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भजनलाल सरकार का बड़ा सुधार: राजस्थान रोडवेज का घाटा 1000 करोड़ से घटकर 300 करोड़ पर आया

भजनलाल सरकार का बड़ा सुधार: राजस्थान रोडवेज का घाटा 1000 करोड़ से घटकर 300 करोड़ पर आया

शोभना शर्मा।  राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने एक और बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि हासिल की है। वर्षों से घाटे में चल रहे राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) की स्थिति में अब अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। नए प्रबंधन ढांचे, सख्त वित्तीय अनुशासन और आधुनिक तकनीकी मॉनिटरिंग सिस्टम ने निगम को घाटे की दलदल से बाहर निकालना शुरू कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जहां पिछली सरकार के कार्यकाल में निगम का वार्षिक परिचालन घाटा लगभग ₹1000 करोड़ तक पहुंच गया था, वहीं अब यह घटकर ₹300 करोड़ पर आ गया है। इस सुधार को राज्य सरकार की सुशासन नीति और जवाबदेह प्रबंधन का नतीजा माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर सुरक्षित और समयबद्ध सेवाओं पर फोकस

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही सार्वजनिक परिवहन को राज्य की प्राथमिक आवश्यकताओं में शामिल किया है। उन्होंने रोडवेज प्रशासन को निर्देश दिया था कि यात्रियों को सुरक्षित, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण परिवहन सेवाएं प्रदान की जाएं। निगम ने मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए यात्रियों की जरूरतों के अनुसार रूट नेटवर्क का पुनर्गठन किया है। अब प्रमुख शहरों से ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों तक सीधी बस सेवाएं चलाई जा रही हैं, जिससे यात्रा अधिक सहज और भरोसेमंद बनी है। रोडवेज प्रशासन ने “समय पर बस – सुरक्षित यात्रा” नीति को सख्ती से लागू किया है। इसके तहत हर बस के लिए GPS-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है।

ईंधन बचत और प्रबंधन सुधार से परिचालन खर्च में कमी

राजस्थान रोडवेज के सुधार की एक बड़ी वजह बेहतर ईंधन प्रबंधन नीति भी रही है। निगम ने पिछले एक वर्ष में डीज़ल की खपत पर सख्त निगरानी रखी है। मॉनिटरिंग सिस्टम और मेंटेनेंस प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाकर ईंधन की बर्बादी में उल्लेखनीय कमी की गई है। इससे निगम के परिचालन खर्च में करोड़ों रुपये की बचत हुई है। साथ ही, रूट ऑप्टिमाइजेशन और वाहन प्रदर्शन की समीक्षा के लिए हर डिपो में डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किए गए हैं। इनसे यह पता लगाया जा रहा है कि कौन सी बसें अधिक लाभदायक हैं और किन रूटों पर घाटा हो रहा है।

810 नई बसें खरीदीं, 352 अनुबंधित बसें शामिल

राज्य सरकार ने यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रोडवेज के बेड़े का बड़ा विस्तार किया है। पिछले एक वर्ष में निगम ने 810 नई बसें खरीदी हैं, जो लंबी दूरी और हाइवे सेवाओं के लिए तैयार की गई हैं। इसके अलावा, 352 अनुबंधित बसें भी नेटवर्क में जोड़ी गई हैं, जिससे राज्य के अंदर और बाहरी रूटों पर सेवा क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। इन नई बसों में यात्रियों की सुविधा के लिए एयर सस्पेंशन, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, CCTV कैमरे, और पैनिक बटन जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इससे यात्रा न केवल अधिक आरामदायक हुई है, बल्कि सुरक्षा और विश्वसनीयता में भी वृद्धि हुई है।

राज्य सरकार का लक्ष्य — घाटा समाप्त कर निगम को लाभ में लाना

राज्य सरकार ने अब रोडवेज के पुनर्गठन की दिशा में और बड़े कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में परिचालन घाटा पूरी तरह समाप्त कर निगम को लाभ की स्थिति में लाया जाए। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि, “राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता को सस्ती, सुरक्षित और समय पर परिवहन सुविधा देना है। निगम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाकर उसे आत्मनिर्भर बनाना हमारी नीति का हिस्सा है।” इसी नीति के तहत सरकार 800 नई बसें और शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। इससे रोडवेज के बेड़े की क्षमता में बड़ा सुधार आएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेज और सुरक्षित परिवहन की सुविधा बढ़ेगी।

यात्रियों को मिलेगी अधिक सुविधा

राज्य सरकार के इस सुधार अभियान का सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को हो रहा है। नई बसों और रूट विस्तार से यात्रा अधिक सुगम हो गई है। अब जयपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर, और अलवर जैसे प्रमुख शहरों से छोटे कस्बों और सीमावर्ती इलाकों तक सीधे रूट उपलब्ध हैं। इसके अलावा, यात्रियों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग, डिजिटल पेमेंट और मोबाइल एप के जरिए बस ट्रैकिंग की सुविधा भी शुरू की गई है। इससे यात्रियों को बस की वास्तविक स्थिति, देरी या रूट परिवर्तन की जानकारी समय रहते मिल जाती है।

रोडवेज कर्मचारियों के लिए भी सुधार

राज्य सरकार ने केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के लिए भी कई प्रबंधन सुधार किए हैं। कर्मचारियों के लिए कार्यदिवस निर्धारण, ओवरटाइम भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था, और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन नीति लागू की गई है। इससे कर्मचारी मनोबल में वृद्धि हुई है और सेवा की गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया है।

राज्य के परिवहन क्षेत्र के लिए नई दिशा

राजस्थान रोडवेज की वित्तीय स्थिति में आया सुधार केवल निगम की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार के सुशासन, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शी कार्यप्रणाली का परिणाम है। भविष्य में सरकार रोडवेज के आधुनिकीकरण के तहत इलेक्ट्रिक बसें और सीएनजी आधारित वाहनों को शामिल करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रफ्तार जारी रही, तो आने वाले वर्षों में राजस्थान रोडवेज एक लाभकारी सार्वजनिक परिवहन संस्था बन सकती है।

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