पूर्व विधायक बलजीत यादव को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जयपुर क्षेत्रीय इकाई ने रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद शनिवार को जयपुर की विशेष अदालत में पेश किया। यह सुनवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत, CBI कोर्ट संख्या-3 में हुई। अदालत की अध्यक्षता न्यायाधीश खगेन्द्र कुमार शर्मा ने की। ED की ओर से पूर्व विधायक को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की गई। एजेंसी का कहना था कि रिमांड के दौरान पूछताछ पूरी हो चुकी है और आगे की जांच के लिए न्यायिक हिरासत जरूरी है।
केस डायरी को लेकर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने ED से केस डायरी पेश करने के निर्देश दिए। हालांकि मौके पर केस डायरी उपलब्ध नहीं हो सकी। ED की ओर से यह जानकारी कोर्ट को दी गई कि केस डायरी तत्काल उपलब्ध नहीं है। इस पर न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए केस डायरी मंगवाने के आदेश दिए। लंच से पहले और लंच के बाद चली लंबी सुनवाई में कोर्ट ने जांच की प्रगति और रिमांड के दौरान हुई पूछताछ को लेकर ED से सवाल किए।
गिरफ्तारी को बताया अवैध और गैरकानूनी
लंच के बाद की सुनवाई में पूर्व विधायक बलजीत यादव की ओर से गिरफ्तारी को अवैध और गैरकानूनी बताया गया। उनके वकीलों ने दलील दी कि यादव ने हर समन का समय पर जवाब दिया और जांच में पूरा सहयोग किया। इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार किया गया, जो कानून के विपरीत है। बलजीत यादव ने खुद अदालत में कहा कि उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके किसी भी बैंक खाते में कोई पैसा नहीं आया है, फिर भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
“मुझे विलेन बनाने के लिए गिरफ्तार किया गया”
कोर्ट में बयान देते हुए बलजीत यादव ने कहा कि विधायक का इस तरह के मामलों में सीधा रोल नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें उनके विधानसभा क्षेत्र से जानबूझकर गिरफ्तार किया गया, ताकि बखेड़ा खड़ा किया जा सके और उन्हें एक विलेन की तरह पेश किया जाए। उन्होंने कहा, “मैंने हर समन का जवाब दिया है। मेरे खाते में कोई पैसा नहीं आया। इसके बावजूद मुझे गिरफ्तार किया गया। मुझे फंसाया जा रहा है।”
कोर्ट परिसर में नारेबाजी पर सफाई
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में हुई नारेबाजी को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। न्यायाधीश ने इस पर नाराजगी जताई और पूर्व विधायक से जवाब मांगा। इस पर बलजीत यादव ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि नारेबाजी किसने की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अदालत का पूरा सम्मान करते हैं और जिन्होंने ऐसा किया, उन्होंने जानबूझकर परेशानी बढ़ाई। यादव ने कहा कि वे अपने समर्थकों को समझाने की कोशिश करेंगे, ताकि आगे इस तरह की स्थिति न बने।
कोर्ट का फैसला: न्यायिक हिरासत
लंबी बहस और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत ने पूर्व विधायक बलजीत यादव को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी को चुनौती देने के मामले में ED को 9 फरवरी को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इस केस में अगली सुनवाई 10 फरवरी को निर्धारित की गई है। तब तक बलजीत यादव न्यायिक हिरासत में रहेंगे।
क्या है पूरा मामला
यह मामला वर्ष 2022-23 का है, जब बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र में विधायक कोष से क्रिकेट और बैडमिंटन किट की खरीद की गई थी। आरोप है कि बलजीत यादव और उनके सहयोगियों की कंपनियों के जरिए खेल सामग्री की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों का दावा है कि विधायक फंड में हेरफेर कर करीब 2.50 गुना अधिक कीमत पर खेल सामग्री खरीदी गई, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ।
32 स्कूलों को दी गई थी खेल सामग्री
जांच के अनुसार इस योजना के तहत कुल 32 सरकारी स्कूलों को खेल सामग्री दी गई थी। प्रत्येक स्कूल के लिए लगभग 9 लाख रुपये का खेल सामान खरीदा गया। आरोप है कि क्रिकेट बैट जैसी वस्तुओं की कीमत बाजार दर से कहीं अधिक दिखाई गई। दावा किया गया कि कुछ क्रिकेट बैट की कीमत 15,600 रुपये तक बताई गई थी और कई स्कूलों को 50-50 बैट दिए गए। जांच एजेंसियों को शक है कि कीमतें जानबूझकर बढ़ाकर दिखाई गईं।
पहले ACB, फिर ED की एंट्री
इस घोटाले को लेकर पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मामला दर्ज किया था। इसमें बलजीत यादव समेत 8 अधिकारी और कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया गया था। बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल सामने आने पर प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA के तहत जांच शुरू की और केस अपने हाथ में लिया। अब ED इस मामले में पैसों के लेन-देन और मनी ट्रेल की गहराई से जांच कर रही है।


