शोभना शर्मा। राजस्थान के जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी के एक बयान ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र के देवला में आयोजित एकलव्य आवासीय विद्यालय के भवन निर्माण शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने भारत आदिवासी पार्टी (BAP) पर तीखा verbal हमला बोला। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि “बीएपी वालों को सिर पर मत चढ़ाओ।”
इस बयान के बाहर आते ही राजनीतिक तापमान बढ़ गया और बीएपी ने पलटवार करते हुए मंत्री के इस्तीफे की मांग कर दी।
बीएपी जिला अध्यक्ष का तीखा पलटवार
बीएपी के जिला अध्यक्ष अमित खराड़ी ने मंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बाबूलाल खराड़ी ने स्कूल के बच्चों के कार्यक्रम में धर्म से जोड़कर बातें कीं, जो मंत्री पद पर रहते हुए अनुचित हैं।
बीएपी नेता का कहना है कि यदि मंत्री को धर्म पर भाषण देना ही पसंद है तो उन्हें सरकार में रहकर जिम्मेदारियों से भागने की बजाय “मंत्री पद छोड़कर धर्मगुरु बन जाना चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि जनजाति विभाग में कई अनियमितताएं और घोटाले हो रहे हैं, लेकिन मंत्री उनकी जवाबदेही से बचते हैं। बीएपी नेता ने कहा कि
जनजाति हॉस्टलों में मसाले की खरीद में घोटाले,
हैंडपंपों की मरम्मत और स्थापना में अनियमितताएं
लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन मंत्री इन मुद्दों पर जवाब देने की जगह धर्म से जुड़े बयान देने लगते हैं।
मंत्री का विवादित सवाल: “आदिवासी हिंदू नहीं तो कौन है?”
गोगुंदा के कार्यक्रम में बाबूलाल खराड़ी ने कहा था कि बीएपी बार-बार यह कहती है कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं।
उन्होंने मंच से उपस्थित जनता की ओर देखते हुए सवाल किया—
“ये कहते है कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं। तो आप बताओ, आप पुरखों की पूजा करते हैं या नहीं? मंदिर जाते हैं या नहीं? यदि मंदिर में नहीं जाना, तो फिर कहां जाओगे?”
इस बयान को बीएपी ने समुदाय को धार्मिक आधार पर बांटने वाला बताया और कहा कि मंत्री आदिवासी समाज की असल समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं।
राजस्थान की राजनीति में बढ़ी गरमाहट
बाबूलाल खराड़ी का बयान ऐसे समय पर आया है जब राजस्थान में आदिवासी राजनीति लगातार मजबूत हो रही है। बीएपी आदिवासी क्षेत्रों में तेजी से अपना जनाधार बढ़ा रही है और बीजेपी-कांग्रेस दोनों की राजनीति को चुनौती दे रही है।
ऐसे माहौल में मंत्री का यह बयान एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
बीएपी नेताओं का कहना है कि सरकार को आदिवासी समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य और निवास सुविधाओं पर काam करना चाहिए, न कि धार्मिक बहस छेड़नी चाहिए।
वहीं सत्तारूढ़ दल के समर्थकों का कहना है कि बाबूलाल खराड़ी ने सिर्फ वास्तविकता सामने रखी है और बीएपी अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है बहस
फिलहाल मंत्री ने अपने बयान पर कोई सफाई नहीं दी है, लेकिन बीएपी लगातार दबाव बनाने में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि यह विवाद राजस्थान की आदिवासी राजनीति को आने वाले दिनों में और गर्मा सकता है।


