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बाबा रामदेव का वार्षिक मेला अजमेर-नागौर बॉर्डर पर 25 अगस्त से सजेगा

बाबा रामदेव का वार्षिक मेला अजमेर-नागौर बॉर्डर पर 25 अगस्त से सजेगा

मनीषा शर्मा, अजमेर।  राजस्थान की धरती पर आस्था और सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा प्रतीक माने जाने वाले लोकदेवता बाबा रामदेव का वार्षिक मेला इस बार 25 अगस्त को अजमेर और नागौर की सीमा पर बसे खुंडियास गांव में आयोजित होगा। यह स्थान अजमेर जिले की पुष्कर विधानसभा क्षेत्र और नागौर जिले के परबतसर इलाके की सीमाओं के बीच स्थित है। यहां बाबा रामदेव का मंदिर स्थित है, जिसे स्थानीय लोग “मिनी रामदेवरा” के नाम से जानते हैं। हर साल की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु यहां आकर बाबा की चौखट पर मत्था टेकेंगे और अपने कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करेंगे।

मिनी रामदेवरा की बढ़ती आस्था

खुंडियास गांव किशनगढ़ से करीब 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां का बाबा रामदेव मंदिर भक्तों के लिए उतना ही पवित्र माना जाता है जितना जैसलमेर का प्रसिद्ध रामदेवरा धाम। जिन श्रद्धालुओं को किसी कारणवश रामदेवरा तक पहुंचना संभव नहीं होता, वे मिनी रामदेवरा यानी खुंडियास मंदिर पहुंचकर बाबा रामसा पीर को धोक लगाते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से वही पुण्यफल मिलता है जो रामदेवरा में दर्शन करने से प्राप्त होता है।

इतिहास और चमत्कार की गाथा

करीब 40 साल पहले बाबा रामदेव ने जैसलमेर से चलकर अजमेर-नागौर बॉर्डर के इस खुंडियास गांव में अपने एक भक्त को दर्शन दिए थे। तब से यहां बाबा का यह मंदिर चमत्कारिक स्थल बन गया। खास बात यह है कि मंदिर के गर्भगृह में स्थापित बाबा रामदेव की अश्वारूढ़ मूर्ति आधी अजमेर जिले में और आधी नागौर जिले में स्थित है। यह अनोखा दृश्य बाबा की सामाजिक समरसता और सीमाओं से परे एकता का प्रतीक है। इसी स्थान पर दो ग्राम पंचायतों और दो पुलिस थानों की सीमाएं मिलती हैं, जिससे यह जगह और भी खास बन जाती है।

मेले की तैयारियां और उत्सव का माहौल

25 अगस्त को भरने वाले मेले की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में बाबा रामदेव की ध्वजाएं लहराने लगी हैं। गांव की गलियों और मुख्य मार्गों पर भक्तों की आवाजाही ने पहले ही मेले का रंग जमा दिया है। श्रद्धालु दूर-दराज से यहां पहुंच रहे हैं, वहीं व्यापारियों के चेहरे भी खिले हुए हैं क्योंकि मेले में सैकड़ों दुकानें सज चुकी हैं।

मेला समिति की बैठक हाल ही में आयोजित हुई, जिसमें अध्यक्ष रामलाल बजाड़, उपाध्यक्ष भंवर सिंह, कोषाध्यक्ष नटवर सिंह, मंत्री अणदा राम सीमार, पूर्व अध्यक्ष रामकरण सीमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। बैठक में मेले के सफल आयोजन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर चर्चा की गई।

भक्तों की उमंग और श्रद्धा

राजस्थान के विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालु बाबा के दरबार में मत्था टेकने आ रहे हैं। मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की गई है ताकि वे लाइन में लगकर बाबा रामदेव के दर्शन-पूजन कर सकें। मेले में आस्था का ऐसा उत्साह देखने को मिलता है जिसमें हर वर्ग और हर जाति के लोग बिना भेदभाव के शामिल होते हैं। यही कारण है कि बाबा रामदेव को सामाजिक समरसता का प्रणेता कहा जाता है।

सुरक्षा और व्यवस्थाएं

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया गया है ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। वहीं, मंदिर परिसर की व्यवस्था बाबा रामदेव सेवा समिति देख रही है। मेले के दौरान स्वच्छता और यातायात प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

आस्था का संगम और आर्थिक संबल

इस वार्षिक मेले का धार्मिक महत्व तो है ही, साथ ही यह स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों के लिए आर्थिक संबल भी बनता है। मेले में लगने वाली सैकड़ों दुकानों पर खाने-पीने से लेकर धार्मिक वस्तुएं और घरेलू सामान उपलब्ध होता है। इस दौरान व्यापारियों को अच्छा कारोबार मिलता है, जिससे उनके जीवनयापन में सहारा मिलता है।

आस्था का अनूठा पर्व

मिनी रामदेवरा खुंडियास का यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था, विश्वास, सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु के लिए यह अनुभव अविस्मरणीय होता है। बाबा रामदेव की कृपा पाने की चाहत में लोग सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचते हैं और अपने जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

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