राजस्थान में पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट शुरू होते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनावी माहौल बनने के साथ ही नेताओं का पाला बदलने का दौर भी शुरू हो चुका है। ऐसे ही एक घटनाक्रम ने मेवाड़ की राजनीति में हलचल पैदा कर दी, जब उदयपुर के सायरा क्षेत्र में कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए निवर्तमान प्रधान सवाराम गमेती ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। यह कार्यक्रम महत्त्वपूर्ण समय पर हुआ, जिससे आने वाले पंचायत चुनावों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। सदस्यता कार्यक्रम उदयपुर जिले के सायरा क्षेत्र में आयोजित किया गया जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इस आयोजन के बाद क्षेत्र की राजनीतिक हवा पूरी तरह बदलती हुई दिखाई दे रही है।
भूमि पूजन समारोह के बीच शक्ति प्रदर्शन जैसा माहौल
सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम उस समय चर्चा का केंद्र बना जब यह सायरा के राजकीय महाविद्यालय के भूमि पूजन समारोह के दौरान आयोजित किया गया। सवाराम गमेती अपने सैकड़ों समर्थकों, पूर्व और वर्तमान सरपंचों तथा स्थानीय पदाधिकारियों के साथ मंच पर पहुंचे और भाजपा की सदस्यता ली।
इस दौरान प्रताप गमेती और भारतीय जनता पार्टी देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली उपस्थित रहे। समारोह में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जोरदार स्वागत और नारेबाजी ने इसे एक मजबूत राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का रूप दे दिया। यह आयोजन न केवल दल-बदल का संकेत था बल्कि यह भी दिखाता था कि क्षेत्र में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में सफल होती दिख रही है।
गोगुंदा में कांग्रेस की पकड़ ढीली पड़ने के संकेत
सायरा और गोगुंदा क्षेत्र में सवाराम गमेती को आदिवासी समुदाय में मजबूत आधार वाला नेता माना जाता है। उनके भाजपा में शामिल होने को गोगुंदा विधानसभा के लिए कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान बताया जा रहा है।
सवाराम केवल व्यक्तिगत प्रभाव वाले नेता नहीं हैं, बल्कि पंचायत स्तर पर उनका संगठनात्मक प्रभाव भी व्यापक है। उनके साथ जुड़े कई सरपंच और पूर्व सरपंच भी भाजपा में आए, जिससे कांग्रेस का जमीनी ढांचा कमजोर होता नजर आ रहा है। आगामी पंचायत चुनावों को देखते हुए यह स्थिति कांग्रेस के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। मेवाड़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कांग्रेस परंपरागत रूप से मजबूत रही है, लेकिन ऐसे बदलाव पार्टी के लिए चिंता का विषय हैं।
भाजपा की रणनीति: मेवाड़ पर फोकस और संगठन विस्तार
पंचायत चुनावों से पहले भाजपा पूरे प्रदेश में संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। मेवाड़ क्षेत्र में पार्टी अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है क्योंकि यहां की जनसंख्या और राजनीतिक समीकरण चुनावों को प्रभावित करते हैं। सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में भाजपा देहात जिलाध्यक्ष ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर लोग स्वेच्छा से पार्टी का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने इस घटना को पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत बताया। वहीं, गोगुंदा विधायक प्रताप गमेती ने कहा कि सवाराम गमेती के आने से भाजपा को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलेगी और इसका सीधा असर पंचायत चुनावों के परिणामों में दिखेगा।
कांग्रेस के लिए चुनौती: स्थानीय असंतोष और संगठनात्मक कमजोरी
कांग्रेस के लिए यह घटना केवल एक नेता के पार्टी छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गहरी होती संगठनात्मक समस्याओं का संकेत भी देती है। स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सवाराम गमेती काफी समय से पार्टी की कार्यप्रणाली और स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी से नाराज चल रहे थे। विकास कार्यों में धीमी गति और उनके सुझावों की उपेक्षा ने उनके असंतोष को और बढ़ाया। भाजपा ने इस स्थिति को भांपकर उन्हें सही समय पर अपने पाले में कर लिया।
यदि कांग्रेस ने इन मुद्दों को समय रहते नहीं संभाला, तो मेवाड़ के अन्य ब्लॉकों में भी ऐसी ही स्थितियाँ बन सकती हैं, जिससे पंचायत चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आगामी पंचायत चुनावों पर संभावित असर
राजस्थान में पंचायत चुनाव भारतीय राजनीति के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि स्थानीय नेतृत्व और जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ यहीं से तय होती है। सवाराम गमेती जैसे प्रभावशाली नेता के पार्टी बदलने का असर कई वार्डों और पंचायतों के उम्मीदवारों की रणनीति पर पड़ेगा। यह बदलाव भाजपा के लिए फायदेमंद होता दिख रहा है, जबकि कांग्रेस के लिए यह चुनावों से ठीक पहले बड़ी चुनौती बन सकता है। मेवाड़ की राजनीति में यह घटना बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।


