राजस्थान पुलिस महकमे में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया गया है। पुलिस निरीक्षकों (इंस्पेक्टर) की बढ़ती कमी और थानों की कार्यप्रणाली को सुचारू रखने के लिए डीजीपी राजीव शर्मा ने बड़ा आदेश जारी किया है। अब राज्य के शांत और कम अपराध वाले थानों की जिम्मेदारी अनुभवी उपनिरीक्षकों (SI) को सौंपी जाएगी। इस कदम से न केवल कनिष्ठ अधिकारियों को नेतृत्व का अवसर मिलेगा, बल्कि फील्ड में अधिकारियों की कमी का संकट भी कम होगा।
किन थानों को मिलेगी छूट?
आदेश के अनुसार यह व्यवस्था सभी थानों पर लागू नहीं होगी। इसके लिए दो स्पष्ट मापदंड तय किए गए हैं:
जिन थानों में सालभर में दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या 250 से कम हो।
जो थाने जिला मुख्यालय या उपखंड मुख्यालय पर स्थित न हों। इन शर्तों को पूरा करने वाले थानों में एसआई स्तर के अधिकारी को थानाधिकारी नियुक्त किया जा सकेगा।
हर SI नहीं बनेगा थानेदार
विभाग ने जिम्मेदारी सौंपने के साथ अनुभव की कड़ी शर्त भी रखी है। आदेश के अनुसार संबंधित उपनिरीक्षक के पास कम से कम 5 वर्ष का सक्रिय फील्ड अनुभव होना अनिवार्य है। पुलिस विभाग का मानना है कि 5 साल तक फील्ड में काम करने वाले एसआई को कानून-व्यवस्था, जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यों का पर्याप्त अनुभव हो जाता है, जिससे वे शांत इलाकों में प्रभावी ढंग से नेतृत्व कर सकते हैं।
क्यों जरूरी पड़ा यह फैसला?
राजधानी Jaipur समेत प्रदेशभर में इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है। कई महत्वपूर्ण पद खाली हैं या वरिष्ठ अधिकारी मुख्यालयों में तैनात हैं। इसके कारण ग्रामीण और कम अपराध वाले क्षेत्रों के थानों में संचालन संबंधी चुनौतियां सामने आ रही थीं। सीमित संसाधनों और बढ़ते कार्यभार को देखते हुए डीजीपी ने यह व्यावहारिक और प्रभावी समाधान निकाला है।
क्या होगा असर?
इस निर्णय से:
फील्ड स्तर पर नेतृत्व की कमी कम होगी।
अनुभवी एसआई को प्रमोशनल जिम्मेदारी का अवसर मिलेगा।
ग्रामीण और शांत इलाकों में पुलिसिंग व्यवस्था अधिक सुचारू हो सकेगी। हालांकि, यह व्यवस्था फिलहाल जरूरत के अनुसार अपनाई गई रणनीतिक पहल मानी जा रही है, जिससे पुलिस महकमे की कार्यक्षमता में सुधार की उम्मीद है।


