नेटफ्लिक्स पर प्रस्तावित फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर देशभर में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। फिल्म के शीर्षक को लेकर ब्राह्मण समाज में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी बीच जयपुर में विप्र महासभा की ओर से एक बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान किया गया है, जिसने इस विवाद को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है। विप्र महासभा ने घोषणा की है कि फिल्म से जुड़े निर्देशक या अभिनेता को जूते मारने वाले व्यक्ति को ‘विप्र वीर सम्मान’ दिया जाएगा। इसके साथ ही एक लाख रुपये का नकद इनाम देने की भी घोषणा की गई है। महासभा का कहना है कि यह निर्णय समाज के आत्मसम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लिया गया है।
फिल्म के नाम को लेकर क्यों भड़का विरोध
फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ का शीर्षक सामने आने के बाद से ही ब्राह्मण समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। समाज के लोगों का कहना है कि फिल्म का नाम सीधे तौर पर एक विशेष जाति को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करता है और इससे समाज की भावनाएं आहत होती हैं। विप्र महासभा के अध्यक्ष सुनील उदोईया ने कहा कि यह सिर्फ एक फिल्म का नाम नहीं, बल्कि पूरे समाज की छवि से जुड़ा मामला है। उनका आरोप है कि फिल्म उद्योग लगातार भारतीय संस्कृति और विशेष समुदायों को निशाना बना रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जयपुर में विप्र महासभा का विवादित ऐलान
जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान विप्र महासभा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई व्यक्ति फिल्म से जुड़े निर्देशक या अभिनेता के खिलाफ जूते मारकर विरोध दर्ज कराता है, तो उसे ‘विप्र वीर सम्मान’ से नवाजा जाएगा। इसके साथ ही एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी दी जाएगी। महासभा का कहना है कि यह कदम किसी हिंसा को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि समाज के आत्मसम्मान की आवाज को बुलंद करने के लिए है। हालांकि, इस घोषणा को लेकर प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर सवाल भी उठने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश में दर्ज हुई एफआईआर
विवाद के शुरुआती चरण में ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने लखनऊ के हजरतगंज थाना क्षेत्र में फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे और उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह मामला फिल्म के शीर्षक और प्रचार सामग्री को लेकर दर्ज किया गया, जिसमें जातिगत भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद से फिल्म से जुड़े लोग और प्रोडक्शन हाउस भी दबाव में आ गए हैं। कानूनी कार्रवाई के चलते फिल्म की रिलीज और प्रचार रणनीति पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
कई शहरों में प्रदर्शन और पुतला दहन
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज सहित कई अन्य संगठनों ने देश के अलग-अलग शहरों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। कई स्थानों पर फिल्म से जुड़े लोगों के पुतले जलाए गए और फिल्म पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर फिल्म का नाम नहीं बदला गया और इसे रिलीज किया गया, तो विरोध और तेज किया जाएगा। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यह मुद्दा सिर्फ एक समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक सौहार्द से भी जुड़ जाएगा।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
फिल्म विवाद ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने फिल्म उद्योग पर भारतीय संस्कृति और विशेष रूप से ब्राह्मण समाज को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री समाज में विभाजन पैदा करती है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है और जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
मायावती ने की प्रतिबंध की मांग
बीएसपी प्रमुख मायावती ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार से फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। मायावती ने कहा कि यह फिल्म जातिगत भावनाओं को भड़काने वाली है और इससे ब्राह्मण समाज का अपमान होता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी फिल्मों पर रोक लगाना जरूरी है, ताकि समाज में शांति और सौहार्द बना रहे।
निर्देशक नीरज पांडे की सफाई
विवाद बढ़ने के बीच फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि फिल्म का शीर्षक एक काल्पनिक चरित्र से जुड़ा है और इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, जाति या समुदाय को अपमानित करना नहीं है। नीरज पांडे ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रचार सामग्री को वापस ले लिया गया है, ताकि किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। उन्होंने अपील की कि फिल्म को उसके पूरे कथानक और संदर्भ के साथ देखा जाए।
आगे क्या बदलेगा फिल्म का भविष्य
‘घूसखोर पंडित’ फिल्म को लेकर जिस तरह से विरोध तेज होता जा रहा है, उससे इसके भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। कानूनी कार्रवाई, सामाजिक विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच अब देखना होगा कि फिल्म का नाम बदला जाता है या इस पर कोई औपचारिक प्रतिबंध लगाया जाता है।


