राजस्थान विधानसभा में बजट पर जारी चर्चा के दौरान भाजपा विधायक अनिता भदेल ने शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलावों का सुझाव देते हुए दो प्रमुख प्रस्ताव रखे। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी स्कूलों में भगवद्गीता का पठन-पाठन शुरू किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ा जा सके। उनके अनुसार गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्यबोध, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का अद्वितीय स्रोत है, जिसे आधुनिक शिक्षा से जोड़ना समय की मांग है।
गीता को शिक्षा का हिस्सा बनाने का तर्क
विधायक भदेल ने अपने तर्क को मजबूत करते हुए कहा कि गीता के अध्ययन से बच्चों में आत्मविश्वास, धैर्य और कर्मप्रधान दृष्टिकोण विकसित होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई राज्यों में ऐसा प्रयास पहले से चल रहा है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने मध्यप्रदेश का जिक्र किया, जहां स्कूली पाठ्यक्रम में गीता के श्लोक और संदेश शामिल किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में भी यह कदम विद्यार्थियों को सकारात्मक दिशा देगा।
पीएम श्री की तर्ज पर राजस्थान में ‘सीएम श्री स्कूल’ की वकालत
अनिता भदेल ने अपने दूसरे बड़े प्रस्ताव में केंद्र सरकार की योजना PM SHRI Schools का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह केंद्र स्तर पर मॉडल स्कूल विकसित किए जा रहे हैं, उसी प्रकार राजस्थान में “सीएम श्री स्कूल” नाम से नई मॉडल स्कूल श्रृंखला शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक आदर्श स्कूल स्थापित किया जाए, जहां आधुनिक सुविधाएं, स्मार्ट क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाएं और उच्च स्तरीय शिक्षण संसाधन उपलब्ध हों।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इन स्कूलों में पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ प्रोफेशनल और कौशल आधारित पाठ्यक्रम जोड़े जाएं, ताकि विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि रोजगार-उन्मुख प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकें। इसके साथ उन्होंने आईटीआई और कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं को इन स्कूलों की परियोजनाओं से जोड़ने और उनके लिए इंटर्नशिप व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। इससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
200 करोड़ रुपये के विशेष प्रावधान की मांग
विधायक भदेल ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि “सीएम श्री स्कूल” योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया जाए। उनका कहना था कि यदि राज्य सरकार इस दिशा में कदम उठाती है, तो शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार संभव होगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान को भी ऐसे मॉडल स्कूलों की आवश्यकता है जो राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा सुविधाओं के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें और विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित करें।


