मनीषा शर्मा। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सलाह दी है कि वे “कल की चिंता किए बिना पूरी ऑथोरिटी से शासन करें।” जयपुर स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने कहा कि भजनलाल शर्मा को, जो पहली बार विधायक बने और सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं, अब बिना किसी भय या संकोच के पूरे अधिकार के साथ काम करना चाहिए।
गहलोत ने कहा, “भजनलाल पहली बार एमएलए बने और मुख्यमंत्री बन गए। उनको तो पूरी ऑथोरिटी से राज करना चाहिए। कल की चिंता नहीं करनी चाहिए, तब वे कामयाब होंगे। हमारे भजनलाल पंडित हैं, वे कल की चिंता करते हैं। हम उनसे कहते हैं, आप कल की चिंता मत करो। जमकर राज करो और ऑथोरिटी से राज करो तो राजस्थान का भला होगा।” पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अगर मुख्यमंत्री आत्मविश्वास के साथ शासन करते हैं तो प्रदेश में सुशासन (गुड गवर्नेंस) आएगा और जनता का भला होगा।
“मुख्यमंत्री सब कुछ नहीं कर सकते, लेकिन जिम्मेदारी निभानी जरूरी”
स्लीपर बस हड़ताल पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने सरकार के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे बड़ा माध्यम है, लेकिन मौजूदा सरकार उसमें विफल साबित हो रही है।
गहलोत ने कहा, “सरकार को चाहिए कि बस संचालकों को बुलाकर बात करे, उनसे समझाइश करे। हमारे समय में भी ऐसी समस्या आई थी, लेकिन हमने बातचीत से समाधान निकाल लिया था। अब यह सरकार किससे बात करेगी, कौन जिम्मेदारी निभाएगा — यही समस्या है।”
उन्होंने आगे कहा, “मुख्यमंत्री सब काम नहीं कर सकते, लेकिन उन्हें टीम बनाकर जिम्मेदारियां तय करनी चाहिए। जनता की समस्याएं सुनना और समाधान करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।”
“राजस्थान में लोगों को इतना दुखी मैंने कभी नहीं देखा”
राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए गहलोत ने कहा कि अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा है और जनता में असंतोष फैला हुआ है। उन्होंने कहा, “रेप, डकैती और हत्या आम बात बन गई हैं। लोग परेशान हैं कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही। मैंने राजस्थान में लोगों को इतना दुखी कभी नहीं देखा जितने आज भजनलाल शर्मा के शासन में हैं।”
गहलोत ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन जनता की शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे और राज्य में भय का माहौल बन गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, वरना जनता का भरोसा उठ जाएगा।
“एनडीए के यही हाल रहे तो डेमोक्रेसी नाम की रह जाएगी”
अशोक गहलोत ने अपने बयान में राष्ट्रीय राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र में एनडीए सरकार लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रही है। उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा, “महाराष्ट्र में आपने देखा कि किस तरह सत्ता पलटी गई। अगर मोदी जी का जादू इतना ही चल रहा होता तो लोकसभा चुनाव में दिखता। लोकसभा में तो जादू नहीं चला, लेकिन विधानसभा में एकतरफा जीत कैसे मिली? इसका मतलब है कि वहां धनबल और तोड़फोड़ का खुला खेल चला।”
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक सौदेबाजी, खरीद-फरोख्त और धनबल का प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। उन्होंने चेतावनी दी कि “अगर एनडीए इसी तरह की राजनीति करती रही तो देश के सामने बहुत बड़ा खतरा खड़ा होगा। डेमोक्रेसी बचेगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है।”
“चुनाव आयोग का रवैया तानाशाहीपूर्ण”
गहलोत ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग का दायित्व निष्पक्ष जांच और सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर देना है, लेकिन मौजूदा समय में आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण दिख रहा है। उन्होंने कहा, “अगर कोई शिकायत करता है, तो चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि उसकी जांच करवाए। शिकायत झूठी है या सच्ची, यह बाद में तय होगा। लेकिन अभी तो आयोग शिकायत करने वालों से ही सवाल-जवाब कर रहा है, उन्हें धमकाया जा रहा है। यह रवैया लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।” गहलोत ने इसे “तानाशाहीपूर्ण रवैया” बताते हुए कहा कि देश के नागरिकों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर रहा है।
“लोकतंत्र बचाना सबकी जिम्मेदारी”
गहलोत ने कहा कि आज के समय में हर नागरिक को लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहना होगा। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ किसी पार्टी या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे देश के लोगों की जिम्मेदारी है कि वे लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखें। अगर संस्थाएं निष्पक्ष रहें और सरकारें जवाबदेह हों, तभी लोकतंत्र जिंदा रहेगा।” उन्होंने आगे कहा कि जनता को भी अपनी आवाज उठानी चाहिए और शासन से सवाल करने की आदत डालनी चाहिए। लोकतंत्र में सरकार जनता की मालिक नहीं, बल्कि सेवक होती है।


