मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार ने कर्मचारियों और उनके परिजनों को राहत देने के लिए पेंशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। 19 सितंबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। इन संशोधनों का सीधा लाभ उन परिवारों को मिलेगा जिनका आश्रित सरकारी कर्मचारी असामयिक मृत्यु का शिकार हो जाता है, साथ ही उन निशक्त बच्चों को भी मदद मिलेगी जो शादी के बाद पेंशन से वंचित हो जाते थे।
माता-पिता की पारिवारिक पेंशन में बढ़ोतरी
अब तक राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996 के अनुसार, यदि सरकारी कर्मचारी की असामयिक मृत्यु होती थी तो उसके माता-पिता को कुल परिलब्धियों का 30 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन मिलता था। इसे नियम 62 (IV) के अंतर्गत निर्धारित किया गया था।
कैबिनेट ने इस नियम को विलोपित करने और इसमें संशोधन करने का निर्णय लिया है। नए प्रावधानों के तहत माता-पिता को भी वही बढ़ा हुआ पेंशन लाभ मिलेगा, जो कार्मिक की पत्नी, पति या बच्चों को दिया जाता है। इसका मतलब है कि अब माता-पिता को भी नियम 62 (III) के अनुसार अधिकतम 50 प्रतिशत तक पेंशन प्राप्त हो सकेगी। यह बदलाव उन माता-पिता के लिए बड़ी राहत है, जो अपने बच्चों की आय पर निर्भर रहते हैं और उनकी मृत्यु के बाद आर्थिक संकट में पड़ जाते हैं।
निशक्त बच्चों को विवाह के बाद भी पेंशन
कैबिनेट बैठक में एक और बड़ा फैसला लिया गया। राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996 के नियम 67 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। पहले यह प्रावधान था कि कर्मचारी की असामयिक मृत्यु के बाद उसके मानसिक या शारीरिक रूप से निशक्त बच्चों को पारिवारिक पेंशन तभी तक मिलती थी जब तक उनकी शादी नहीं हो जाती। विवाह के बाद यह सुविधा समाप्त हो जाती थी।
नए संशोधन के अनुसार, अब मानसिक या शारीरिक रूप से निशक्त पुत्र अथवा पुत्री को विवाह उपरांत भी पारिवारिक पेंशन मिलती रहेगी। यह फैसला सामाजिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि निशक्त व्यक्तियों के लिए विवाह के बाद भी आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करना कठिन होता है।
पेंशन की सीमा में भी बढ़ोतरी
कैबिनेट ने पेंशन की सीमा में भी बदलाव किया है। पहले पेंशन की अधिकतम सीमा 8,550 रुपए प्रति माह तय थी। अब इसे बढ़ाकर 13,750 रुपए कर दिया गया है। इससे हजारों परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से बड़ा कदम
राजस्थान सरकार के इस फैसले को सामाजिक सुरक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कर्मचारियों के माता-पिता और निशक्त बच्चों के लिए यह बदलाव जीवनयापन को आसान बनाएगा। अक्सर देखा जाता है कि असामयिक मृत्यु के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक संकट का सामना करता है। ऐसे में पेंशन नियमों में यह संशोधन उनके लिए सहारा साबित होगा।


