महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में हाल ही में किए गए बदलावों को लेकर कांग्रेस ने बड़े आंदोलन की तैयारी कर ली है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों से ग्रामीण मजदूरों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं और रोजगार की गारंटी पर सीधा असर पड़ रहा है। इसी के विरोध में कांग्रेस 11 जनवरी से 15 फरवरी तक राज्यव्यापी आंदोलन चलाएगी।
आंदोलन की रणनीति के तहत कांग्रेस ने चरणबद्ध कार्यक्रम तय किया है। इसकी शुरुआत 8 जनवरी से होगी, जब प्रदेशभर में बैठकों का दौर चलेगा। इन बैठकों में राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता, संगठन प्रभारी और जिला स्तर के पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठकों में आंदोलन की रूपरेखा, जिम्मेदारियां और जिलेवार कार्यक्रम तय किए जाएंगे।
इसके बाद 10 जनवरी को सभी जिलों में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें मनरेगा कानून में किए गए बदलावों को विस्तार से जनता के सामने रखा जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि इन संशोधनों से मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी, काम के दिन और भुगतान प्रक्रिया पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
11 जनवरी को कांग्रेस कार्यकर्ता हर जिले में अंबेडकर या महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने उपवास रखकर विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद 12 जनवरी से 29 जनवरी तक हर पंचायत स्तर पर चौपालों का आयोजन किया जाएगा। इन चौपालों के माध्यम से ग्रामीण मजदूरों, किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों से संवाद कर सरकार की नीतियों के खिलाफ माहौल बनाया जाएगा।
30 जनवरी को वार्ड और ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की ओर से सभी ग्राम प्रधानों को पत्र लिखकर इस आंदोलन में भागीदारी की अपील की जाएगी।
31 जनवरी से 6 फरवरी के बीच जिला कलेक्टर कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद 7 फरवरी से 15 फरवरी के बीच विधानसभा और लोकभवन के घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसे आंदोलन का सबसे बड़ा चरण माना जा रहा है।
कांग्रेस का आरोप है कि मनरेगा कानून में बदलाव कर मजदूरों का हक छीना जा रहा है। इससे पहले भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोल चुके हैं।


