भजनलाल शर्मा ने जयपुर के जमवारामगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अपने भाषण में न केवल गहलोत सरकार के कार्यकाल की आलोचना की, बल्कि व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर तीखे बयान दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि “कभी-कभी तो मुझे बड़ा तरस आता है,” और आगे जोड़ते हुए कहा कि समय के साथ हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ता है। यह बयान उस समय आया जब प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भजनलाल शर्मा का यह हमला हाल के दिनों में गहलोत द्वारा उठाए गए मुद्दों और ‘इंतजारशास्त्र’ जैसी श्रृंखलाओं के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
“जैसा किया वैसा भरना पड़ेगा” का संदेश
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गहलोत ने अपने कार्यकाल में जिन लोगों को “नकारा और निकम्मा” कहा था, आज वही लोग केंद्र में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यही कारण है कि गहलोत अब असहज महसूस कर रहे हैं। शर्मा ने कहा कि समय बहुत शक्तिशाली होता है और हर किसी को उसके कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ता है। इस बयान के जरिए मुख्यमंत्री ने यह संकेत देने की कोशिश की कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां पिछले निर्णयों का परिणाम हैं। उन्होंने इसे एक नैतिक और राजनीतिक संदेश के रूप में पेश किया।
परिवारवाद पर भी साधा निशाना
अपने भाषण में सोनिया गांधी और राहुल गांधी का जिक्र करते हुए भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व बार-बार अपने नेताओं के परिवार के सदस्यों को राजनीति में स्थापित करने की कोशिश करता है, लेकिन जनता उन्हें स्वीकार नहीं करती। उन्होंने गहलोत पर भी अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करने के प्रयासों का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि कई बार “लॉन्च” करने के बावजूद अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। यह बयान कांग्रेस के भीतर चल रही आंतरिक राजनीति पर भी कटाक्ष माना जा रहा है।
कांग्रेस में आंतरिक कलह का आरोप
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही कथित गुटबाजी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता आपस में ही संघर्ष कर रहे हैं और एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे रहे हैं। शर्मा ने कहा कि जब एक उंगली दूसरे पर उठाई जाती है, तो चार उंगलियां खुद की ओर भी इशारा करती हैं, इसलिए कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेता खुद ही एक-दूसरे को बोलने से रोकते हैं, जिससे पार्टी में अस्थिरता और भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। इस बयान के जरिए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को एक विभाजित और कमजोर संगठन के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की।
भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप
भजनलाल शर्मा ने अपने भाषण में गहलोत सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में घोटाले हुए और कई मंत्री तथा अधिकारी जांच के दायरे में आए। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ हुआ और पेपर लीक जैसे मामलों ने व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राजस्थान की जनता अब जवाब चाहती है और हर मुद्दे पर हिसाब लिया जाएगा।
‘ट्विटर मास्टर’ बयान और राजनीतिक कटाक्ष
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं पर सोशल मीडिया राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ नेता “ट्विटर मास्टर” बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता, बल्कि जमीन पर काम करना जरूरी है। इस बयान को गहलोत की सोशल मीडिया सक्रियता और उनकी ‘इंतजारशास्त्र’ श्रृंखला पर सीधा हमला माना जा रहा है, जिसमें वे वर्तमान सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते रहे हैं।
जनता से हिसाब देने की मांग
अपने संबोधन के अंत में भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की जनता अब पूरी तरह जागरूक है और वह हर सरकार से जवाब मांगती है। उन्होंने गहलोत से सवाल किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में प्रदेश को कौन सी बड़ी योजनाएं दीं और उनके परिणाम क्या रहे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विधानसभा में प्रस्तुत “5 साल बनाम 2 साल” के प्रतिवेदन का जवाब भी विपक्ष को देना चाहिए। उन्होंने इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बताया।
राजनीतिक माहौल में बढ़ती तल्खी
जमवारामगढ़ में दिया गया यह भाषण साफ संकेत देता है कि राजस्थान की राजनीति में आने वाले समय में बयानबाजी और भी तेज हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है, जो आगामी चुनावी रणनीतियों का हिस्सा भी माना जा रहा है।


