मनीषा शर्मा। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित सेकंड ग्रेड PTI परीक्षा-2022 में हुए फर्जीवाड़े का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। आयोग की सतर्कता और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया के दौरान सामने आए इस घोटाले में अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हाल ही में पुलिस ने इस प्रकरण के 5000 रुपये के इनामी आरोपी हुकमाराम को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे पूरे मामले की परतें और खुलने लगी हैं।
दस्तावेज सत्यापन में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
RPSC ने 5 अप्रैल 2024 को अजमेर के सिविल लाइन थाना में इस मामले को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई थी। आयोग ने शिकायत में बताया कि सेकंड ग्रेड पीटीआई परीक्षा-2022 में चार अभ्यर्थियों ने स्वयं परीक्षा में शामिल होने के बजाय अपनी जगह डमी कैंडिडेट बैठाए। डमी कैंडिडेट्स के माध्यम से परीक्षा दिलवाई गई, परिणाम पास करवाया गया और बाद में चयन भी हासिल कर लिया गया।
जब आयोग ने चयनित अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन शुरू किया, तब उपस्थिति पत्रक, फोटो मिलान, हस्ताक्षर और अन्य रिकॉर्ड की गहन जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई मामलों में परीक्षा केंद्र पर मौजूद अभ्यर्थी और चयनित अभ्यर्थी के बीच स्पष्ट अंतर पाया गया। इसके बाद सिविल लाइन थाना अजमेर में मामला दर्ज कर पुलिस जांच शुरू की गई।
अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार
पुलिस जांच के दौरान इस संगठित फर्जीवाड़े में शामिल आरोपियों की पहचान की गई और एक-एक कर गिरफ्तारी की गई। अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से आर्थिक लेन-देन के आधार पर किया गया था, जिसमें लाखों रुपये का सौदा तय हुआ था।
5000 के इनामी आरोपी हुकमाराम की गिरफ्तारी
इस प्रकरण में पुलिस ने 5000 रुपये के इनामी आरोपी हुकमाराम को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी हुकमाराम ने बाड़मेर निवासी जेनाराम जाट की जगह अजमेर स्थित श्रमजीवी कॉलेज के परीक्षा केंद्र पर सेकंड ग्रेड पीटीआई परीक्षा दी थी।
हुकमाराम पेशे से भूगोल विषय का व्याख्याता है और वर्ष 2021 में आरपीएससी के माध्यम से लेक्चरर (भूगोल) के पद पर चयनित होकर जालोर जिले के डूंगरी स्कूल में पदस्थापित था। एक सरकारी पद पर रहते हुए भी उसने परीक्षा माफिया का हिस्सा बनकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
10 लाख रुपये में हुआ था सौदा
जांच में यह भी सामने आया है कि असल अभ्यर्थी जेनाराम जाट और डमी कैंडिडेट हुकमाराम एक ही गांव के निवासी हैं और आपसी परिचय के चलते यह सौदा तय हुआ। दोनों के बीच करीब 10 लाख रुपये में परीक्षा देने और चयन दिलाने की डील हुई थी। राशि का भुगतान परीक्षा से पहले और परिणाम आने के बाद किस्तों में किया जाना तय हुआ था।
हालांकि, आरोपी द्वारा अब तक कितनी राशि ली गई, इसकी जांच अभी जारी है। पुलिस को शक है कि इस सौदे में बिचौलियों की भूमिका भी हो सकती है।
पदस्थापन से लगातार गैरहाजिर रहा आरोपी
जांच अधिकारी गणेशाराम ने बताया कि मुख्य आरोपी जेनाराम की गिरफ्तारी के बाद से ही हुकमाराम अपने पदस्थापन स्थल से लगातार गैरहाजिर चल रहा था। बिना किसी सूचना के विद्यालय से अनुपस्थित रहना और अचानक गायब हो जाना, उसके फरार होने की पुष्टि करता है।
पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। इसी दौरान पुलिस ने उसके खिलाफ 5000 रुपये का इनाम घोषित किया और जिला स्पेशल टीम का गठन कर उसकी तलाश तेज कर दी।
नशे की लत और फरारी की कहानी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि फरारी के दौरान आरोपी हुकमाराम डोडा पोस्त जैसे मादक पदार्थों का आदी हो गया था। नशे की लत और लगातार स्थान बदलने की वजह से उसकी गिरफ्तारी में समय लगा। तकनीकी सर्विलांस और सूचना तंत्र के आधार पर पुलिस ने उसे डिटेन कर आखिरकार गिरफ्तार कर लिया।
शिक्षा और भर्ती प्रणाली पर गंभीर सवाल
सेकंड ग्रेड पीटीआई परीक्षा में हुआ यह फर्जीवाड़ा न केवल आरपीएससी की परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह योग्य उम्मीदवारों का हक छीनकर पैसे के दम पर सरकारी नौकरी हासिल की जा रही है। आयोग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से इस रैकेट का खुलासा हुआ है, लेकिन यह मामला पूरे भर्ती सिस्टम में सख्ती और पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।


