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WhatsApp Privacy पर बड़ा विवाद: E2E एन्क्रिप्शन के बावजूद चैट पढ़ने का आरोप, मेटा पर केस

WhatsApp Privacy पर बड़ा विवाद: E2E एन्क्रिप्शन के बावजूद चैट पढ़ने का आरोप, मेटा पर केस

दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग एप WhatsApp की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) एक बार फिर प्राइवेसी विवाद के केंद्र में आ गई है। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक फेडरल कोर्ट में दायर नए मुकदमे में दावा किया गया है कि मेटा उन चैट्स तक भी पहुंच बना सकती है, जिन्हें वह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड (E2E) बताकर पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा करती है। मुकदमे में कहा गया है कि कंपनी का यह दावा भ्रामक है और अरबों यूजर्स को सुरक्षा के नाम पर गुमराह किया जा रहा है।

कई देशों के यूजर्स ने दायर किया क्लास-एक्शन मुकदमा

इस मामले में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के यूजर्स के एक समूह ने क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मेटा और वॉट्सएप जानबूझकर यह प्रचार करते हैं कि केवल भेजने वाला और प्राप्त करने वाला ही मैसेज पढ़ सकता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। मुकदमे के अनुसार, कंपनी के पास तकनीकी रूप से इतनी क्षमता है कि वह यूजर्स की निजी बातचीत को स्टोर, एनालिसिस और एक्सेस कर सके।

मुकदमे में लगाए गए मुख्य आरोप

याचिका में कहा गया है कि:

  • वॉट्सएप का एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का दावा पूरी तरह सच नहीं है

  • मेटा के पास लगभग सभी निजी चैट्स तक पहुंच बनाने की तकनीकी क्षमता मौजूद है

  • यूजर्स के डेटा को जरूरत पड़ने पर स्टोर और एनालाइज किया जा सकता है

मुकदमे में कुछ व्हिसलब्लोअर्स के हवाले से भी दावे किए गए हैं, जिनका कहना है कि मेटा के कर्मचारी विशेष परिस्थितियों में यूजर्स के मैसेज और डेटा तक पहुंच बना सकते हैं।

मेटा ने आरोपों को बताया निराधार

इन आरोपों पर मेटा ने कड़ा जवाब दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा है कि यह मुकदमा पूरी तरह से आधारहीन है और मेटा यूजर्स की प्राइवेसी से किसी भी तरह का समझौता नहीं करती। प्रवक्ता के अनुसार: “वॉट्सएप की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तकनीक मजबूत और सुरक्षित है। मेटा न तो यूजर्स के मैसेज पढ़ती है और न ही उन्हें स्टोर करती है।” मेटा ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस मामले में याचिकाकर्ताओं के वकील के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर सकती है।

WhatsApp की प्राइवेसी पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब वॉट्सएप और मेटा की प्राइवेसी पॉलिसी पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी डेटा शेयरिंग, प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट और यूजर ट्रैकिंग को लेकर कंपनी को कई देशों में आलोचना और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। भारत समेत कई देशों में यूजर्स की बड़ी संख्या होने के कारण यह मामला आने वाले समय में गंभीर कानूनी और नीतिगत बहस को जन्म दे सकता है।

WhatsApp की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रणाली को लेकर दायर यह मुकदमा टेक कंपनियों की पारदर्शिता और यूजर प्राइवेसी पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। अब अदालत का फैसला यह तय करेगा कि मेटा के दावे कितने मजबूत हैं और यूजर्स की निजी बातचीत वास्तव में कितनी सुरक्षित है।

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