उदयपुर स्थित जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय) में प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय के योग विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिलीप सिंह चौहान को निलंबित कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कार्रवाई उन पर लंबित जांच और गंभीर आरोपों को देखते हुए की है। रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली ने बताया कि डॉ. चौहान पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा रही है। जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबन के तहत रखा गया है।
कार्यवाहक निदेशक रहते हुए गड़बड़ियों का आरोप
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, डॉ. दिलीप सिंह चौहान माणिक्य लाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय में योग एवं शारीरिक शिक्षा विभाग में कई वर्षों तक कार्यवाहक निदेशक के पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कई स्तर पर अनियमितताएं कीं। रजिस्ट्रार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में करीब 10 लाख रुपये की वित्तीय और अन्य प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच की जाएगी, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
निलंबन के बाद केंद्रीय कार्यालय में ड्यूटी
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, डॉ. चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी और वहीं ड्यूटी देनी होगी। डॉ. श्रीमाली ने कहा कि निलंबन का उद्देश्य निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी भी प्रकार का दबाव या प्रभाव न पड़े।
जांच को प्रभावित करने के आरोप
रजिस्ट्रार ने यह भी आरोप लगाया कि जांच समिति के गठन के बाद से डॉ. चौहान जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे थे। उनके अनुसार, डॉ. चौहान पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया के माध्यम से विश्वविद्यालय और संस्था की छवि को धूमिल करने वाली भ्रामक और तथ्यहीन जानकारियां प्रसारित कर रहे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल जांच प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, बल्कि संस्थान की साख और प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
डॉ. चौहान पर लगे गंभीर आरोप
विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉ. दिलीप सिंह चौहान पर लगाए गए आरोपों को स्पष्ट रूप से सामने रखा है। इन आरोपों के अनुसार, उन्होंने नियमित सेवा में रहते हुए कई नियमों का उल्लंघन किया। प्रशासन का कहना है कि डॉ. चौहान ने बिना सक्षम अनुमति एक ही समय में विभिन्न पाठ्यक्रमों, परीक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लिया और इससे दोहरा लाभ प्राप्त किया। यह आचरण सेवा नियमों के विरुद्ध बताया गया है।
नियमों के विपरीत शैक्षणिक डिग्रियां लेने का आरोप
डॉ. चौहान पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने तथ्यों को छिपाकर और नियमों के विपरीत शैक्षणिक डिग्रियां अर्जित कीं। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस मामले की गहन जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि डिग्रियां प्राप्त करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
खरीद प्रक्रियाओं में वित्तीय अनियमितता
प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि ट्रैक सूट, ब्लेजर और अन्य सामग्री की खरीद में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं की गईं। इन खरीद प्रक्रियाओं में नियमों की अनदेखी कर संस्था को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। इन आरोपों के तहत यह जांच की जाएगी कि खरीद से जुड़ी प्रक्रियाएं पारदर्शी थीं या नहीं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
पद के दुरुपयोग और हितों के टकराव का मामला
डॉ. चौहान पर पद का दुरुपयोग करते हुए हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न करने और पारिवारिक लाभ सुनिश्चित करने के भी आरोप लगाए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सेवा आचरण के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आएगा।
संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप
इसके अलावा, डॉ. चौहान पर कर्तव्य में घोर लापरवाही बरतने और विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्था में अनुशासन और नैतिक आचरण सर्वोपरि होता है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
विभागीय जांच से सामने आएगी सच्चाई
राजस्थान विद्यापीठ प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डॉ. दिलीप सिंह चौहान के खिलाफ निष्पक्ष और पारदर्शी विभागीय जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।


