मनीषा शर्मा। राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को उपचुनाव होना है, और उससे ठीक पहले रविवार शाम चुनावी प्रचार थम गया। प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ऐसा बयान दिया जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति को हिला दिया। गहलोत ने निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा को ‘मिसगाइड’ बताया और कहा कि “जो इन्हें गाइड कर रहा है, वही इनका असली दुश्मन है।”
गहलोत ने कहा, “मुझे दुख होता है कि नरेश जैसा नौजवान लड़का मिसगाइड होकर राजनीति कर रहा है। बेवजह मीणा समाज को क्यों परेशान कर रहा है? मैं मीणा समाज से अपील करता हूं कि समझदारी से काम लें।” गहलोत का यह बयान केवल एक टिप्पणी नहीं बल्कि एक राजनीतिक रणनीति का संकेत था, जो सीधे तौर पर अंता उपचुनाव के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
किन नेताओं पर था गहलोत का इशारा?
नरेश मीणा निर्दलीय उम्मीदवार हैं, लेकिन उनके मंच पर कई बड़े राजनीतिक चेहरे नज़र आए हैं। उन्होंने खुले तौर पर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा, रालोपा सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल, आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह की तारीफ की है।
गुढ़ा लगातार उनके साथ मंच साझा कर रहे हैं, जबकि बेनीवाल ने भी नरेश का खुला समर्थन किया है। आम आदमी पार्टी ने भी परोक्ष रूप से नरेश को समर्थन दिया है। इसी वजह से माना जा रहा है कि गहलोत का बयान इन नेताओं की ओर ही इशारा था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का मकसद यह संदेश देना था कि नरेश मीणा को जो लोग “गाइड” कर रहे हैं, वही उन्हें गलत दिशा में ले जा रहे हैं। गहलोत ने यह भी संकेत दिया कि कांग्रेस का असली विरोधी नरेश नहीं बल्कि वे ताकतें हैं जो उन्हें मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रही हैं।
मीणा समाज को साधने की रणनीति
अंता विधानसभा क्षेत्र में मीणा समाज का वोट बैंक निर्णायक माना जाता है। ऐसे में गहलोत का यह बयान कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार, गहलोत ने एक साथ दो संदेश देने की कोशिश की—पहला, नरेश मीणा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर उन्हें ‘मिसगाइडेड’ बताना, और दूसरा, मीणा समाज को यह एहसास कराना कि उनके अपने समुदाय के युवक को कुछ बाहरी नेता इस्तेमाल कर रहे हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर नरेश मीणा 15 से 20 हजार वोट भी खींच लेते हैं, तो कांग्रेस के लिए चुनावी स्थिति मुश्किल हो सकती है। इसलिए गहलोत ने यह रणनीतिक बयान देकर मीणा समाज को एकजुट करने की कोशिश की है।
कांग्रेस ने बदली प्रचार रणनीति
गहलोत के इस बयान के बाद कांग्रेस ने अपने प्रचार अभियान का फोकस पूरी तरह मीणा बहुल इलाकों पर केंद्रित कर दिया है। प्रचार के आखिरी दिन कांतिलाल भूरिया, टीकाराम जूली, और गोविंद सिंह डोटासरा जैसे बड़े नेताओं ने अंता और मांगरोल क्षेत्र के गांवों में जनसंपर्क किया। मांगरोल कृषि मंडी में कांग्रेस ने बड़ी सभा आयोजित की, जिसमें मीणा समाज के प्रतिनिधियों को साधने की कोशिश की गई।
कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया अब मुख्य रूप से स्थानीय मुद्दों और सामाजिक एकता पर प्रचार कर रहे हैं, ताकि नरेश मीणा के प्रभाव को कम किया जा सके। वहीं, भाजपा ने मोरपाल सुमन को मैदान में उतारा है, जो पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा कर रहे हैं।
त्रिकोणीय मुकाबले से बढ़ी रोचकता
अंता उपचुनाव अब त्रिकोणीय बन गया है। एक तरफ कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया हैं, दूसरी तरफ भाजपा के मोरपाल सुमन, और तीसरी ओर निर्दलीय नरेश मीणा मैदान में हैं। नरेश का प्रदर्शन इस चुनाव का समीकरण तय करेगा।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, अंता विधानसभा क्षेत्र में लगभग 2.68 लाख मतदाता हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा मीणा और अन्य ओबीसी समुदायों का है। यही वजह है कि सभी दल इन वर्गों को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं।


