नागौर जिले के मेड़ता क्षेत्र में सोमवार को किसानों की एक बड़ी महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। यह महापंचायत किसानों की 12 सूत्रीय मांगों को लेकर बुलाई गई थी। जैसे-जैसे बैठक आगे बढ़ी, किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी और प्रशासन के साथ हुई वार्ता विफल होने के बाद महापंचायत ने धरने का रूप ले लिया।
किसानों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके चलते अब आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
प्रशासन से वार्ता रही असफल
महापंचायत के दौरान किसान यूनियन के प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन के बीच बातचीत हुई। किसानों ने अपनी समस्याएं और मांगें अधिकारियों के सामने रखीं, लेकिन वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। प्रशासन की ओर से केवल मांगों को आगे सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया गया, जिससे किसान संतुष्ट नहीं हुए।
वार्ता विफल रहने के बाद किसानों ने सर्वसम्मति से धरना जारी रखने और आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया।
फसल खराबे को लेकर किसानों में गहरी नाराजगी
किसानों की प्रमुख मांग अतिवृष्टि से हुई फसल खराबी को लेकर मुआवजे से जुड़ी है। किसानों का कहना है कि अतिवृष्टि के बाद फसल नुकसान का सर्वे करते समय केवल 57 गांवों का चयन किया गया, जबकि 74 गांवों को इससे बाहर रखा गया। इन गांवों के किसान भी समान रूप से प्रभावित हुए हैं, लेकिन उन्हें मुआवजे से वंचित कर दिया गया।
किसानों की मांग है कि सभी प्रभावित गांवों को फसल खराबे की सूची में शामिल कर उचित मुआवजा दिया जाए। इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है।
रेलवे लाइन विस्तार और भूमि अधिग्रहण पर विरोध
पुष्कर-मेड़ता रेलवे लाइन विस्तार के दौरान भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी किसानों की नाराजगी का बड़ा कारण बना हुआ है। किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण डीएलसी दरों पर किए जाने की बात कही जा रही है, जो वर्तमान बाजार मूल्य से काफी कम है।
किसानों का कहना है कि उनकी जमीन आजीविका का मुख्य साधन है और कम दरों पर अधिग्रहण उनके साथ अन्याय है। वे उचित मुआवजा और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।
एसडीएम का बयान, सरकार तक भेजी जाएंगी मांगें
मेड़ता एसडीएम सूर्यकुमार ने बताया कि महापंचायत के दौरान किसान यूनियन के नेताओं और प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं। उन्होंने कहा कि किसानों के ज्ञापन और मांगों को प्रदेश सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि इन मांगों पर निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर किया जाना है और प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेज दी है।
8 जनवरी को ट्रैक्टरों के साथ जयपुर कूच का ऐलान
महापंचायत के समापन के बाद किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो 8 जनवरी को किसान ट्रैक्टरों के साथ जयपुर कूच करेंगे। यह कूच शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा, लेकिन मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन सतर्क, सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी
किसानों के जयपुर कूच के ऐलान के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे।


