मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति एक बार फिर तीखी जुबानी जंग के दौर में पहुंच गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के अस्तित्व और उसकी स्थिरता पर सवाल उठाए। गहलोत ने संकेत दिया कि मौजूदा सरकार जनता के मुद्दों पर प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पा रही है और शासन-प्रशासन में समन्वय की कमी दिखाई देती है। उनके इस बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में हलचल बढ़ गई, क्योंकि भाजपा की ओर से यह बयान सीधे सरकार को चुनौती की तरह देखा गया।
इन आरोपों पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने तत्काल और तीखा पलटवार किया। अविनाश गहलोत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को शायद सरकार केवल तभी दिखाई देती है, जब किसी शासन में खींचतान हो, सत्ता संघर्ष हो या फिर विधायकों की बाड़ेबंदी की नौबत आ जाए। उन्होंने साफ कहा कि भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार का आंतरिक मतभेद नहीं है।
अविनाश गहलोत ने अपने बयान में कांग्रेस शासनकाल के वे तीन बड़े राजनीतिक उलटफेर भी याद दिलाए, जिनकी चर्चा आज भी राजस्थान की राजनीतिक इतिहास में होती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद अशोक गहलोत की नजर में वही समय सही मायने में ‘सरकार’ वाला समय था, क्योंकि उस दौर में लगातार राजनीतिक संकट और खींचतान से राज्य का प्रशासनिक संतुलन बिगड़ गया था।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल को भुला चुके हैं, जब उन्होंने स्वयं राजभवन को लेकर ‘गिरने’ शब्द का उपयोग किया था। यह बयान सीधे तौर पर राज्यपाल पर दबाव बनाने जैसा था और उस वक्त पूरा राज्य राजनीतिक अस्थिरता के माहौल में घिर गया था। अविनाश गहलोत ने कहा कि यह कहना सही होगा कि कांग्रेस शासन के दौरान प्रशासन से ज्यादा समय राजनीतिक खींचतान को संभालने में व्यतीत हुआ।
इसके बाद अविनाश गहलोत ने सबसे बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र किया, जब कांग्रेस के भीतर दो धड़ों के बीच टकराव सार्वजनिक रूप से सामने आ गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने-अपने गुटों के विधायकों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर कैंप कर रहे थे। उस समय राजनीतिक अस्थिरता चरम पर थी और राज्य की पूरी कार्यप्रणाली कानून व्यवस्था तथा सरकारी प्रशासन की बजाय “विधायक किस होटल में हैं” जैसे सवालों पर टिकी हुई थी।
मंत्री ने कहा कि उस संकट के दौरान कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक के लिए पर्यवेक्षक के रूप में आए मल्लिकार्जुन खरगे सीएम हाउस पर इंतजार करते रहे, जबकि शांति धारीवाल और गहलोत समर्थक विधायकों का बड़ा समूह अपने ही उपमुख्यमंत्री और पार्टी के उच्च नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी करते हुए अलग बैठा रहा। उस समय सरकार की स्थिति ऐसी थी कि किसी भी क्षण बड़ा राजनीतिक उलटफेर हो सकता था। अविनाश गहलोत ने इन घटनाओं को याद दिलाते हुए कहा कि अगर अशोक गहलोत सरकार की परिभाषा देने की कोशिश कर रहे हैं, तो शायद उनके लिए वही परिस्थितियाँ ‘सरकार’ कहलाती होंगी।
वहीं अविनाश गहलोत ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य की तुलना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार पूरी तरह स्थिर, दृढ़ और एकजुट है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान, बुनियादी ढांचे में सुधार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार और राज्य को विकास के नए मार्ग पर ले जाना है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस काल के विपरीत, वर्तमान सरकार न तो किसी आंतरिक खींचतान से जूझ रही है और न ही किसी प्रकार की राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सीएम अशोक गहलोत द्वारा सरकार पर सवाल उठाना जनता को भ्रमित करने की कोशिश है, जबकि वास्तविकता यह है कि भाजपा सरकार जमीन पर काम कर रही है। मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण निर्णय लेकर प्रदेश के विकास का खाका तैयार किया है और आने वाले समय में इन प्रयासों के स्पष्ट परिणाम दिखाई देंगे।


