जयपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण उद्योगिक पहल के तहत फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) द्वारा “व्यापार राजस्थान” नामक वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यभर के ऑटोमोबाइल डीलर्स, बैंकिंग विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। यह आयोजन जयपुर मैरियट होटल में हुआ, जहां ऑटोमोबाइल सेक्टर के भविष्य, तकनीकी बदलावों और मौजूदा चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई। इस वर्कशॉप का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग और उसके जरिए सेक्टर में आने वाले बदलावों पर रहा।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाले दो वर्षों में ऑटोमोबाइल सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दखल तेजी से बढ़ेगा, खासकर व्हीकल फाइनेंस से जुड़े क्षेत्रों में। AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि AI की मदद से लोन अप्रूवल, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और क्रेडिट असेसमेंट जैसे प्रोसेस बेहद तेज और आसान हो जाएंगे। इससे ग्राहकों को गाड़ी खरीदने में कम समय लगेगा और डीलर्स भी तेजी से डिलीवरी दे पाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI आधारित सिस्टम मानवीय त्रुटियों को कम करेगा और पारदर्शिता को बढ़ाएगा, जिससे ग्राहक और डीलर दोनों को फायदा होगा।
वर्कशॉप में यह भी सामने आया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल फाइनेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कस्टमर इंटरैक्शन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। AI आधारित टूल्स के जरिए डीलर्स अब ग्राहकों से सीधे संपर्क कर सकते हैं, उन्हें वाहन की पूरी जानकारी दे सकते हैं और टेस्ट ड्राइव बुकिंग जैसी प्रक्रियाएं भी आसान बना सकते हैं। इससे ग्राहक अनुभव बेहतर हो रहा है और बिक्री प्रक्रिया अधिक संगठित हो रही है।
हालांकि, तकनीकी प्रगति के साथ-साथ रोड सेफ्टी एक बड़ी चिंता के रूप में सामने आई। राजस्थान पुलिस की डीआईजी राशि डोगरा ने बताया कि देश में हर साल लाखों सड़क हादसे होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या युवाओं की होती है। उन्होंने यह भी कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सड़क दुर्घटनाओं में भागीदारी एक गंभीर मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, सड़क सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग को मिलकर काम करना होगा।
इस संदर्भ में पुरुषोत्तम शर्मा, जो राजस्थान परिवहन विभाग से जुड़े हैं, ने बताया कि राज्य में हर दिन औसतन 35 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो रही है। उन्होंने लाइसेंसिंग सिस्टम को मजबूत करने और नियमों के सख्ती से पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को और पारदर्शी और सख्त बनाना समय की जरूरत है, ताकि अयोग्य ड्राइवरों को सड़क पर आने से रोका जा सके।
वर्कशॉप के दौरान डेटा वेरिफिकेशन और नियमों के पालन पर भी विशेष ध्यान दिया गया। राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि डीलर्स द्वारा अपलोड किए गए डेटा की विभाग द्वारा जांच की जाती है, लेकिन इसमें नियमों का पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि एनसीआर नंबर की गाड़ियों पर की गई सख्त कार्रवाई के बाद कई अवैध वाहन बाजार बंद हुए हैं, जो प्रशासन की सख्ती का परिणाम है। साथ ही उन्होंने बीएच नंबर प्लेट को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि यह सुविधा केवल पात्र लोगों तक ही सीमित रहनी चाहिए।
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर को लेकर भी इस वर्कशॉप में विस्तार से चर्चा हुई। जयपुर में इस समय लगभग 40 से 50 हजार इलेक्ट्रिक वाहन मौजूद हैं, लेकिन उनके अनुरूप चार्जिंग स्टेशन की संख्या काफी कम है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित करने की आवश्यकता बताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार किया जाए, तो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को और अधिक बढ़ावा मिल सकता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
वर्कशॉप का एक महत्वपूर्ण पहलू डीलर्स और प्रशासन के बीच सीधा संवाद रहा। साईं गिरधर ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य डीलर्स की समस्याओं को सीधे अधिकारियों तक पहुंचाना था, ताकि उनके समाधान पर तेजी से काम किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवाद से न केवल समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि पूरे सेक्टर को मजबूती भी मिलती है। कार्यक्रम में चेयरपर्सन सार्विक शाह की मौजूदगी ने भी इस आयोजन को विशेष महत्व दिया।


