राजस्थान की राजधानी जयपुर ने शुक्रवार को एक ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन की मेजबानी की, जिसे राज्य के ग्रामीण भविष्य के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था विद्यसी एजुकेशन ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम और नेशनल एंट्रेप्रेन्योर्स एम्पावरमेंट ड्राइव के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य राजस्थान के ग्रामीण युवाओं को करियर मार्गदर्शन, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसरों से सीधे जोड़ना है।
इस कार्यक्रम में राज्य और केंद्र सरकार के कई शीर्ष नेता मौजूद रहे, जिनमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी और उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा शामिल रहे। इन सभी नेताओं ने इस पहल को ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम बताया और इसके व्यापक प्रभावों पर जोर दिया।
यह एमओयू केवल एक औपचारिक समझौता नहीं है, बल्कि इसे ‘मिशन राजस्थान’ के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य गांव-गांव तक अवसरों की पहुंच सुनिश्चित करना है। लंबे समय से यह देखा जाता रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली युवा होते हुए भी सही मार्गदर्शन और जानकारी के अभाव में वे अपनी क्षमता के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पाते। इस समस्या के समाधान के लिए ‘करियर ग्रोथ ऑफिसर’ का नया कॉन्सेप्ट पेश किया गया है, जो इस पूरी पहल का केंद्र बिंदु है।
विद्यसी एजुकेशन के संस्थापक और सीईओ करुण कंदोई के अनुसार, यह पहल किसी तकनीकी ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मानव-केंद्रित नेटवर्क तैयार करने का प्रयास है। करियर ग्रोथ ऑफिसर गांव के युवाओं और शहरों में उपलब्ध अवसरों के बीच एक सेतु का काम करेगा। वह युवाओं को यह समझाने में मदद करेगा कि उन्हें किस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए, कौन से शैक्षणिक विकल्प उनके लिए उपयुक्त हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे लिया जा सकता है। इस मॉडल के जरिए “एक पंचायत, एक कदम” की सोच को साकार करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में सवा लाख से अधिक पदों पर नियुक्तियां दी जा चुकी हैं और 1 लाख 33 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा सवा लाख पदों के लिए भर्ती कैलेंडर भी जारी किया गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि निजी क्षेत्र में भी लाखों युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जो राज्य की आर्थिक प्रगति का संकेत है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राजस्थान के युवाओं की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि यहां के युवाओं में मेहनत, नवाचार और उद्यमिता की प्राकृतिक प्रतिभा है। उन्होंने कहा कि देश का युवा अब केवल डिग्री और प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वह अपने कौशल और क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस तरह की पहलें युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने इस समझौते को युवाओं के लिए अवसरों का एक नया द्वार बताया। उनका कहना था कि यह पहल केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे जमीन पर उतारकर युवाओं को वास्तविक लाभ पहुंचाया जाएगा। इसी क्रम में कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता से जुड़े विभागों के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल को राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इस परियोजना का एक बड़ा उद्देश्य यह भी है कि ग्रामीण युवाओं को करियर संबंधी सलाह और संसाधनों के लिए शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। अब उन्हें अपने ही गांव में रहकर संस्थागत समर्थन और मार्गदर्शन मिल सकेगा। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रगति होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। जब युवा अपने गांव में रहकर ही रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जुड़ेंगे, तो इससे पलायन में कमी आएगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और समग्र विकास को गति मिलेगी।


