मनीषा शर्मा। राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा क्षेत्र में बन रही देश की सबसे महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी 24 अगस्त (रविवार) को इस परियोजना का निरीक्षण करेंगे। दोनों नेता निर्माणाधीन रिफाइनरी का विजिट करने के साथ अधिकारियों और एचपीसीएल कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे।
12 साल से अधूरी पड़ी परियोजना
यह रिफाइनरी परियोजना साल 2013 में शुरू हुई थी और दावा किया गया था कि वर्ष 2025 तक इसका काम पूरा हो जाएगा। लेकिन 12 साल बाद भी यह पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई है। अब तक लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। परियोजना में लगातार हो रही देरी ने इसकी लागत को दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा दिया है।
साल 2013 में जब यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने रिफाइनरी का शिलान्यास किया था, उस समय इसकी अनुमानित लागत 37 हजार करोड़ रुपये थी। लेकिन वर्षों में बार-बार हुई देरी और लागत बढ़ोतरी की वजह से 2024 तक इसकी कीमत 72 हजार करोड़ रुपये तक पहुँच गई और अब संभावना है कि यह 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी।
अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित रिफाइनरी
यह रिफाइनरी बीएस-6 मानक पर आधारित होगी, जो पर्यावरण के लिहाज से सबसे उन्नत फ्यूल मानक है। राजस्थान सरकार और एचपीसीएल (हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) की संयुक्त कंपनी HPCL Rajasthan Refinery Limited (HRRL) इस परियोजना को तैयार कर रही है। यहां प्रतिवर्ष 9 मिलियन टन उत्पादन क्षमता रखी गई है।
रिफाइनरी के विभिन्न इकाइयों का काम लगभग अंतिम चरण में है। क्रूड/वैक्यूम डिस्टिलेशन यूनिट और डिलेड कॉकर यूनिट का लगभग 95.5 प्रतिशत काम हो चुका है। हाइड्रोजन जनरेशन यूनिट और डीजल हाइड्रोजन यूनिट का काम 98.7 प्रतिशत से ज्यादा पूरा हो गया है। वहीं, VGO-HDT यूनिट समेत अन्य कई महत्वपूर्ण इकाइयों का कार्य 95.3 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।
10 प्रोसेस इकाइयों में 98 प्रतिशत तक कार्य पूरा
18 जुलाई को जयपुर में खान विभाग की बैठक में दी गई रिपोर्ट के अनुसार रिफाइनरी की 10 प्रमुख प्रोसेस इकाइयों का लगभग 94 से 98 प्रतिशत तक कार्य हो चुका है। परियोजना क्षेत्र में कुल 87.9 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। सल्फर रिकवरी यूनिट (SRU) का काम 96.9 प्रतिशत तक पहुँचा है। हालांकि, इस यूनिट में क्रूड ऑयल से सल्फर को अलग करने का कार्य जटिल और समय लेने वाला है, जिसके कारण इसमें अपेक्षाकृत अधिक समय लग रहा है।
समय और लागत की बढ़ती चुनौती
पचपदरा में 4567 एकड़ भूमि पर बन रही यह रिफाइनरी राजस्थान के औद्योगिक विकास की रीढ़ मानी जा रही है। लेकिन समय पर काम पूरा न होने के कारण इसकी लागत लगातार बढ़ती गई है। 2013 में 37 हजार करोड़ से शुरू हुई लागत 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दोबारा शिलान्यास किए जाने तक 43 हजार करोड़ हो गई थी। इसके बाद 2022 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन यह समयसीमा भी निकल गई।
2024 तक इसकी लागत 72 हजार करोड़ तक पहुँच चुकी है और अब अनुमान है कि जब तक यह पूरी तरह तैयार होगी, तब तक लागत 90 हजार करोड़ रुपये से ऊपर जा सकती है। यह परियोजना देश की सबसे महंगी रिफाइनरियों में गिनी जाएगी।
2025 तक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद
वर्तमान स्थिति को देखते हुए अधिकारियों का कहना है कि मार्च-अप्रैल 2025 तक रिफाइनरी की यूनिटें पूरी तरह तैयार हो जाएंगी और उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी जनवरी में अपने दौरे के दौरान एचपीसीएल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा कर लिया जाए। अब केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का दौरा इस परियोजना की प्रगति की निगरानी और शेष कार्यों में तेजी लाने के दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है।
राजस्थान के लिए महत्व
यह रिफाइनरी न केवल राजस्थान की अर्थव्यवस्था को गति देगी बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगी। पेट्रोकेमिकल और संबंधित उद्योगों के विकास से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी। साथ ही, राजस्थान ऊर्जा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाएगा।


