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राजस्थान में भजनलाल सरकार ने विदेश यात्राओं और फिजूलखर्ची पर लगाया अंकुश

राजस्थान में भजनलाल सरकार ने विदेश यात्राओं और फिजूलखर्ची पर लगाया अंकुश

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने वित्तीय अनुशासन और सरकारी संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने बढ़ते प्रशासनिक खर्चों पर नियंत्रण लगाने और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की है। वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश में सरकारी फिजूलखर्ची रोकने, ईंधन की बचत करने और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार के इन फैसलों को आने वाले समय में प्रशासनिक सुधार और वित्तीय संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

सरकार ने सबसे बड़ा निर्णय सरकारी खर्चे पर होने वाली विदेश यात्राओं को लेकर लिया है। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। राज्य सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन बैठकों के बढ़ते उपयोग के कारण कई यात्राओं की आवश्यकता कम हो गई है। ऐसे में विदेश यात्राओं पर होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च को बचाकर उसे विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं में उपयोग किया जा सकेगा। इस फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक दौरों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वयं भी सादगी और खर्च नियंत्रण का संदेश देते हुए अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही राज्य के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को भी अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचने और सीमित संख्या में सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि सरकारी खर्चों में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।

राजस्थान सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल और डीजल से चलने वाले सरकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का भी फैसला लिया है। इसके तहत आने वाले समय में विभागों में नई खरीदी जाने वाली गाड़ियों में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी। इतना ही नहीं, संविदा पर लिए जाने वाले वाहनों में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय में ईंधन खर्च कम होगा और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

सरकार ने कार पूलिंग व्यवस्था को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। आदेश के अनुसार यदि अधिकारी और कर्मचारी एक ही स्थान पर जा रहे हों तो उन्हें अलग-अलग वाहनों के बजाय साझा वाहन का उपयोग करना चाहिए। इस कदम को ईंधन बचत और यातायात दबाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही इससे सरकारी खर्चों में भी कमी आने की संभावना जताई गई है।

भजनलाल सरकार ने ऊर्जा संरक्षण को लेकर भी कई बड़े फैसले लिए हैं। वित्त विभाग के आदेश में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत घरेलू सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसके अलावा सरकारी कार्यालयों में भी सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य बिजली खर्च को कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी भवनों में बड़े स्तर पर सोलर सिस्टम लगाए जाते हैं तो आने वाले वर्षों में बिजली बिलों पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम किया जा सकता है।

राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में भी सुधारात्मक कदम उठाने की घोषणा की है। उर्वरकों के संतुलित और आवश्यकता अनुसार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला किया गया है। सरकार प्राकृतिक, सस्टेनेबल और ऑर्गेनिक खेती को प्रोत्साहित करना चाहती है ताकि किसानों की लागत कम हो सके और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिले। इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इससे पहले शुक्रवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। इनमें राजस्थान पेंशन नियम 1996 में संशोधन भी शामिल है। सरकार ने दिव्यांग बच्चों को राहत देते हुए हर तीन साल में विकलांगता प्रमाण पत्र जमा कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। अब केवल एक बार प्रमाण पत्र देने के बाद पेंशन प्रक्रिया जारी रह सकेगी। इस निर्णय को दिव्यांग परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

इसके अलावा राज्य सरकार ने पेंशनर्स के लिए भी तकनीकी सुविधा बढ़ाई है। अब पेंशनधारक मोबाइल ऐप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का उपयोग कर अपना वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे। इससे बुजुर्ग पेंशनर्स को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी तथा आसान बन सकेगी।

राजस्थान सरकार के इन फैसलों को प्रशासनिक सुधार, वित्तीय अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए विकास कार्यों को गति दी जाए और सरकारी खर्चों में अनावश्यक बढ़ोतरी को रोका जा सके। आने वाले समय में इन निर्णयों का असर प्रशासनिक कार्यप्रणाली, ऊर्जा बचत और सरकारी वित्तीय व्यवस्था पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

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