उदयपुर ग्रामीण से विधायक फूलसिंह मीणा ने शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल कायम करते हुए 68 वर्ष की उम्र में राजनीति विज्ञान में एम.ए. (अंतिम वर्ष) की परीक्षा दी है। जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ एक सामान्य छात्र की तरह परीक्षा केंद्र तक पहुंचना न केवल उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
महज 15 साल की उम्र में पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी। आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों के कारण शिक्षा का सफर रुक गया, लेकिन उनके भीतर सीखने की ललक कभी खत्म नहीं हुई। दशकों बाद उन्होंने एक बार फिर शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया और आज वे जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ से एम.ए. (अंतिम वर्ष) की परीक्षा दे चुके हैं।
बेटियों और पत्नी की प्रेरणा से लौटी शिक्षा की राह
विधायक फूलसिंह मीणा को दोबारा किताबों की दुनिया में लौटाने का श्रेय उनकी पांच बेटियों को जाता है। बेटियों ने उन्हें यह एहसास कराया कि शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि सोच और समाज को दिशा देने का माध्यम है। इसके साथ ही उनकी पत्नी शांति देवी ने भी उन्हें निरंतर प्रोत्साहित किया।
परिवार के सहयोग और आत्मविश्वास के बल पर मीणा ने 55 वर्ष की उम्र में फिर से पढ़ाई शुरू करने का साहस जुटाया। लगभग 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उन्होंने खुद को एक बार फिर छात्र के रूप में ढाल लिया और परीक्षा प्रणाली का सामना किया।
राजनीति को स्वच्छ बनाने के लिए शिक्षा जरूरी
विधायक फूलसिंह मीणा का मानना है कि यदि राजनीति को साफ-सुथरा और जवाबदेह बनाना है, तो राजनेताओं का शिक्षित होना बेहद आवश्यक है। इसी सोच के साथ उन्होंने राजनीति विज्ञान को अपनी उच्च शिक्षा का विषय चुना।
उनका कहना है कि शिक्षित जनप्रतिनिधि ही बेहतर नीति निर्माण, सुशासन और समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचा सकता है। यही कारण है कि विधायक बनने और लगातार तीसरी बार विधानसभा पहुंचने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को कभी नजरअंदाज नहीं किया।
व्यस्त राजनीतिक जीवन के बीच पढ़ाई की चुनौती
एक सक्रिय विधायक के लिए पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं होता। क्षेत्र के दौरे, जनता की समस्याएं, विधानसभा की जिम्मेदारियां और समितियों की बैठकें, इन सबके बीच पढ़ाई को जारी रखना अपने आप में बड़ी चुनौती है।
उनके सहयोगियों के अनुसार, फूलसिंह मीणा सफर के दौरान भी समय का सदुपयोग करते हैं। वे कार में यात्रा करते समय ऑडियो नोट्स सुनते हैं और खाली समय में जरूरी विषयों का अध्ययन करते हैं। यही अनुशासन और समर्पण उन्हें एक सफल छात्र के रूप में आगे बढ़ा रहा है।
जनजाति कल्याण समिति के सभापति, फिर भी शिक्षा को प्राथमिकता
लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए फूलसिंह मीणा वर्तमान में राजस्थान विधानसभा की जनजाति कल्याण समिति के सभापति भी हैं। इसके बावजूद उन्होंने यह साबित किया कि जिम्मेदारियों के बीच भी शिक्षा को प्राथमिकता दी जा सकती है।
वे मानते हैं कि शिक्षा ही वह शक्ति है, जो समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। इसी सोच के तहत वे अपने क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ से मिली नई प्रेरणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान से प्रेरित होकर विधायक मीणा ने अपने क्षेत्र में बेटियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने की एक अनूठी पहल शुरू की है। वे न केवल अपने परिवार की बेटियों, बल्कि समाज की अन्य होनहार बालिकाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
बेटियों को हवाई यात्रा कराकर बढ़ाया आत्मविश्वास
विधायक मीणा ने बताया कि उन्हें दोबारा पढ़ाई से जुड़ने की प्रेरणा उनकी बेटियों से ही मिली। इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए वे अब अन्य होनहार बेटियों को हवाई यात्रा कराकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।
इस पहल का उद्देश्य यह दिखाना है कि अभावों के बावजूद प्रतिभा और मेहनत के दम पर कोई भी ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। वे चाहते हैं कि उदयपुर ही नहीं, बल्कि देशभर की बेटियां शिक्षा के माध्यम से अपने सपनों को साकार करें।
50 की उम्र में 12वीं, 68 में MA तक का सफर
आर्थिक मजबूरी के कारण 15 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ने वाले फूलसिंह मीणा ने 50 वर्ष की उम्र में 12वीं की परीक्षा दी। उन्होंने वर्ष 2017 में एकलिंगगढ़ स्थित केंद्रीय विद्यालय से 12वीं बोर्ड की परीक्षा पास की।
इससे पहले 2013 में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच उन्होंने 10वीं की परीक्षा दी थी। उस समय वे तीन विषयों में सफल हुए, जबकि शेष दो विषय 2015 में पास किए। यह सफर उनके अदम्य साहस और शिक्षा के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है।


