देशभर में पिछले कई दिनों से LPG गैस की कमी को लेकर सामने आ रही समस्याओं के बीच केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत अब औद्योगिक उपयोग के लिए एलपीजी गैस की आपूर्ति को सीमित किया जाएगा, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर पर्याप्त गैस उपलब्ध कराई जा सके। इस संबंध में Ministry of Petroleum and Natural Gas ने सभी राज्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिनका उद्देश्य गैस वितरण प्रणाली को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाना है।
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में एलपीजी की आपूर्ति बाधित होने के कारण आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। घरेलू उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा था, वहीं कई जगहों पर लंबी प्रतीक्षा सूची भी देखने को मिल रही थी। ऐसे में सरकार ने प्राथमिकता तय करते हुए औद्योगिक खपत पर आंशिक नियंत्रण लगाने का रास्ता चुना है, ताकि घरेलू जरूरतों को पहले पूरा किया जा सके।
जारी निर्देशों के अनुसार, अब नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अन्य आवश्यक क्षेत्रों के लिए आरक्षित किया जाएगा, जबकि औद्योगिक उपयोगकर्ताओं के लिए गैस की आपूर्ति को सीमित कर दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जिन उद्योगों में एलपीजी का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, उन्हें अब अपनी खपत को निर्धारित सीमा के भीतर रखना होगा। यह कदम गैस की उपलब्धता को संतुलित करने और वितरण में पारदर्शिता लाने की दिशा में उठाया गया है।
सरकार ने इस नीति के साथ-साथ वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है। इसके तहत उन राज्यों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा, जो पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG के उपयोग को बढ़ावा देंगे। ऐसे राज्यों को एलपीजी के आवंटन में अतिरिक्त 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उद्योग धीरे-धीरे एलपीजी पर अपनी निर्भरता कम करें और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की ओर बढ़ें।
औद्योगिक क्षेत्रों पर इस फैसले का सीधा असर देखने को मिलेगा। फार्मा, प्रोसेसिंग फूड, स्टील, ग्लास, सिरेमिक, पैकेजिंग और केमिकल जैसे सेक्टर्स, जो बड़े पैमाने पर एलपीजी का उपयोग करते हैं, अब मार्च 2026 से पहले के अपने उपभोग स्तर के केवल 70 प्रतिशत तक ही गैस प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा, प्रति दिन 0.2 मीट्रिक टन की सीमा तय की गई है, जिससे इन उद्योगों के लिए उपलब्ध कुल गैस की मात्रा और भी सीमित हो जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन उद्योगों को अधिक चुनौती का सामना करना पड़ेगा, जो पूरी तरह से एलपीजी पर निर्भर हैं और जिनके पास वैकल्पिक ईंधन का विकल्प नहीं है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्राथमिकता उन उद्योगों को दी जाएगी, जहां प्राकृतिक गैस का उपयोग संभव नहीं है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आवश्यक उत्पादन गतिविधियां प्रभावित न हों और औद्योगिक संतुलन बना रहे।
इसके साथ ही, सरकार ने कंपनियों के लिए कुछ अनिवार्य प्रक्रियाएं भी तय की हैं। अब औद्योगिक इकाइयों को तेल विपणन कंपनियों के साथ पंजीकरण कराना होगा और उन्हें शहरी गैस वितरण कंपनियों के माध्यम से PNG कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा। इस कदम का उद्देश्य उद्योगों को धीरे-धीरे स्वच्छ और अधिक टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर स्थानांतरित करना है।
यह नीति न केवल वर्तमान गैस संकट को संभालने के लिए बनाई गई है, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा प्रबंधन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का मानना है कि यदि उद्योग वैकल्पिक ईंधनों को अपनाते हैं, तो भविष्य में इस तरह की आपूर्ति संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है। इसके अलावा, इससे पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।


