कहा कि यमुना जल परियोजना इस स्थिति में बड़ा परिवर्तन ला सकती है।
उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इस दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं किए, जबकि राजस्थान का इस पानी पर स्पष्ट अधिकार है। अब वर्तमान सरकार ने इस विषय पर सक्रियता दिखाते हुए हरियाणा और राजस्थान के बीच डीपीआर तैयार करने पर सहमति बना ली है। यह परियोजना पाइपलाइन के माध्यम से पानी लाने पर आधारित होगी, जिसके निर्माण में 77 हजार करोड़ रुपये से लेकर 1 लाख करोड़ रुपये तक का खर्च होने का अनुमान है।
पाटिल के अनुसार, यह एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है और इसके पूरा होने पर राजस्थान को स्थायी जल समाधान मिल सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजस्थान के पास सबसे कम पानी उपलब्ध है, लेकिन भविष्य में यही राज्य सबसे अधिक जल समृद्ध राज्यों में शामिल होगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री लगातार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के संपर्क में हैं और जल्द ही इस परियोजना से संबंधित सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
जल संसाधनों पर नई रणनीति की तैयारी
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, वर्तमान सरकार जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय संधियों की पुनर्समीक्षा पर ध्यान दे रही है। सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत देश की जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में जल वितरण, नदी जोड़ने की परियोजनाओं और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर तेजी से काम होगा। इससे न केवल कृषि क्षेत्र को फायदा होगा, बल्कि राज्यों की पेयजल समस्याओं में भी सुधार आएगा।


