महात्मा ज्योतिबा राव फुले की जयंती के अवसर पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम राजनीतिक रूप से काफी गर्म रहा, जहां राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। इस कार्यक्रम में दिए गए उनके बयान ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप के दौर को तेज कर दिया है।
अविनाश गहलोत ने अपने संबोधन में कहा कि कोविड काल के दौरान कांग्रेस सरकार ने सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया और उस दौरान जो खर्च हुआ, उसका जवाब आज तक विपक्ष नहीं दे पाया है। उन्होंने टीकाराम जूली को सीधे तौर पर निशाने पर लेते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं के पास इन सवालों का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। उनके अनुसार, राजस्थान में कांग्रेस के शासनकाल के दौरान “खर्च की सरकार” चली, जिसमें बिना सोच-समझ के जनता के पैसे का इस्तेमाल किया गया।
मंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय केवल योजनाओं के नाम पर खर्च नहीं हुआ, बल्कि व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार भी हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान कार्यकर्ता से लेकर मंत्री तक भ्रष्टाचार में लिप्त थे और यही कारण था कि जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्तमान भाजपा सरकार ने केवल एक साल के भीतर केंद्र से सवा लाख करोड़ रुपये प्रदेश के विकास के लिए लाए हैं, जो सरकार की गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अविनाश गहलोत ने कोविड काल को लेकर और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय “अय्याशी” और अनियमितताओं का दौर चला, जिसमें जनता के टैक्स के पैसे का गलत उपयोग किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में भ्रष्टाचार की खुली लूट मची हुई थी और कई मामलों में कार्रवाई भी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कुछ मंत्रियों और अधिकारियों को जेल तक जाना पड़ा, जो उस समय की स्थिति को स्पष्ट करता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अभी और भी लोग जांच के दायरे में आ सकते हैं।
मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि जिस सरकार के मुख्यमंत्री के सामने ही उनके मंत्रियों पर पैसे लेने के आरोप लग जाएं, वह सरकार नैतिक रूप से कमजोर होती है और जनता के विश्वास को खो देती है। उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को इसी संदर्भ में घेरते हुए कहा कि उस समय प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव था।
इस दौरान अविनाश गहलोत ने पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का भी जिक्र किया और कांग्रेस पर इसे जानबूझकर रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी से इस परियोजना का शिलान्यास करवाया गया, जबकि उस समय वह किसी सरकारी पद पर नहीं थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई और इसे वर्षों तक लंबित रखा।
उन्होंने कहा कि बाद में वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस परियोजना को गति दी और इसके लिए लगभग 38 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया और इसे पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। अब यह परियोजना करीब 80 हजार करोड़ रुपये की हो चुकी है और इसके पूरा होने से राजस्थान के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
अविनाश गहलोत ने यह भी कहा कि इस रिफाइनरी परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से किया जाएगा, जिससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इसे भाजपा सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह परियोजना राजस्थान के भविष्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि फुले जयंती जैसे सामाजिक अवसर पर भी राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर रही। भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला प्रदेश की राजनीति में लगातार जारी है और आने वाले समय में इसके और तेज होने की संभावना है।


