मनीषा शर्मा। विधानसभा सत्र से ठीक पहले रविवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस बैठक में धर्मांतरण प्रतिषेध विधेयक 2025, पीएम सूर्य घर योजना के तहत 150 यूनिट मुफ्त बिजली, 3540 असिस्टेंट प्रोफेसर संविदा भर्ती, सीवरेज नीति 2016 में संशोधन और कर्मचारी चयन बोर्ड के सेवा नियमों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन फैसलों का सीधा असर प्रदेश की आम जनता, शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे पर पड़ेगा।
धर्मांतरण विधेयक: उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान
राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक में इस बार कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। संशोधित ड्राफ्ट के अनुसार जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान होगा। कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि अवैध धर्मांतरण में शामिल किसी संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा और उस संस्था को दी जाने वाली सरकारी ग्रांट बंद कर दी जाएगी। इसके साथ ही जहां अवैध धर्मांतरण हुआ है, उस संपत्ति की जांच कर उसे जब्त या गिराने तक की कार्रवाई संभव होगी। इस कानून में सबूत का भार उस व्यक्ति पर होगा, जिस पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप होगा। सबसे अहम बात यह है कि घर वापसी को धर्म परिवर्तन की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है। यानी यदि कोई व्यक्ति अपने मूल पैतृक धर्म में लौटता है तो उसे धर्म परिवर्तन नहीं माना जाएगा। यह प्रावधान राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है।
फ्री बिजली योजना: 150 यूनिट मुफ्त उपभोग
कैबिनेट ने पीएम सूर्य घर योजना को राजस्थान में लागू करने की मंजूरी दी है। इसके तहत प्रदेश के 1 करोड़ 4 लाख उपभोक्ताओं को प्रति माह 150 यूनिट बिजली मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी। पहले यह सीमा 100 यूनिट थी, जिसे बढ़ाकर 150 यूनिट कर दिया गया है। सरकार इस योजना को सौर ऊर्जा से जोड़कर लागू करेगी। करीब 11 लाख उपभोक्ताओं के घरों पर 1.1 किलोवाट क्षमता के मुफ्त सोलर पैनल लगाए जाएंगे। जिन उपभोक्ताओं के पास छत उपलब्ध नहीं है, उनके लिए डिस्कॉम सामुदायिक सोलर प्लांट स्थापित करेंगे और वर्चुअल नेट मीटरिंग के जरिए उन्हें बिजली उपलब्ध कराएंगे।
27 लाख परिवारों को बड़ा फायदा
ऊर्जा मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि जिन परिवारों की मासिक खपत 150 यूनिट से अधिक है, उन्हें भी फायदा मिलेगा। ऐसे परिवारों की छतों पर भी 1.1 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इसमें केंद्र सरकार से 33,000 रुपये और राज्य सरकार से 17,000 रुपये की सहायता मिलेगी। इस प्रकार कुल 50,000 रुपये की लागत वाले पैनल पूरी तरह मुफ्त होंगे। इससे 27 लाख परिवारों को सीधा फायदा होगा और लगभग 3,000 मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता का सृजन होगा। इससे न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी बल्कि राज्य की बिजली व्यवस्था पर भी सकारात्मक असर होगा।
उच्च शिक्षा को मजबूती: 3540 असिस्टेंट प्रोफेसर संविदा भर्ती
प्रदेश के 374 कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सरकार ने 3540 शैक्षणिक पदों और 1184 गैर-शैक्षणिक पदों पर संविदा भर्ती का फैसला किया है। उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि फिलहाल इन कॉलेजों में 10,594 पद स्वीकृत हैं, लेकिन लगभग सभी खाली पड़े हैं। इन रिक्तियों को भरने के लिए 3,540 शैक्षणिक पदों पर योग्य उम्मीदवारों की भर्ती की जाएगी। इसके लिए नेट, स्लेट, सेट या पीएचडी योग्यता को आधार बनाया जाएगा। संविदा पर भर्ती होने वाले कार्मिकों का सेवाकाल पांच वर्ष का होगा। इस कदम से कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था में सुधार होगा और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
सीवरेज और अपशिष्ट जल नीति 2016 में संशोधन
राज्य में प्रदूषित जल और उससे होने वाले पर्यावरणीय खतरे को देखते हुए कैबिनेट ने सीवरेज एवं अपशिष्ट जल नीति 2016 में संशोधन को मंजूरी दी है। नई नीति के तहत सभी नगरीय निकायों में आधुनिक सीवरेज सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। संशोधित नीति में हैम मॉडल अपनाया जाएगा। इसमें परियोजना लागत का 40% हिस्सा कार्य पूर्ण होने पर और शेष 60% राशि संचालन और संधारण अवधि में समान किस्तों में निजी साझेदार को दी जाएगी। इस व्यवस्था से सीवेज शोधन के बाद प्राप्त जल, खाद और गैस का पुनः उपयोग किया जा सकेगा। यह कदम स्वच्छ भारत मिशन की अवधारणा के अनुरूप है और राज्य में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देगा।
कर्मचारी चयन बोर्ड के सेवा नियमों को मंजूरी
कैबिनेट ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) के लिए लंबे समय से लंबित सेवा नियमों को भी मंजूरी दे दी है। इसके तहत दो नए नियम बनाए जाएंगे –
राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड (गजेटेड स्टाफ) सर्विस रूल्स, 2025
राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड (मिनिस्टीरियल एंड सबऑर्डिनेट सर्विसेज) रूल्स, 2025
साथ ही राजस्थान सबऑर्डिनेट एंड मिनिस्टीरियल सर्विसेज (कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट) रूल्स, 2022 में संशोधन किया जाएगा। इन नियमों से बोर्ड में नियमित कर्मचारियों की भर्ती का मार्ग प्रशस्त होगा और कामकाज अधिक पारदर्शी और प्रभावी ढंग से हो सकेगा। इसके अलावा सरकारी कार्मिकों के लिए प्रमोशन के अवसर भी बढ़ेंगे।