मनीषा शर्मा। राजस्थान खनन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ चुका है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बिलाड़ा (जोधपुर) में लाइमस्टोन के 8 मेजर मिनरल ब्लॉकों की ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि इन ब्लॉकों की सभी आवश्यक सरकारी अनुमतियां पहले से ही प्राप्त कर ली गई हैं, जिससे राजस्थान ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
प्री-एम्बेडेड मॉडल से शुरू हुई नीलामी प्रक्रिया
राज्य सरकार ने खनन क्षेत्र में निवेश को सरल और तेज़ बनाने के लिए “प्री-एम्बेडेड मॉडल” अपनाया है। इसके तहत खदानों की नीलामी से पहले ही सभी जरूरी स्वीकृतियां जैसे माइनिंग प्लान, पर्यावरण अनुमति, वन विभाग की अनापत्ति, और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिए गए हैं।
राजस्थान स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (RSMET) को इस पूरी प्रक्रिया का नोडल संगठन बनाया गया है। 7 नवंबर से भारत सरकार के MSTC प्लेटफॉर्म पर इन ब्लॉकों की ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
नीलामी की प्रमुख तिथियां और प्रक्रिया
नीलामी से जुड़ा बिड डॉक्यूमेंट 24 नवंबर तक MSTC पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा, जबकि बोली लगाने की अंतिम तिथि 12 दिसंबर निर्धारित की गई है। उम्मीद की जा रही है कि इन ब्लॉकों के परिचालन में आने के बाद प्रदेश को न केवल बड़े पैमाने पर राजस्व प्राप्त होगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
सामान्य प्रक्रिया से तीन गुना तेज़ होगा खनन कार्य
खनन विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकांत ने बताया कि आमतौर पर खानों की नीलामी के बाद परिचालन शुरू करने में ढाई से तीन साल का समय लगता है। इसका कारण विभिन्न विभागों से अनुमतियां प्राप्त करने में लगने वाला लंबा समय है। लेकिन इस “प्री-एम्बेडेड मॉडल” के तहत अब यह प्रक्रिया बेहद तेज़ होगी और खनन कार्य तुरंत शुरू किया जा सकेगा।
केंद्र सरकार की नीति से तालमेल
केंद्र सरकार ने MMDR एक्ट (Mines and Minerals Development and Regulation Act) में संशोधन करते हुए राज्यों को निर्देश दिए थे कि वे प्राथमिकता के आधार पर कम से कम पांच प्री-एम्बेडेड ब्लॉक तैयार करें। राजस्थान ने न केवल इन निर्देशों का पालन किया, बल्कि देश का पहला राज्य बनकर 8 ब्लॉकों की नीलामी शुरू कर दी। इसके लिए RSMET को ‘प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (PMU)’ के रूप में नियुक्त किया गया है।
क्या है ‘प्री-एम्बेडेड’ मॉडल?
‘प्री-एम्बेडेड’ मॉडल एक ऐसा ढांचा है जिसमें नीलामी से पहले ही सभी आवश्यक विभागीय अनुमतियां प्राप्त कर ली जाती हैं। इससे नीलामी के बाद निवेशक को तुरंत खनन कार्य शुरू करने का मौका मिलता है। यह मॉडल “Ease of Doing Business” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और प्रदेश में औद्योगिक विकास और खनिज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
पहले से प्राप्त सभी आवश्यक स्वीकृतियां
RSMET ने नीलामी से पहले जिन विभागों से स्वीकृतियां प्राप्त की हैं, उनमें शामिल हैं –
माइनिंग प्लान की स्वीकृति (Directorate of Mines)
फॉरेस्ट विभाग से फॉरेस्ट क्लियरेंस
पर्यावरण विभाग से ToR, EIA, जनसुनवाई और SEIAA अनुमति
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से CTE और CTO स्वीकृति
राजस्व विभाग से चरागाह भूमि उपयोग की मंजूरी
इन सभी अनुमतियों के चलते अब निवेशकों को खान परिचालन शुरू करने में किसी देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आर्थिक और रोजगार वृद्धि की नई दिशा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि इस कदम से राजस्थान के खनन क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी। ब्लॉकों के परिचालन में आने के बाद राज्य की खनिज आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और हजारों स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही इससे राज्य को राजस्व वृद्धि और निवेश आकर्षण के नए द्वार भी खुलेंगे।
उन्होंने कहा कि यह पहल राजस्थान को खनन क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगी और आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देगी।


