ब्लॉग्स

नकली खाद से बचें: घर पर ही ऐसे करें असली यूरिया, डीएपी, पोटाश और जिंक सल्फेट की पहचान

नकली खाद से बचें: घर पर ही ऐसे करें असली यूरिया, डीएपी, पोटाश और जिंक सल्फेट की पहचान

शोभना शर्मा।  खेती में खाद और उर्वरक फसल उत्पादन की रीढ़ माने जाते हैं। लेकिन इन दिनों बाजार में नकली खादों की भरमार ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नकली खाद न केवल फसल की गुणवत्ता पर असर डालती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी नष्ट कर देती है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि असली और नकली खाद की पहचान घर पर ही कैसे की जा सकती है।

सहायक कृषि अधिकारी पिंटू मीना (गंगापुरसिटी) के अनुसार, “किसानों को हमेशा सरकार के अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदना चाहिए और दुकानदार से पक्का बिल अवश्य लेना चाहिए। यदि किसी खाद में मिलावट या खराबी मिले तो तुरंत कृषि विभाग में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।” अब जानते हैं कि अलग-अलग प्रमुख खादों — यूरिया, डीएपी, पोटाश, जिंक सल्फेट और सिंगल सुपर फॉस्फेट — की पहचान कैसे की जाए।

1. यूरिया की पहचान कैसे करें

यूरिया खेती में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली खाद है। असली यूरिया के दाने सफेद, गोल और समान आकार के होते हैं। इसकी जांच का तरीका बहुत सरल है:

  • एक गिलास पानी में कुछ यूरिया के दाने डालें और उसे हिलाएं।

  • यदि यूरिया पूरी तरह से पानी में घुल जाए, तो यह असली है।

  • अब पानी को छूकर देखें, अगर वह ठंडा महसूस हो, तो समझिए कि यूरिया शुद्ध और असली है।

नकली यूरिया आमतौर पर पानी में पूरी तरह नहीं घुलता और घुलने के बाद पानी का तापमान नहीं बदलता।

2. डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) की पहचान कैसे करें

डीएपी का उपयोग फसल को शुरुआती पोषण देने के लिए किया जाता है। असली डीएपी के दाने कंकर जैसे अनियमित आकार के होते हैं, जबकि नकली डीएपी के दाने अक्सर एक जैसे और चिकने दिखते हैं। इसकी पहचान के दो मुख्य तरीके हैं:

  • पहला तरीका: डीएपी के दानों को हथेली में लेकर उनमें थोड़ा चूना मिलाएं और तंबाकू की तरह रगड़ें। अगर तेज गंध आती है, तो डीएपी असली है।

  • दूसरा तरीका: कुछ दानों को तवे पर गर्म करें। असली डीएपी के दाने गर्म होने पर फूल जाते हैं, जबकि नकली डीएपी के दाने ऐसे नहीं करते।

असली डीएपी हमेशा हल्के भूरे या काले रंग की होती है और इसकी सतह पर हल्की नमी रहती है।

3. पोटाश (Muriate of Potash) की पहचान कैसे करें

पोटाश पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व पोटेशियम का प्रमुख स्रोत है। असली पोटाश की पहचान उसके लाल या सफेद दानों से होती है, जो नमक और लाल मिर्च के मिश्रण जैसे दिखते हैं। पोटाश की असलियत जांचने के तरीके: असली पोटाश के दाने नमी लगने पर आपस में नहीं चिपकते। पोटाश में थोड़ा पानी मिलाएं। यदि इसमें उपस्थित लाल दाने पानी की सतह पर तैरने लगें, तो यह असली पोटाश है। नकली पोटाश में पानी डालने पर लाल दाने नीचे बैठ जाते हैं या एक साथ चिपक जाते हैं।

4. जिंक सल्फेट (Zinc Sulphate) की पहचान कैसे करें

जिंक सल्फेट पौधों में जिंक की कमी दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। असली जिंक सल्फेट हल्के सफेद या पीले-भूरे रंग का होता है। इसकी पहचान के लिए — थोड़ा डीएपी का घोल बनाएं और उसमें जिंक सल्फेट मिलाएं। अगर घोल गाढ़ा होकर सफेद अवशेष (थक्का) बना दे, तो जिंक सल्फेट असली है। अगर कोई अवशेष नहीं बनता और घोल वैसा ही बना रहता है, तो यह मिलावटी या नकली हो सकता है। जिंक सल्फेट को नमी से बचाकर रखना जरूरी है, क्योंकि गीला होने पर यह अपनी प्रभावशीलता खो देता है।

5. सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) की पहचान कैसे करें

सिंगल सुपर फॉस्फेट का उपयोग मिट्टी में फॉस्फोरस की कमी दूर करने के लिए किया जाता है। असली SSP के दाने सख्त, ठोस और भूरे-काले-बादामी रंग के होते हैं। इन दानों को नाखूनों या किसी कील से आसानी से नहीं तोड़ा जा सकता। जब इन्हें गर्म किया जाता है, तो ये फूलते नहीं हैं, जबकि नकली SSP के दाने गर्म होने पर फैल जाते हैं या पिघलने लगते हैं। असली SSP की बनावट ठोस होती है और उसमें मिट्टी या पाउडर जैसा पदार्थ नहीं दिखता।

नकली खाद से होने वाले नुकसान

नकली खाद न केवल फसल की पैदावार को कम करती है बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी खराब करती है। इसके लगातार उपयोग से — मिट्टी की उर्वरता घटती है, पौधों में पोषक तत्वों की कमी होती है, और उत्पादन लागत बढ़ जाती है। लंबे समय में इसका असर किसान की आर्थिक स्थिति और खेत की उपजाऊ शक्ति दोनों पर पड़ता है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

सहायक कृषि अधिकारी पिंटू मीना का कहना है कि किसान केवल सरकारी अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें। खरीदते समय दुकान का लाइसेंस नंबर देखें, पक्का बिल लें, और बैग पर दिए ब्रांड, निर्माण तिथि और बैच नंबर की जांच करें। यदि खरीदी गई खाद संदिग्ध लगे या उसकी गुणवत्ता पर शक हो, तो किसान तुरंत कृषि विभाग या जिला उर्वरक नियंत्रण अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

खाद की शुद्धता पहचानना किसान के हित में सबसे जरूरी कदम है। नकली खाद से बचाव के लिए थोड़ी सतर्कता और जानकारी काफी है। असली यूरिया, डीएपी, पोटाश, जिंक सल्फेट और SSP की पहचान अब मुश्किल नहीं — बस थोड़ी जांच और सावधानी से किसान अपनी फसल और मेहनत दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading