राजस्थान सरकार की राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। एक बार फिर बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने सीकर जिले में सात डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही एक निजी अस्पताल और एक डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ औपचारिक रूप से FIR दर्ज कराई गई है। यह पूरा मामला उस व्यापक जांच का हिस्सा है जिसमें सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का दुरुपयोग, फर्जी क्लेम और अनावश्यक महंगी जांच के पैटर्न लगातार सामने आ रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा कई महीनों से चल रही इस जांच का मुख्य आधार आधुनिक टेक्नोलॉजी है। स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करते हुए RGHS स्कीम के तहत किए जा रहे दावों और दस्तावेजों का विश्लेषण कराया। AI की मदद से उन मामलों को चिन्हित किया गया जिनमें पैटर्न दोहराव, फर्जीवाड़ा और अनियमितताएं साफ दिखाई दीं। इसके बाद कार्रवाई की शुरुआत सीकर से हुई है, लेकिन जांच पूरे राज्य में जारी है।
AI की स्कैनिंग ने खोले गड़बड़ी के नए आयाम
सरकार की जांच एजेंसी ने दवाइयों, जांचों और स्वास्थ्य सेवाओं के बिलिंग पैटर्न को AI के जरिए मॉनिटर किया। रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि कई चिकित्सकों ने बिना जरूरत मरीजों को महंगी दवाइयां लिखीं, जरूरत से ज्यादा जांचें कराईं और पर्चियों में बदलाव किए।
AI द्वारा पकड़ में आए प्रमुख पैटर्नों में शामिल हैं: गैर-जरूरी टेस्ट लिखना, ऐसी जांचों को बार-बार दोहराना जिनकी जरूरत नहीं थी, मरीजों की बीमारी के अनुरूप इलाज न देना, और RGHS कार्ड का गलत उपयोग कर क्लेम उठाना। अब तक राज्यभर में इस मामले में 21 FIR दर्ज कराई जा चुकी हैं। इनमें एक जैसा पैटर्न देखा गया है कि ऑर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजी और मेडिसिन विभागों से संबंधित मामलों में सबसे ज्यादा अनियमितताएँ पाई गईं।
सीकर में क्यों हुई बड़ी कार्रवाई?
सीकर में की गई कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच में पाया गया कि यहां कई डॉक्टर एक फिक्स पैटर्न के आधार पर मरीजों का इलाज दिखा रहे थे। मरीजों की वास्तविक स्थिति के अनुरूप उपचार न देकर पैकेज आधारित बिलिंग, गैर-जरूरी जांच और दवाइयों का चयन कर सरकारी स्कीम से बड़ी राशि क्लेम की गई।
इसी जांच के आधार पर सीकर जिले के सात डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। संबंधित अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर पर FIR इसलिए दर्ज कराई गई क्योंकि वहां से बड़ी मात्रा में संदिग्ध बिलिंग और फर्जी उपचार के प्रमाण मिले। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से क्लेम उठाने में शामिल था।
कई चिकित्सक और कर्मचारी अब भी रडार पर, जांच तेज
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार करीब 10 और डॉक्टर अब भी रडार पर हैं, जिन पर संदिग्ध दवाइयां लिखने, अनावश्यक जांच कराने और RGHS सिस्टम का दुरुपयोग करने का शक है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के करीब 15 कर्मचारियों की पहचान की गई है जिन्होंने RGHS कार्ड का गलत इस्तेमाल कर फर्जी क्लेम उठाए। जांच में यह भी पता चला कि कई निजी डॉक्टरों ने अपने परिजनों के लिए एक जैसी दवाइयां बार-बार लिखी, जो सामान्य परिस्थितियों में असामान्य माना जाता है।
इन सभी मामलों को मिलाकर स्वास्थ्य विभाग इस गड़बड़ी को एक बड़े पैमाने पर संचालित नेटवर्क के रूप में देख रहा है, जहां डॉक्टर, कर्मचारी और निजी अस्पताल आपस में मिलीभगत कर रहे थे।
AI आधारित मॉनिटरिंग से बदल रहा जांच का स्वरूप
इस पूरी कार्रवाई का सबसे बड़ा पहलू यह है कि राज्य सरकार ने पहली बार टेक्नोलॉजी को इतनी व्यापक भूमिका दी है। AI की मदद से हजारों बिल, चिकित्सा दस्तावेज और उपचार फाइल्स कुछ ही घंटों में स्कैन कर ली गईं। इससे उन मामलों की पहचान आसान हो गई जो वर्षों तक पकड़ में नहीं आते। यह भी माना जा रहा है कि अब AI आधारित निगरानी RGHS का स्थायी हिस्सा बनेगी। इससे भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़ों पर नियंत्रण करने में आसानी होगी और सरकारी निधि का दुरुपयोग रोकने में सफलता मिलेगी।
सरकार सख्त, जल्द और बड़ी कार्रवाई संभव
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। जैसे-जैसे AI रिपोर्ट और फिजिकल वेरिफिकेशन की जांच आगे बढ़ेगी, कई और डॉक्टर, कर्मचारी और संस्थान कार्रवाई के घेरे में आ सकते हैं। राज्य सरकार का रुख साफ है कि RGHS योजना आम कर्मचारियों और जरूरतमंद लोगों के लिए है, और इसका दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


