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राजस्थान सरकार का OPS पर बड़ा निर्णय: कमजोर संस्थाओं को पुरानी पेंशन योजना से हटने की छूट

राजस्थान सरकार का OPS पर बड़ा निर्णय: कमजोर संस्थाओं को पुरानी पेंशन योजना से हटने की छूट

शोभना शर्मा।  राजस्थान की सरकारी व्यवस्था में कार्यरत लाखों कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। सरकार ने उन सभी बोर्ड, निगम, विश्वविद्यालयों और स्वायत्तशासी संस्थाओं को OPS से हटने की अनुमति दे दी है, जिनकी वित्तीय स्थिति कमजोर है और जो पेंशन का बोझ उठाने में सक्षम नहीं हैं।

इस नए आदेश के तहत, ऐसी संस्थाएं अब नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), सेंट्रल प्रॉविडेंट फंड (CPF) या एम्प्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड (EPF) जैसी वैकल्पिक पेंशन व्यवस्थाएं लागू कर सकेंगी। यह कदम राज्य की वित्तीय स्थिति को संतुलित करने और भविष्य में बढ़ते पेंशन भार को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

OPS पर यू-टर्न: पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की नीति में बदलाव

यह फैसला पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के उस निर्णय से पूरी तरह विपरीत है, जिसमें अप्रैल 2023 में OPS को फिर से लागू किया गया था। अशोक गहलोत सरकार ने 20 अप्रैल 2023 को जीपीएफ लिंक्ड पेंशन स्कीम लागू की थी, जिसके तहत कई संस्थाओं में पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दी गई थी।

अब मौजूदा सरकार के वित्त विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि जिन संस्थाओं की वित्तीय स्थिति कमजोर है, उन्हें OPS से हटने की अनुमति दी जा रही है। आदेश के अनुसार, “यदि किसी संस्था ने OPS लागू कर दिया है, तो वहां कर्मचारियों को पहले से दी गई पेंशन राशि वापस नहीं की जाएगी, लेकिन आगे से वे NPS, CPF या EPF प्रणाली अपना सकते हैं।” यह बदलाव सरकारी वित्तीय प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि OPS से राज्य पर भविष्य में भारी आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना जताई गई थी।

अरुण चतुर्वेदी ने दी सफाई, कहा – OPS का बोझ उठाना मुश्किल

राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने इस फैसले पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “सरकार फिलहाल NPS को बंद नहीं कर रही है, लेकिन आने वाले समय में नए कर्मचारियों के लिए NPS का फॉर्मूला ही लागू करना पड़ेगा।”

उन्होंने बताया कि, “पुराने कर्मचारियों को फिलहाल OPS का लाभ मिलता रहेगा, लेकिन राज्य के बोर्ड, निगम, स्वायत्तशासी संस्थाओं और विश्वविद्यालयों में अब OPS की जगह NPS, CPF और EPF जैसी योजनाएं लागू की जा सकती हैं।”

चतुर्वेदी ने कहा कि यह निर्णय उन संस्थाओं के लिए राहत है, जो OPS के आर्थिक बोझ को उठाने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने माना कि OPS के तहत सरकार पर दीर्घकालिक पेंशन दायित्व बढ़ जाते हैं, जिससे वित्तीय संतुलन बिगड़ने की आशंका रहती है।

वित्तीय सुधार की दिशा में बड़ा कदम

OPS से हटने की छूट देने का यह निर्णय केवल एक नीति परिवर्तन नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक वित्तीय सुधार की दिशा में उठाया गया कदम है। वित्त आयोग के अनुसार, राज्य सरकार को भविष्य के वित्तीय दायित्वों को संतुलित करना आवश्यक है, खासकर तब जब राजस्व संग्रहण में अस्थिरता और खर्च में निरंतर वृद्धि हो रही हो।

राज्य के आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि OPS के पुनः लागू होने से राज्य पर हर साल हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता। इससे विकास योजनाओं और पूंजीगत निवेश पर प्रतिकूल असर पड़ सकता था। ऐसे में कमजोर संस्थाओं को OPS से बाहर रखकर सरकार ने वित्तीय अनुशासन की दिशा में एक व्यावहारिक कदम उठाया है।

हेल्थ सेक्टर की चुनौतियों पर भी बोले अरुण चतुर्वेदी

OPS के मुद्दे के साथ-साथ, अरुण चतुर्वेदी ने हाल ही में जारी कैग (CAG) की स्वास्थ्य सेवाओं पर की गई ऑडिट रिपोर्ट पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्वीकार किया कि रिपोर्ट में जो कमियां बताई गई हैं, वे काफी हद तक सही हैं।

उन्होंने कहा कि “राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य ढांचे को लेकर उतनी प्रगति नहीं हुई, जितनी होनी चाहिए थी। सरकार को अब स्वास्थ्य बजट बढ़ाने पर ध्यान देना होगा, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर की जा सकें।”

चतुर्वेदी ने कहा कि हेल्थ सिस्टम का मतलब सिर्फ बड़े शहरों में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल खोलना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि “हर गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध हों।”

“गांव में पोस्टिंग से डॉक्टर न डरें” – चतुर्वेदी का संदेश

राजस्थान वित्त आयोग अध्यक्ष ने स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों को भी विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा, “सरकार भर्ती कर सकती है, लेकिन डॉक्टरों को भी ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।”

उनकी यह टिप्पणी CAG रिपोर्ट के उस हिस्से से जुड़ी थी, जिसमें बताया गया था कि ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी है। चतुर्वेदी ने कहा कि आगामी बजट से पहले हेल्थ सेक्टर को लेकर सरकार के साथ व्यापक चर्चा की जाएगी और स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा जाएगा।

OPS बनाम NPS: भविष्य की दिशा तय करेगा यह फैसला

राज्य सरकार के इस नए आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि OPS की सार्वभौमिक बहाली अब संभव नहीं है। वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने व्यावहारिक रास्ता चुना है। OPS से हटने की अनुमति देकर राज्य ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में NPS जैसी आधुनिक पेंशन योजनाएं ही भविष्य का आधार होंगी। इस निर्णय से जहां वित्तीय रूप से कमजोर संस्थाओं को राहत मिलेगी, वहीं सरकारी वित्त पर अनियंत्रित बोझ से भी बचाव होगा। OPS और NPS की बहस फिलहाल जारी रहेगी, लेकिन राजस्थान सरकार ने साफ कर दिया है कि पेंशन नीति अब यथार्थवादी और टिकाऊ मॉडल की दिशा में आगे बढ़ेगी।

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