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नए साल पर राजस्थान में बड़ी प्रशासनिक पदोन्नतियां, 44 इंस्पेक्टर बने RPS

नए साल पर राजस्थान में बड़ी प्रशासनिक पदोन्नतियां, 44 इंस्पेक्टर बने RPS

शोभना शर्मा।   नए साल की शुरुआत के साथ ही राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक सेवाओं में बड़ा कदम उठाते हुए पुलिस और वन विभाग में एक साथ महत्वपूर्ण पदोन्नतियां दी हैं। राज्य सरकार के इस फैसले को लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को गति देने के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां राजस्थान पुलिस के 44 इंस्पेक्टरों को राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में पदोन्नत किया गया है, वहीं दूसरी ओर भारतीय वन सेवा के 11 अधिकारियों को भी उच्च पदों पर तरक्की का लाभ मिला है। इस फैसले से पुलिस और वन विभाग दोनों में ही प्रशासनिक स्तर पर नई ऊर्जा और संतुलन आने की उम्मीद जताई जा रही है।

गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, इन पदोन्नतियों को औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है। संयुक्त शासन सचिव आनंदी लाल वैष्णव के हस्ताक्षर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चयनित पुलिस इंस्पेक्टरों को राजस्थान पुलिस सेवा के अधिकारी के रूप में पदोन्नत किया गया है। यह पदोन्नति अलग-अलग तिथियों से प्रभावी मानी जाएगी, जो 1 अप्रैल 2025 से लेकर 1 मार्च 2026 तक निर्धारित की गई हैं। इससे यह भी संकेत मिलता है कि सरकार ने वरिष्ठता और रिक्त पदों के आधार पर एक चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई है।

इस पदोन्नति सूची में जयपुर ग्रामीण जिले के चौमूं थाने के थानाधिकारी प्रदीप शर्मा का नाम भी शामिल है। प्रदीप शर्मा हाल के दिनों में चौमूं क्षेत्र में एक मस्जिद के बाहर हुई पत्थरबाजी की घटना को लेकर सुर्खियों में रहे थे। इस मामले में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की टिप्पणी के बाद उनका नाम राजनीतिक चर्चाओं में भी आया था। अब राजस्थान पुलिस सेवा में पदोन्नति मिलने के बाद प्रदीप शर्मा डिप्टी रैंक के अधिकारी बन गए हैं, जिससे उनके प्रशासनिक कद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

राजस्थान पुलिस सेवा में पदोन्नत किए गए 44 अधिकारियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सामान्य वर्ग के अधिकारी शामिल हैं। सरकार की ओर से जारी सूची में यह दर्शाया गया है कि सामाजिक वर्गों के अनुसार भी संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। पदोन्नत होने वाले अधिकारियों में देवेंद्र प्रताप वर्मा, मदन लाल, राजेंद्र बाफना, अब्दुलदान रतू, पुरुषोत्तम महरिया, बनवारी लाल मीणा, बाबूलाल मीणा, रामनिवास मीणा, अजयकला रतूड़ी, रविंद्र कुमार, मुकेश शर्मा, धर्मेंद्र पेवा, बाबूलाल चौधरी, सुरेश धायल, शिखा विश्नोई सहित कुल 44 नाम शामिल हैं। सूची में पदोन्नति की तिथि भी स्पष्ट रूप से दर्ज की गई है, जिससे वरिष्ठता और सेवा लाभों को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

गृह विभाग के आदेश में यह भी साफ किया गया है कि पदोन्नत किए गए सभी पुलिस अधिकारी अग्रिम आदेश तक अपने वर्तमान पदों पर ही कार्य करते रहेंगे। प्रशासनिक दृष्टि से यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि अचानक बड़े स्तर पर स्थानांतरण से कानून-व्यवस्था या कार्यप्रणाली पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। आगे की तैनाती और जिम्मेदारियों को लेकर अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।

पुलिस विभाग के साथ-साथ वन विभाग में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पदोन्नतियां दी हैं। वर्ष 2012 बैच के 11 भारतीय वन सेवा अधिकारियों को उपवन संरक्षक से वन संरक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है। यह पदोन्नति वन विभाग के लिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि इससे राज्य में वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और पर्यावरणीय नीतियों के क्रियान्वयन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पदोन्नत किए गए IFS अधिकारियों में कविता सिंह, अजय चित्तौड़ा, अशोक कुमार महरिया, हरिकिशन सारस्वत, देवेंद्र प्रताप जगावत, संजय भादू, रमेश मालपानी, राजेंद्र सिंह हुड्डा, महेंद्र कुमार शर्मा, सुदर्शन शर्मा और मुकेश सैनी शामिल हैं। इन अधिकारियों को वन संरक्षक जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी मिलने से विभागीय निर्णय प्रक्रिया में अनुभव और प्रशासनिक क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

राज्य सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों को इससे न केवल व्यक्तिगत स्तर पर लाभ मिलेगा, बल्कि विभागीय कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। पुलिस विभाग में जहां कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक समन्वय को मजबूती मिलने की उम्मीद है, वहीं वन विभाग में संरक्षण और विकास से जुड़े कार्यों को नई दिशा मिल सकती है।

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