शोभना शर्मा। राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल सम्बल योजना दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आई है। ऐसे कई परिवार जिनके बच्चे लंबे समय से गंभीर और महंगे इलाज वाली बीमारियों से पीड़ित हैं, आर्थिक तंगी के कारण उपचार जारी नहीं रख पा रहे थे। सरकार की इस नई पहल ने उन्हें उपचार का भरोसा दिया है और बच्चों को जीवन का नया अवसर प्रदान किया है।
50 लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा
इस योजना के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चों को 50 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार प्रदान किया जाएगा, जिन्हें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय नीति 2021 में सूचीबद्ध दुर्लभ बीमारियों में से कोई बीमारी है।
इतना ही नहीं, उपचार अवधि के दौरान परिवार की दैनिक आवश्यकताओं का भार कम करने के लिए सरकार की ओर से लाभार्थी परिवार को 5,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। यह सहायता उन परिवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो इलाज के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में संघर्ष कर रहे होते हैं।
योजना का उद्देश्य—कोई भी बच्चा इलाज से वंचित न रहे
मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल सम्बल योजना का प्रमुख लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राजस्थान में कोई भी बच्चा केवल आर्थिक अभाव के कारण इलाज से वंचित न रह जाए।
सरकार ने प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सरल बनाया है ताकि जरूरतमंद परिवार बिना किसी जटिलता के योजना का लाभ आसानी से उठा सकें। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है, जिससे ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों के परिवार इस सुविधा तक आसानी से पहुँच सकते हैं।
पात्रता—कौन ले सकता है लाभ?
इस योजना के लाभ के लिए बच्चे की आयु 18 वर्ष से कम होना अनिवार्य है।
इसके साथ ही बच्चा राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए या कम से कम तीन वर्षों से राज्य में निवासरत होना चाहिए।
परिवार ऑनलाइन आवेदन ई-मित्र केंद्र या अपनी एसएसओ आईडी के माध्यम से कर सकते हैं। आवेदन में जनाधार नंबर का उपयोग अनिवार्य रखा गया है, जिससे सत्यापन की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
दुर्लभ बीमारी की पुष्टि के बाद मिलेगी सहायता
योजना की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया दुर्लभ बीमारी की पुष्टि है। इसके लिए सरकार ने दो प्रमुख संस्थानों—एम्स जोधपुर और जेके लोन अस्पताल, जयपुर को अधिकृत किया है।
इन संस्थानों के चिकित्सा अधिकारी बीमारी की पुष्टि करने के बाद ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी करेंगे। प्रमाण पत्र जारी होने के बाद ही उपचार और आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाएगी।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक और योग्य लाभार्थी ही योजना का लाभ प्राप्त करें।
सामाजिक संवेदना का उदाहरण
आयुष्मान बाल सम्बल योजना सिर्फ एक चिकित्सा सहायता योजना नहीं, बल्कि राजस्थान सरकार की सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय सोच का प्रतीक है।
दुर्लभ बीमारियों के उपचार में आने वाली भारी आर्थिक लागत को देखते हुए यह पहल हजारों परिवारों के लिए जीवनरेखा साबित हो सकती है।


