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Sunroof वाली कार खरीदने से पहले जान लें इसके बड़े नुकसान

Sunroof वाली कार खरीदने से पहले जान लें इसके बड़े नुकसान

मनीषा शर्मा। आज के समय में कार खरीदते वक्त ग्राहकों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। पहले जहां माइलेज और भरोसेमंद इंजन सबसे अहम माने जाते थे, वहीं अब लोग सबसे पहले कार के फीचर्स पर नजर डालते हैं। सनरूफ, जो कभी सिर्फ लग्जरी कारों तक सीमित हुआ करती थी, आज मिड-साइज से लेकर कॉम्पैक्ट SUV तक में आम हो चुकी है। पैनारॉमिक Sunroof  को लेकर खास तौर पर युवाओं में जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि सनरूफ से कार ज्यादा प्रीमियम लगती है और ड्राइविंग का एक्सपीरियंस बेहतर होता है। लेकिन क्या यह फीचर भारत जैसे देश के लिए वाकई सही है? असलियत यह है कि सनरूफ जितनी आकर्षक दिखती है, उतनी ही समस्याएं भी अपने साथ लेकर आती है।

भारत की जलवायु में सनरूफ क्यों बन जाती है परेशानी

भारत में मौसम की स्थिति यूरोप या अमेरिका से बिल्कुल अलग है। यहां साल के ज्यादातर महीने तेज धूप और गर्मी रहती है। सनरूफ का शीशा केबिन के अंदर ज्यादा गर्मी को एब्जॉर्ब करता है, खासकर तब जब सनशेड गलती से खुला रह जाए। इससे कार का इंटीरियर बहुत जल्दी गर्म हो जाता है और एयर कंडीशनर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबे समय तक धूप में खड़ी रहने वाली सनरूफ वाली कार का केबिन इतना गर्म हो सकता है कि अंदर बैठना मुश्किल हो जाए। यही वजह है कि कई लोग कुछ समय बाद सनरूफ का इस्तेमाल करना ही बंद कर देते हैं।

बारिश में लीकेज का खतरा

सनरूफ के साथ सबसे आम शिकायत पानी टपकने की होती है। बारिश या कार वॉश के बाद अगर सनरूफ की रबर बीडिंग या ड्रेन पाइप में जरा सी भी दिक्कत आ जाए, तो पानी केबिन के अंदर आ सकता है। भारत में मानसून के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है। एक बार लीकेज शुरू हो जाए तो कार के अंदर बदबू, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स खराब होने और इंटीरियर डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। इसे ठीक कराना न सिर्फ महंगा होता है, बल्कि बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं।

मेंटेनेंस और सर्विस कॉस्ट बढ़ जाती है

सनरूफ एक मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल सिस्टम है, जिसमें मोटर, रेल, ट्रैक और रबर सील्स शामिल होती हैं। इन सभी पार्ट्स की समय-समय पर सफाई और जांच जरूरी होती है। अगर मेंटेनेंस में थोड़ी भी लापरवाही हुई, तो सनरूफ जाम होने, अजीब आवाज आने या पूरी तरह खराब होने की समस्या सामने आ सकती है। सनरूफ की रिपेयरिंग आमतौर पर सस्ती नहीं होती। मोटर या ग्लास खराब होने की स्थिति में हजारों से लेकर लाखों रुपए तक का खर्च आ सकता है, जो लंबे समय में आपकी जेब पर भारी पड़ता है।

धूल, हवा और शोर की समस्या

हाईवे पर या तेज रफ्तार में सनरूफ खोलने पर हवा का शोर काफी बढ़ जाता है। शहरों में जहां पहले से ही प्रदूषण और धूल ज्यादा होती है, वहां सनरूफ खोलने से गंदगी सीधे केबिन के अंदर आ सकती है। यह अनुभव कुछ देर के लिए तो अच्छा लग सकता है, लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में यह असुविधाजनक साबित होता है। इसी वजह से कई लोग सनरूफ का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं।

सुरक्षा से जुड़े जोखिम

सनरूफ से जुड़ा एक बड़ा सवाल सुरक्षा का भी है। सड़क पर उड़ते पत्थर, गलत तरीके से की गई मॉडिफिकेशन या किसी हादसे की स्थिति में सनरूफ का शीशा टूटने का खतरा रहता है। ऊपर की तरफ लगा ग्लास एक कमजोर पॉइंट बन जाता है। इसके अलावा, चोरी और वेंडलिज्म की आशंका भी रहती है। कुछ इलाकों में चोर ऊपर के शीशे को तोड़कर कार में घुसने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे नुकसान और बढ़ जाता है।

हेडरूम और माइलेज पर असर

सनरूफ मैकेनिज्म की वजह से कार की छत के अंदर जगह कम हो जाती है। इसका असर खास तौर पर लंबे कद वाले यात्रियों पर पड़ता है, जिन्हें पीछे बैठने में दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा, सनरूफ सिस्टम कार के वजन को थोड़ा बढ़ा देता है। यह असर बहुत बड़ा नहीं होता, लेकिन माइलेज और परफॉर्मेंस पर हल्का-सा नकारात्मक प्रभाव जरूर डालता है।

कब सनरूफ आपके लिए गलत डील साबित हो सकती है

अगर आपकी कार ज्यादातर समय खुले में या धूप वाले शहरों में खड़ी रहती है, तो सनरूफ के कारण केबिन ज्यादा गर्म होगा। ज्यादा बारिश वाले इलाकों में रहने वालों के लिए लीकेज और सीलिंग की समस्या बढ़ सकती है। वहीं, अगर आप कार को 7 से 10 साल तक रखने की सोच रहे हैं, तो सनरूफ के पार्ट्स का बूढ़ा होना भविष्य में एक बड़ा खर्च बन सकता है।

फिर भी लोग सनरूफ क्यों पसंद करते हैं

इन तमाम नुकसानों के बावजूद सनरूफ के कुछ फायदे भी हैं। इससे केबिन में नैचुरल लाइट आती है और कार ज्यादा खुली व प्रीमियम महसूस होती है। ठंडे मौसम या पहाड़ी इलाकों में यह फीचर वेंटिलेशन और ड्राइविंग एक्सपीरियंस को बेहतर बना देता है। रीसेल मार्केट में भी कुछ खरीदार सनरूफ वाली कार को प्राथमिकता देते हैं।

क्या आपको सनरूफ वाली कार खरीदनी चाहिए

अगर आप सिर्फ लुक्स और ट्रेंड के कारण सनरूफ लेना चाहते हैं, तो एक बार फिर सोचने की जरूरत है। भारत की परिस्थितियों में सनरूफ एक जरूरत नहीं, बल्कि एक दिखावटी फीचर बन चुका है। बेहतर यही होगा कि कार खरीदते समय सेफ्टी फीचर्स, माइलेज, इंजन की विश्वसनीयता और सर्विस नेटवर्क पर ज्यादा ध्यान दिया जाए।

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