मनीषा शर्मा। जैसलमेर में पिछले वर्ष हुए दर्दनाक स्लीपर बस हादसे के बाद प्रदेश में बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इस हादसे ने यह उजागर कर दिया था कि कई स्लीपर बसें नियमों को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रही हैं और यात्रियों की जान खतरे में डाली जा रही है। इसी के बाद अब राजस्थान परिवहन विभाग ने स्लीपर बसों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई का ऐलान किया है।
बिना सुरक्षा उपकरण वाली स्लीपर बसों पर रोक
राजस्थान में अब वे स्लीपर बसें सड़कों पर नहीं चल पाएंगी, जिनमें इमरजेंसी गेट, गैंगवे (गलियारा), सेफ्टी हैमर और पैनिक बटन जैसी जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं होंगी। इसके साथ ही, बसों में अवैध रूप से सामान रखने के लिए बनाई गई डिक्कियों को भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी बसों को मौके पर ही जब्त किया जाएगा। परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
शुक्रवार रात से शुरू होगा विशेष अभियान
परिवहन विभाग शुक्रवार रात से प्रदेशभर में विशेष जांच अभियान शुरू करेगा। बिना बस बॉडी कोड के चल रही स्लीपर बसों को अब सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह कार्रवाई केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी द्वारा अवैध और असुरक्षित स्लीपर बसों पर सख्त कदम उठाने के निर्देशों के बाद की जा रही है।
परिवहन आयुक्त ने दिए सख्त निर्देश
परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने बस बॉडी कोड का उल्लंघन कर चल रही स्लीपर बसों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि नियमों का पालन नहीं करने वाली बसें सड़क सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
सीज होंगी बसें, मॉडिफिकेशन के बाद ही मिलेगी छूट
आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि परिवहन आयुक्त के निर्देशों के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वाली स्लीपर बसों को सीज किया जाएगा। जब तक इन बसों में बस बॉडी कोड के अनुसार आवश्यक मॉडिफिकेशन नहीं किए जाते, तब तक उन्हें दोबारा सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मामले में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। जयपुर के आरटीओ प्रथम क्षेत्र में शुक्रवार रात से विशेष अभियान चलाया जाएगा।
पहले की जांच में सामने आई थी चौंकाने वाली स्थिति
मीडिया द्वारा अक्टूबर 2025 में जयपुर के सिंधी कैंप, स्टेशन रोड और अजमेर रोड 200 फीट बाइपास पर करीब 50 से अधिक स्लीपर बसों की जांच की गई थी। इस जांच में केवल एक-दो बसें ही नियमों के अनुरूप पाई गई थीं। अधिकांश बसों में फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद नहीं थे। कई बसों में गैंगवे इतनी संकरी थी कि आपात स्थिति में यात्रियों का निकलना लगभग असंभव था। कुछ बसों में पर्दों की जगह शीशे या शटर लगाए गए थे, जो आसानी से खुल भी नहीं रहे थे। यह स्थिति किसी भी बड़े हादसे को न्योता देने वाली थी।
जैसलमेर बस हादसे ने खोली थी पोल
जैसलमेर में हुए स्लीपर बस हादसे में यह सामने आया था कि बस को अवैध रूप से मॉडिफाई किया गया था, जिससे हादसा और भी गंभीर हो गया। इस घटना के बाद परिवहन विभाग पर लगातार दबाव बन रहा था कि ऐसी बसों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
अब जयपुर में बिना बस बॉडी कोड बसों की एंट्री बंद
परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि जयपुर में अब बिना बस बॉडी कोड वाली स्लीपर बसें नहीं चल सकेंगी। बिना इमरजेंसी गेट, बिना पैनिक बटन और अवैध डिक्की बनाकर चल रही बसों को मौके पर ही जब्त किया जाएगा। विभाग की टीमें रात से ही सड़कों पर उतरकर जांच करेंगी और नियमों का उल्लंघन मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस अभियान से यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और सड़क हादसों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।


