शोभना शर्मा। सोमवार का दिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए विशेष रहा। राजधानी जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) मुख्यालय पर पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बरकतुल्लाह खान की जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने शिरकत की। दोनों नेताओं ने बरकतुल्लाह खान की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि के बाद जब अशोक गहलोत ने मीडिया से बातचीत की तो उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर जमकर हमला बोला। गहलोत ने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी और कांग्रेस की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि आज देश को कांग्रेस जैसी पार्टी की सबसे ज्यादा जरूरत है।
राहुल गांधी की यात्रा से घबराए अमित शाह
गहलोत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी की यात्रा जैसे ही शुरू होने वाली है, वैसे ही शाह अचानक नए-नए कानून लाने में जुट जाते हैं। उन्होंने कहा, “यह नकारात्मक सोच है। जनता सब देख रही है और यह रवैया भाजपा को ले डूबेगा। देश जानता है कि कांग्रेस ही देश को सही दिशा दे सकती है।” गहलोत का यह बयान इस मायने में अहम है क्योंकि राहुल गांधी की यात्राओं को कांग्रेस नेतृत्व लगातार जनता से जुड़ने और संगठन को मजबूत करने का सबसे प्रभावी तरीका मान रहा है। गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी के कार्यक्रमों से भाजपा खौफजदा है, और इसी वजह से केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को झूठे मामलों में फंसाकर उन्हें पद से हटाने का काम कर रही है।
मणिपुर हिंसा पर मोदी सरकार को घेरा
अशोक गहलोत ने मीडिया से बातचीत के दौरान मणिपुर हिंसा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब वहां महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा था और समाज हिंसा की आग में जल रहा था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां नहीं गए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को भी कठघरे में खड़ा करते हुए कहा, “गृह मंत्री ने पीएम को मनाने की कोशिश क्यों नहीं की? जब देश संकट में था, तब सबसे बड़ी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की थी, लेकिन उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।” गहलोत ने कहा कि इसके विपरीत राहुल गांधी ने वहां जाने का साहस दिखाया और पीड़ितों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया। यह कांग्रेस और भाजपा के बीच सोच का अंतर है।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े पर सवाल
कार्यक्रम में गहलोत ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफ़े का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि धनखड़ इतने बड़े संवैधानिक पद पर कार्यरत थे, सुबह से लेकर शाम तक काम कर रहे थे, मीटिंग्स ले रहे थे और अचानक इस्तीफ़ा दे दिया। गहलोत ने सवाल किया कि आखिर इतनी जल्दी इस्तीफ़ा देने की नौबत क्यों आई? गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए बयान को गहलोत ने ‘जुमला’ करार दिया। शाह ने कहा था कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफ़ा दिया है, लेकिन गहलोत ने इसे जनता को गुमराह करने वाला बयान बताया। उन्होंने कहा, “अगर उनका स्वास्थ्य वाकई खराब था तो क्या सरकार के किसी बड़े नेता ने उनसे मुलाकात की? क्या किसी ने उनकी तबीयत के बारे में गंभीरता से जानकारी ली?” गहलोत ने आगे बताया कि जगदीप धनखड़ उनके व्यक्तिगत मित्र भी हैं और वे उनसे कई बार फोन पर बात करते रहे हैं। इसलिए वे इस बात पर यकीन नहीं कर सकते कि इस्तीफ़ा केवल स्वास्थ्य कारणों से दिया गया है।
कांग्रेस की भूमिका पर जोर
अशोक गहलोत ने इस मौके पर कांग्रेस की प्रासंगिकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा देश को एकजुट किया है और अगर पार्टी कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करें तो आज भी कांग्रेस भारत को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। गहलोत ने कहा कि आज का समय कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन जनता अब बदलाव चाहती है और यह बदलाव कांग्रेस ही ला सकती है।


